उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बहुजन समाज पार्टी में संगठन को लेकर मायावती के फैसले लगातार चर्चा में हैं। पहले छोटे भतीजे ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाकर वरिष्ठ नेताओं से संगठन सीखने की जिम्मेदारी दी गई और अब उन्हीं नेताओं में शामिल राजाराम को राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर की कमान सौंप दी गई है। मायावती के निर्देश पर पूर्व राज्यसभा सांसद राजाराम को राष्ट्रीय स्तर पर संगठन के समन्वय की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गई है।
राजाराम बसपा के पुराने संगठनात्मक चेहरों में शामिल हैं। वह उत्तर प्रदेश से दो बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उनका दूसरा राज्यसभा कार्यकाल 2014 से 2020 तक रहा। पीआरएस के संसदीय रिकॉर्ड के मुताबिक इस कार्यकाल में राज्यसभा में उनकी उपस्थिति 89 प्रतिशत रही। राजाराम की पहचान सिर्फ संसदीय राजनीति तक सीमित नहीं रही है। वह लंबे समय से बसपा के संगठनात्मक कामकाज से जुड़े रहे हैं और पार्टी के राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में जिम्मेदारी संभालते रहे हैं।
पहले ईशान को सिखाने की जिम्मेदारी मिली
राजाराम की नई भूमिका का एक अहम पहलू ईशान आनंद से भी जुड़ा है। 23 सितंबर को लखनऊ में हुई बसपा की राष्ट्रीय बैठक में मायावती ने ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाने का ऐलान किया था। उस समय पार्टी ने साफ किया था कि ईशान को संगठन की कार्यप्रणाली समझाने के लिए वरिष्ठ नेता राजाराम और रामजी गौतम की मदद ली जाएगी। एक तरफ ईशान आनंद को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी दी गई तो दूसरी तरफ उनके राजनीतिक-संगठनात्मक प्रशिक्षण के लिए राजाराम जैसे अनुभवी नेता को जोड़ा गया। अब राजाराम को खुद राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर की जिम्मेदारी मिलने से पार्टी के संगठन में उनकी भूमिका और महत्वपूर्ण हो गई है।
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अगस्त में चार राज्यों का भी मिला था प्रभार
राजाराम को अगस्त 2026 में मध्य प्रदेश के साथ केरल, गुजरात और कर्नाटक का अतिरिक्त प्रभार भी सौंपा गया था। अब राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाए जाने के बाद उनके पास संगठनात्मक स्तर पर व्यापक जिम्मेदारी आ गई है। बसपा में पिछले कुछ महीनों से लगातार संगठनात्मक फेरबदल चल रहा है। जून और अगस्त में भी कई पदाधिकारियों की जिम्मेदारियों में बदलाव किए गए थे। ऐसे में राजाराम को राष्ट्रीय स्तर पर नई जिम्मेदारी दिया जाना पार्टी के संगठनात्मक पुनर्गठन की कड़ी के रूप में सामने आया है।
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ईशान को आगे बढ़ाने के साथ अनुभवी चेहरों पर भी भरोसा
23 सितंबर को ईशान आनंद को राष्ट्रीय संयोजक बनाए जाने के फैसले के साथ बसपा में नई पीढ़ी को आगे लाने का एक और कदम सामने आया था। ईशान को अभी राज्यों के संगठनात्मक कामकाज की जिम्मेदारी नहीं दी गई थी और उन्हें राजाराम, रामजी गौतम से पार्टी की कार्यप्रणाली समझने के लिए कहा गया था। इसके कुछ ही दिन बाद राजाराम को राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर बनाया गया है। ऐसे में बसपा के संगठन में एक तरफ ईशान आनंद को राष्ट्रीय भूमिका दी गई है, वहीं दूसरी तरफ राजाराम जैसे अनुभवी नेता को संगठन के अहम काम की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
2027 से पहले बसपा में लगातार हो रहे बदलाव
यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले बसपा का संगठन लगातार बदलाव के दौर से गुजर रहा है। मायावती ने हाल के महीनों में कई नेताओं के प्रभार बदले हैं और अलग-अलग राज्यों की जिम्मेदारियों का पुनर्विन्यास किया है। इससे पहले भी राजाराम को कई राज्यों की जिम्मेदारी दी जा चुकी है। अब राष्ट्रीय कोऑर्डिनेटर के तौर पर राजाराम की भूमिका राज्यों में संगठन के बीच तालमेल बनाने, पार्टी की गतिविधियों को समन्वित करने और संगठनात्मक कामकाज को आगे बढ़ाने से जुड़ी होगी। 2027 के चुनाव से पहले बसपा के भीतर चल रहे संगठनात्मक बदलावों में राजाराम की नई जिम्मेदारी एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
