संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है। इस सत्र की शुरुआत से पहले ही तृणमूल कांग्रेस और शिवसेना (उद्धव बाला साहब ठाकरे) के कई सांसद नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (NDA) का हिस्सा बन चुके हैं। इसके बावजूद दो तिहाई बहुमत नहीं जुटा है। इसी कोशिश में NDA और खासकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) की ओर से लगातार कोशिश जारी है। इन कोशिशों के क्रम में अगला निशाना राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) का शरद पवार गुट है। सुनेत्रा पवार की अगुवाई वाली एनसीपी तो पहले से ही एनडीए का हिस्सा लेकिन अब शरद पवार को भी साथ लाने की कोशिश है। इसकी एक वजह बीजेपी की जरूरत है और दूसरी शरद पवार की मजबूरी क्योंकि वह अपनी पार्टी का हाल आम आदमी पार्टी (AAP), TMC और शिवसेना (UBT) जैसा होते नहीं देखना चाहते हैं।

 

कुछ दिनों पहले ही शरद पवार और सुप्रिया सुले ऐसी बैठकों से इनकार कर रहे थे। हालांकि, तब भी कहा गया था कि एनसीपी (शरद पवार) की बातचीत बीजेपी और कांग्रेस दोनों से हो रही थी। खुद शरद पवार कांग्रेस के साथ जाना चाहते हैं लेकिन सांसदों का कहना है कि सत्ता के साथ जाकर वे अपने क्षेत्र में काम करवा सकते हैं। इसका एक फायदा एनसीपी (शरद पवार) को यह होगा कि पार्टी में किसी भी तरह की टूट नहीं होगी और सब सत्ता के साथ हो जाएंगे। अब मानसून सत्र के शुरू होने से ठीक पहले हलचल तेज हो गई है क्योंकि बीजेपी को अपना संख्या बल बढ़ाना है।

विलय, समर्थन या कुछ और?

BJP को ज्यादा से ज्यादा सांसदों का साथ चाहिए और एनसीपी के दोनों धड़ों के नेताओं को सत्ता का साथ। एनसीपी पहले से एनडीए में है तो ज्यादा नजरें अब एनसीपी (शरद पवार) की ओर हैं। केंद्रीय मंत्रिमंडल में फेरबदल की संभावनाएं हैं तो उसके हिसाब से भी चर्चा हो रही है। एनसीपी के नेता प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे ने हाल ही में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की। कहा जा रहा है कि इसके बाद एनसीपी (शरद पवार) की ओर से जयंत पाटिल भी फडणवीस से मिलने पहुंचे। कुछ घंटे पहले ही जयंत पाटिल ने शरद पवार से भी मुलाकात की थी इसलिए अब कयास लगाए जा रहे हैं कि एनसीपी (शरद पवार) ने भी एनडीए से सीधी बातचीत शुरू कर दी है।

 

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वैचारिक रूप से भले ही शरद पवार कांग्रेस के साथ हों और उसी के साथ रहना भी चाहते हों लेकिन अब पार्टी बचाने के लिए उनकी मजबूरी हो गई है कि वह एनडीए के साथ जाएं। कहा जा रहा है कि उनकी पार्टी के सांसद मन बना चुके हैं कि उन्हें एनडीए के साथ ही जाना है। यही वजह है कि कुछ सांसदों से एकनाथ शिंदे की शिवसेना ने भी संपर्क किया है और कुछ से सीधे बीजेपी संपर्क में है। दरअसल, 6 सांसदों के साथ आते ही अब शिवसेना की स्थिति काफी मजबूत हो गई है और देवेंद्र फडणवीस उसे संतुलित करने के लिए जीतोड़ कोशिश कर रहे हैं।

 

चर्चा है कि देवेंद्र फडणवीस की पूरी कोशिश यह है कि शरद पवार अपनी पार्टी का विलय बीजेपी में कर दें और इसके बदले में सुप्रिया सुले को केंद्र में मंत्री पद दे दिया। विधानसभा में भी देवेंद्र फडणवीस की नजर एनसीपी (शरद पवार) के विधायकों पर है। वहां भी 10 में से ज्यादातर विधायकों पर डोरे डाल रहे फडणवीस एकनाथ शिंदे की तुलना में खुद को और मजबूत करना चाहते हैं ताकि उनकी कुर्सी पर किसी भी तरह का खतरा न आए।

 

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एनसीपी (शरद पवार) को क्या मिलेगा?

पार्टी के विधायक और सांसद सत्ता पक्ष के साथ होना चाहते हैं ताकि वे सरकारी फंड ला सकें। इसके बदले में एनसीपी (शरद पवार) को राज्य और केंद्र मंत्रिमंडल में मंत्री पद दिए जा सकते हैं। चर्चा है कि शरद पवार की पार्टी वही कृषि मंत्रालय चाहती है जो खुद शरद पवार संभालते थे लेकिन बीजेपी इस पर तैयार नहीं है। हालांकि, सुप्रिया सुले के अलावा कम से कम एक और मंत्री पद केंद्र में और एक या दो मंत्री पद राज्य सरकार में भी दिया जा सकता है। ये सब तभी संभव है जब शरद पवार की ओर से हरी झंडी मिल जाए।

 

वहीं, इसके बदले बीजेपी को फायदा यह होगा कि लोकसभा में 8 और राज्यसभा में एक सांसद की संख्या बढ़ जाएगी। इसका असर विपक्ष के हौसले पर भी पड़ेगा क्योंकि शरद पवार विपक्ष के सबसे बड़े नेताओं में से एक हैं और अगर बीजेपी यह मैसेज देने में कामयाबी होती है कि हर किसी को तोड़ा जा सकता है तो वह माहौल बदलने में कामयाब हो सकती है।

 

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क्या है महाराष्ट्र का नंबर गेम?

2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी, एनसीपी और शिवसेना को मिलाकर कुल 17 सांसद जीते थे। वहीं, कांग्रेस, शिवसेना (UBT) और एनसीपी (शरद पवार) के महा विकास अघाड़ी ने 30 सीटों पर जीत हासिल की थी और एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई थी। निर्दलीय सांसद भी कांग्रेस के साथ हैं। इस तरह MVA के पास 31 और NDA के पास 17 सांसद होते हैं। हाल ही में शिवसेना (UBT) के 6 लोकसभा सांसद शिवसेना में शामिल होकर एनडीए का हिस्सा हो गए। इस तरह NDA के सांसदों की संख्या 23 और MVA के सांसदों की संख्या 24 पर आ गई।

 

अब चर्चा है कि एनसीपी (शरद पवार) के 8 में से 5 या 6 सांसद पाला बदलने का मन बना चुके हैं। अगर शरद पवार एनडीए के साथ नहीं भी आते हैं तो ये सांसद एकनाथ शिंदे की शिवसेना या फिर सीधे बीजेपी में जा सकते हैं। कहा जा रहा है कि इसी टूट को रोकने के लिए सुप्रिया सुले और शरद पवार सक्रिय हो गए हैं। एक चर्चा दोनों एनसीपी के विलय की भी थी लेकिन अब इस पर विराम लगता दिख रहा है। कहा जा रहा है कि अपना वजूद बचाए रखते हुए ही शरद पवार एनडीए के साथ जाना चाहते हैं और पार्टी का विलय नहीं करना चाहते हैं।