भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब चुनाव से अपने संगठन में बड़े बदलाव किए हैं और नेताओं को नई जिम्मेदारी भी दी गई है। पार्टी ने पंजाब में सुनील जाखड़ को हटाकर जट्ट सिख चेहरे केवल सिंह ढिल्लों को पार्टी अध्यक्ष बनाया। इसके बाद अब पार्टी ने राज्यसभा के लिए तरुण चुघ को उम्मीदवार चुना है। भारतीय जनता पार्टी ने 4 जून की शाम को 11 सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की। इस लिस्ट में केंद्रीय राज्यमंत्री रवनीत बिट्टू का नाम नहीं था।
पंजाब बीजेपी के नेता और संगठन महासचिव तरुण चुघ को पार्टी ने राज्यसभा के लिए चुना है। तरुण चुघ पंजाब के अमृतसर के रहने वाले हैं और वह बीजेपी के संगठन में अहम भूमिकाएं निभा चुके हैं। इन दिनों वह पंजाब में काफी एक्टिव नजर आ रहे हैं और 2027 चुनाव के लिए पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं। अब उन्हें पार्टी ने राज्यसभा भेजने का फैसला किया है।
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रवनीत बिट्टू की छुट्टी?
रवनीत बिट्टू अभी राजस्थान से राज्यसभा सांसद हैं। 21 जून को उनका कार्यकाल खत्म होगा। 2024 में वह लुधियाना से लोकसभा चुनाव लड़े थे लेकिन कांग्रेस नेता राजा वड़िंग ने उन्हें हरा दिया था। इसके बाद बीजेपी ने उन्हें केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया और राजस्थान से राज्यसभा भेजा। अब जब उन्हें राज्यसभा में सीट नहीं मिली तो वह 6 महीने से ज्यादा मंत्री भी नहीं रह सकते हैं।
माना जा रहा है कि बीजेपी संगठन में परिवर्तन के बाद जून महीने में केंद्रीय कैबिनेट में बदलाव कर सकती है और इसमें रवनीत बिट्टू की छुट्टी हो सकती है। ऐसे में पंजाब से किसी कैबिनेट में जगह मिलेगी। इसपर भी सभी की नजरें हैं। बिट्टू शायद पहले ही बीजेपी का इशारा समझ चुके हैं। इसलिए वह कह चुके हैं कि अब वह विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं और लोकसभा विधानसभा में उन्हें 17 साल हो चुके हैं। उन्होंने तो यहां तक कह दिया है कि वह दिल्ली से अटैची पैक कर ले आए हैं।
हिंदू वोटर को साधा और तरुण चुघ को इनाम
सुनील जाखड़ को पद से हटाने के बाद से माना जा रहा था कि बीजेपी के कोर हिंदूं वोटर्स में इसका अच्छा मैसेज नहीं जाएगा। बीजेपी ने तरुण चुघ को राज्यसभा भेजकर अपने हिंदू वोट को साध लिया है। इसके साथ ही तरुण चुघ पिछले कई चुनावों से लगातार हारते आ रहे हैं। बीजेपी के टिकट पर वह 2012 और 2017 में विधानसभा चुनाव लड़ चुके हैं लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली थी। ऐसे में संगठन में किए गए उनके काम का इनाम उनको राज्यसभा भेजकर दिया गया है।
सुनील जाखड़ का क्या होगा?
पंजाब में बीजेपी इन दिनों कई बड़े बदलाव कर रही है। पार्टी ने साफ कर दिया है कि इस बार पार्टी किसी भी राजनीतिक दल के साथ गठबंधन नहीं करेगी और अकेले सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगी। इसके साथ ही पार्टी ने अब हिंदू चेहरे सुनील जाखड़ को प्रधान पद से हटा दिया है। सुनील जाखड़ को राज्यसभा भी नहीं भेजा गया है। ऐसे में उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलें लग रही हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता उन पर तंज कस रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि सुनील जाखड़ को आने वाले विधानसभा चुनाव में बीजेपी मैदान में उतार सकती है।
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बीजेपी ने बदली रणनीति
भारतीय जनता पार्टी इस बार पंजाब विधानसभा चुनाव में नई रणनीति के साथ मैदान में उतर रही है। पार्टी अब अपने शहरी हिंदू वोटर्स से निकलकर गांव के वोटों और सिख वोटों पर भी नजर रखे हुए है। पार्टी ने जट्ट सिख नेता को प्रधान बनाकर साफ कर दिया है कि इस बार वह किसी धार्मिक पार्टी (शिरोमणि अकाली दल) के साथ गठबंधन नहीं करेगी। इसके साथ ही बीजेपी इन चुनावों में नए चेहरों पर दांव लगाने वाली है। पार्टी का संकेत साफ है कि इस बार पार्टी नए सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों के साथ मैदान में उतर रही है।
