तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 20 विद्रोही लोकसभा सांसदों ने रविवार को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के आवास पर मुलाकात की और उन्हें पत्र सौंपकर बताया कि वे नेशनलिस्ट सिटीजन पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय कर रहे हैं। विद्रोही सांसद अभी NCPI में शामिल हो रहे हैं जिससे, उन्हें अयोग्य न ठहराया जा सके।
संवैधानिक नियमों और दल-बदल विरोधी कानून की वजह से अगर किसी पार्टी के दो-तिहाई सदस्य किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं तो उन्हें अयोग्य नहीं ठहराया जाता। विद्रोही सांसदों का कहना है कि वे TMC के दो-तिहाई से ज्यादा हैं।
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क्यों TMC से अलग हुआ है यह धड़ा?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में बीजेपी को जीत मिली। तृणमूल कांग्रेस में फूट पड़ गई। 60 से ज्यादा विधायकों के साथ ऋतब्रत बनर्जी ने मोर्चा खोला तो सांसदों ने भी ममता बनर्जी की पार्टी तोड़ दी। अभिषेक बनर्जी से सांसद नाराज थे और उनकी पार्टी में बढ़ती दखल, इन्हें रास नहीं आई।
क्यों NCPI में गए हैं ये सांसद?
डॉ. काकोली घोष दस्तिदार ने कहा है कि वह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना नेता मानती हैं, वह एनडीए के साथ मिलकर देश हित में काम करेंगी। तृणमूल कांग्रेस के सबसे बड़े नेताओं में से एक सुदीप बंद्योपाध्याय भी इसी गुट के हैं। वह सबसे सीनियर सांसद हैं लेकिन अब बगावत कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि फिलहाल उनके साथी NCPI में जा रहे हैं, लेकिन जुलाई में संसद सत्र शुरू होने पर वे तृणमूल कांग्रेस पर अपना दावा ठोकेंगे क्योंकि उनके पास बहुमत है।
कितने सांसद स्पीकर से मिले?
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलने 19 सांसद पहुंचे थे, जबकि विद्रोहियों का दावा है कि उनके पास 20 सांसदों का समर्थन है। 2024 लोकसभा चुनाव में TMC ने 29 सीटें जीती थीं, लेकिन एक सांसद के निधन के बाद उनकी संख्या 28 रह गई है। इनमें से 8 सांसद अभी भी ममता बनर्जी के प्रति वफादार हैं।
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TMC के बुरे दिन कैसे आए?
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में TMC की हार के बाद पार्टी में बगावत शुरू हुई थी। विद्रोही सांसदों ने पहले बीजेपी नेता भूपेंद्र यादव के घर पर बैठक की थी। अब ममता बनर्जी के पास सिर्फ 8 सांसद और 18 से भी कम विधायक बचे हैं। उनकी पार्टी अलग-थलग पड़ गई है। अभिषेक बनर्जी पर गिरफ्तारी की तलवार मंडरा रही है। कभी हमेशा गुलजार रहने वाला ममता बनर्जी का कालीघाट स्थित आवास आज वीरान है। इक्का-दुक्का लोग उनसे मिलने पहुंच रहे हैं।
तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसद कौन हैं?
- काकोली घोष दस्तीदार
- शताब्दी रॉय
- बापी हलदर
- शर्मिला सरकार
- शर्मिला बंद्योपाध्याय
- जगदीश बर्मा बसुनिया
- असित कुमार मल
- अरूप चक्रवर्ती
- रचना बनर्जी
- सायोनी घोष
- खलीलुर रहमान
- अबू ताहेर खान
- युसूफ पठान
- मिताली बेग
- माला रॉय
- कालीपद सोरेन
- दीपक अधिकारी
- जून मालिया
- पार्थ भौमिक
ये सांसद, बीजेपी की सहयोगी पार्टी में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नेता मान रहे हैं लेकिन अभी एक महीने पहले तक ये नेता बीजेपी के सबसे बड़े आलोचक रहे हैं। काकोली घोष हों, दीपक अधिकारी, माला रॉय या सायोनी घोष, ये सभी बीजेपी के धुर आलोचक नेताओं में शुमार रहे हैं। अब कैसे बीजेपी को समर्थन देंगे, यह देखने वाली बात होगी।
सायोनी घोष: कैसे बर्दाश्त करेगी बीजेपी?
