पंजाब की राजनीति में जेल में बंद सांसद अमृतपाल सिंह की राजनीतिक ताकत लगातार बढ़ती दिखाई दे रही है। उनकी पार्टी अकाली दल वारिस पंजाब दे लगातार नए राजनीतिक चेहरे जोड़ रही है और अब इस कड़ी में बड़ा नाम जुड़ने जा रहा है।पूर्व विधायक मनप्रीत सिंह अयाली आज अकाली दल वारिस पंजाब दे के साथ जुड़ गए हैं। पिछले कुछ समय से इसको लेकर राजनीतिक अटकलें चल रही थीं और अब इसे अमृतपाल खेमे के लिए बड़ी राजनीतिक बढ़त माना जा रहा है। पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले यह पंथक पार्टी लगातार जमीनी नेताओं को साथ जोड़ रही है और शिरोमणि अकाली दल जैसे राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ा रही है।
मनप्रीत सिंह अयाली लंबे समय तक शिरोमणि अकाली दल के प्रमुख नेताओं में शामिल रहे हैं और सुखबीर बादल के करीबी नेताओं में से एक माने जाते थे। वह 2012 से 2017 तक विधायक भी रहे और इसके बाद 2019 और 2022 में भी अकाली दल की टिकट पर चुनाव जीते। हालांकि, बाद में उन्होंने शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) का दामन थामा था, लेकिन संगठन के भीतर बढ़ते मतभेदों के चलते कुछ समय पहले सभी पदों से इस्तीफा देकर पार्टी से दूरी बना ली थी। आज उन्होंने आधिकारिक तौर पर अमृतपाल की पार्टी का हाथ थाम लिया है।
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पार्टी के पास दो सासंद
अमृतपाल सिंह पिछले कुछ सालों से पंजाब में बड़ा चेहरा बनकर उभरे हैं। पंथक राजनीति में और कट्टरपंथ की राजनीति में उन्होंने अपनी पहचान बनाई है। फिलहाल वह जेल में बंद हैं लेकिन इसके बावजूद उनकी राजनीतिक ताकत बढ़ती जा रही है। जेल में बंद रहते हुए ही उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव निर्दलीय लड़ा और भारी अंतर से जीत दर्ज की। इसके बाद उन्हें पंथक राजनीति के एक और चेहरे और सांसद सरबजीत सिंह खालसा का साथ मिल गया। इसके बाद उन्होंने मिकर एक राजनीतिक पार्टी बनाई। इस पार्टी के मौजूदा समय में दो सासंद हो चुके हैं और इनकी पार्टी से लगाताप पंथक लोग जुड़ रहे हैं।
दो सांसदों वाली पार्टी बनने की ओर
मनप्रीत सिंह अयाली के जुड़ने के साथ पार्टी का राजनीतिक दायरा और बड़ा माना जा रहा है। अकाली दल वारिस पंजाब दे पहले से खडूर साहिब से सांसद अमृतपाल सिंह के नेतृत्व में आगे बढ़ रही है। इसके साथ ही फरीदकोट से सांसद सरबजीत सिंह खालसा को भी पार्टी के प्रमुख चेहरों में गिना जाता है और इस तरह पार्टी के पास अब अमृतपाल समेत दो सांसदों का राजनीतिक समर्थन माना जा रहा है।
अकाली दल को पेश कर रहे चुनौती
पंजाब की राजनीति में शिरोमणि अकाली दल पंथक राजनीतिक का सबसे बड़ा चेहरा रहा है। आजादी से पहले और आजादी के बाद पार्टी ने सिखों की पार्टी के रूप में पहचान बनाई। हालांकि, 2017 में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी सत्ता से बाहर हुई और इसके बाद पंजाब की राजनीति पूरी तरह से बदल गई। शिरोमणि अकाली दल में नेतृत्व को लेकर फूट पड़ी और कई नेता छोड़कर दूसरे दलों में चले गए। इसके फायदा कांग्रेस और आम आदमी पार्टी को भी हुआ। अब उनकी जगह कई अन्य पंथक चेहरे उभरकर सामने आए हैं, जो अमृतपाल सिंह के नेतृत्व में एकजुट हो रहे हैं। ऐसे में अपनी कोई हुई राजनीतिक जमीन की तलाश में जुटे शिरोमणि अकाली दल को मुश्किल हो सकती है।
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सीएम पद के दावेदार
अमृतपाल सिंह को उनकी पार्टी ने 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए सीएम पद का उम्मीदवार घोषित किया है। उनकी पार्टी उनके जेल में बंद रहने के बावजूद उनके लिए प्रचार कर रहे हैं। तमाम बड़े नेता उन्हें जेल से रिहा करने की मांग भी कर रहे हैं। शिरोमणि अकाली दल (पुनर सुरजीत) भी अमृतपाल सिंह की पार्टी से गठबंधन की मांग कर रहा है। हालांकि, अभी गठबंधन पर पेंच फंसा हुआ है। तमाम पंथक नेता अमृतपाल के साथ जुड़ रहे हैं। पार्टी 2027 में उन्हें सीएम फेस प्रोजेक्ट कर रही है।
