पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बनर्जी ने पार्टी विधायक मदन मित्रा के इस्तीफे पर प्रतिक्रिया दी। ममता बनर्जी का दावा है कि मंगलवार को ईडी ने मदन मित्रा की पत्नी और बेटों को तलब किया था, सिर्फ इसीलिए उन्होंने इस्तीफा दिया है। उनके (मित्रा) फैसले से अभिषेक बनर्जी का कोई लेना देना नहीं है। उन्होंने कहा कि जो जाना चाहते हैं, वह जा सकते हैं। ममता बनर्जी ने बीजेपी को भी आड़े हाथों लिया।

 

ममता बनर्जी ने कहा, 'बीजेपी चाहती थी कि मुझे दिल का दौरा पड़े, लेकिन मैं तब तक जीवित रहूंगी जब तक तुम्हारा अंत न हो जाए।' उधर, टीएमसी छोड़ने वाले मदन मित्रा ने कहा कि अभिषेक बनर्जी को छह महीने की खातिर पद छोड़ने को कहा गया, लेकिन उन्होंने ऐसा करने मना कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी सिर्फ अभिषेक बनर्जी की सेवा तक सीमित रह गई है।

 

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हालांकि पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने अपने भतीजे का बचाव किया और कहा, 'अभिषेक बनर्जी को बहाना बनाया गया है। उनके परिवार वालों को तलब किया गया था। अगर वह चाहते तो राहत पा सकते थे, लेकिन वह मैदान से भागे नहीं। जिस तरह से उन्होंने लड़ना जारी रखा है, उनकी सारी कमियां माफ कर दी गई हैं।'

'मैं टीएमसी का ही हिस्सा हूं'

विधायक मदन मित्रा को ममता बनर्जी का करीबी माना जाता था। वे कामरहाटी से विधायक के अलावा टीएमसी के मुख्य सचेतक थे। बुधवार को उन्होंने टीएमसी की सभी राष्ट्रीय और राज्य समितियों से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई वाले बागी गुट को ज्वाइन कर लिया। बागी गुट में शामिल होने के बाद मदन मित्रा ने कहा कि मैंने अपना कमरा बदला है, मकान नहीं। मैं टीएमसी का ही हिस्सा हूं।

 

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सबसे बड़े संकट से जूझ रही टीएमसी

विधानसभा चुनाव में मिली हार के बाद टीएमसी अपने सबसे गहरे संकट से जूझ रही है। पार्टी के कुल 80 में से 59 विधायक बागी हो चुके हैं। 28 लोकसभा सांसदों में 20 ने त्रिपुरा की एक गुमनाम पार्टी ज्वाइन कर ली है। 10 राज्यसभा सदस्यों में से तीन ने हाल ही में इस्तीफा देने के बाद बीजेपी ज्वाइन कर ली। मदन मित्रा के अलावा कई अन्य भरोसेमंद सहयोगी भी ममता बनर्जी के किनारा कर चुके हैं।