ममता बनर्जी की करीबी नेता रही हैं। तृणमूल कांग्रेस के यूथ विंग की अध्यक्ष भी रहीं हैं। सायोनी पर ममता बनर्जी आंख मूंदकर भरोसा करती रही हैं, पार्टी की टॉप लीडरशिप में बहुत कम वक्त में उन्होंने जगह बना ली थी। हर जगह, ममता के साथ नजर आती थीं। तृणमूल कांग्रेस में उनका कद, महुआ मोइत्रा से भी आगे बढ़ गया था।
सायोनी, ममता बनर्जी की पिच पर ही बैटिंग करती आईं हैं। वह सेक्युलर राजनीति करती हैं और हिंदुत्व के खिलाफ कई ऐसे विवादित बयान दे चुकी हैं कि उन्हें एनडीए में अपनाने से बीजेपी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
सायोनी घोष, अभिनेत्री रहीं हैं। वह अपने सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर अक्सर ट्रोल होती रहीं हैं। साल 2015 में उन्होंने एक कार्टून पो्सट किया था, जिसमें शिवलिंग पर कंडोम चढ़ाया हुआ दिखाया गया था। सायोनी ने बाद में सफाई दी कि उनका अकाउंट हैक हुआ था और उन्होंने इसके लिए सार्वजनिक माफी भी मांगी।
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बीजेपी ने उन्हें इस मुद्दे पर खूब घेरा, अब वह बीजेपी की साथी हैं। उनका विधानसभा चुनावों के दौरान 'काबा-मदीना' गाना भी चर्चा के केंद्र में आया था, जिसे लेकर बीजेपी ने तृणमूल कांग्रेस पर तुष्टीकरण और मुस्लिम परस्ती का आरोप लगाया था। वह ED की रडार पर रहीं हैं, शिक्षक भर्ती घोटाले में उनसे भी पूछताछ हुई है। सायोनी घोष को कैसे बीजेपी के लोग बर्दाश्त करेंगे, यह देखने वाली बात होगी।
काकोली घोष, बीजेपी हमले भूल जाएगी
काकोली घोष, विद्रोही गुट की अगुवाई कर रहीं हैं। वह तृणमूल कांग्रेस के महिला मोर्चा की अध्यक्ष रहीं हैं। ममता बनर्जी की सबसे खास नेताओं में शुमार होती रहीं लेकिन अब उन्हीं ने ममता बनर्जी को दगा दिया है। अपने कार्यकाल में बीजेपी की सबसे ज्यादा मुखर आलोचना काकोली घोष ने ही की है।
24 मई तक वह बीजेपी के खिलाफ बोलती रहीं। ममता बनर्जी ने चुनाव हारने के बाद जब बीजेपी पर आरोप लगाए थे, तब काकोली घोष ने इसे अपने X पर शेयर किया था, बीजेपी पर नरसंहार और कानून व्यवस्था बिगाड़ने का आरोप लगाया था। अब वह एनडीए गठबंधन में बीजेपी की खास दोस्त हैं। वह महंगाई और LPG के मुद्दे पर संसद में अक्सर मुखर रहीं हैं।
सुदीप बंद्योपाध्याय, ममता के दोस्त, अब NDA के हुए
सुदीप बंद्योपध्याय ममता बनर्जी के सबसे भरोसेमंद नेताओं में शुमार रहे हैं। वह 6 बार के सांसद रहे हैं, पार्टी के थिंक टैंक में शामिल रहे हैं। अब उन्होंने भी ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है। जो सासंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी नीतियों के धुर आलोचक रहे हैं, अब एनडीए के पक्के साथी बन गए हैं।
शताब्दी रॉय, NDA से दोस्ती करेंगी कैसे?
शताब्दी रॉय, फिल्म अभिनेत्री हैं, बीरभूम से 4 बार की सांसद रहीं हैं। ममता बनर्जी की सखी-सहेली की तरह रहीं हैं। वह पश्चिम बंगाल तृणमूल कांग्रेस की उपाध्यक्ष हैं, अब ममता बनर्जी को दगा दे चुकी हैं। 24 मई तक वह बीजेपी पर ईवीएम में धांधली का आरोप लगाती रहीं। फालदा के नतीजों को खारिज करती रहीं। उन्होंने चुनाव में धांधली और हिंसा का आरोप लगाया। वह बीजेपी को खुली धमकी दे चुकी हैं।
ईडी कार्रवाई को लेकर वह कह चुकी हैं कि बीजेपी सैद्धांतिक जंग नहीं जीत सकती इसलिए विपक्षी नेताओं को धमकी, डर और छापेमारी करके परेशान कर रही है। हिंदुत्व के मुद्दे पर भी वह बीजेपी को घेरती रहीं, अब बीजेपी की साथी हैं। जब 4 मई को चुनाव के नतीजे आ रहे थे वह बार-बार कह रहीं थी कि नतीजों का इतंजार कीजिए, जीत तृणमूल कांग्रेस की होगी। उन्होंने भी ममता बनर्जी को दगा देने का विकल्प चुनाव।
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कैसे मुश्किलें बढ़ाएंगे?
विपक्ष अब घेर रहा है कि जो लोग, बीजेपी को पानी पीकर कोसते थे, अब उसी को समर्थन दे रहे हैं। बीजेपी पर आरोप लग रहे हैं कि तृणमूल कांग्रेस के खिलाफ बीजेपी ने 4 मई को चुनाव जीता है, जिस सायोनी घोष के काबा वाले बयान पर तृणमूल कांग्रेस को घेरा है, उसके 2 तिहाई से ज्यादा सांसद बीजेपी को समर्थन देने पहुंच गए हैं। बीजेपी ने उन्हें एनडीए गठबंधन के बैनर तले रखा है। विपक्ष का आरोप है कि बीजेपी की विचारधारा सिर्फ चुनाव जीतना है, जो लोग बीजेपी को समर्थन देते हैं, आरोप मुक्त होते हैं, गुनाह माफ हो जाते हैं और वॉशिंग मशीन में धुलकर निकलते हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे बयानों की भरमार है। तृणमूल कांग्रेस के बागी नेताओं के आने से बीजेपी के अपने भी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं।
