इस साल अक्टूबर महीने में दशहरा का खास त्योहार मनाया जाएगा। लोगों के लिए दशहरा केवल एक त्योहार नहीं है, बल्कि यह बुराई पर अच्छाई की विजय का प्रतीक है। इस दिन सभी लोग सुबह-सुबह भगवान राम और माता सीता की पूजा करते हैं। उसके बाद शाम के समय रावण दहन की परंपरा निभाते हैं। धार्मिक जानकारों के अनुसार, लोगों को दशहरा त्योहार मनाने से पहले इसका महत्व समझना चाहिए। वरना त्योहार मनाने का कोई अर्थ नहीं है।

 

हिंदू पंचांग के अनुसार, 19 अक्टूबर को नवरात्रि पर्व का आखिरी दिन होगा। इसके बाद 20 अक्टूबर को दशहरा त्योहार मनाया जाएगा। हालांकि, तिथि के हिसाब से कई लोगों का मानना है कि दशहरा पर्व 21 अक्टूबर को मनाना चाहिए। आइए जानते हैं दशहरा की सही तारीख क्या है?

 

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दशहरा की तारीख

पंचांग के मुताबिक, 20 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 50 मिनट से दशमी तिथि शुरू होगी। इसके बाद 21 अक्टूबर को दोपहर 2 बजकर 11 मिनट पर दशमी तिथि समाप्त होगी। धार्मिक विधान के अनुसार, शाम के समय ही रावण दहन करना चाहिए। इस हिसाब से भक्तों को 20 अक्टूबर को दशहरा पर्व मनाना चाहिए।

रावण दहन का शुभ मुहूर्त

20 अक्टूबर को तीन शुभ मुहूर्त हैं। इस दिन विजय मुहूर्त दोपहर 1:59 बजे से लेकर 2:45 बजे तक रहेगा। इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा करने के लिए दोपहर का समय शुभ है। दोपहर 1:14 बजे से 3:30 बजे तक पूजा करना शुभ होगा। इसके बाद रावण दहन के लिए शाम 5 बजकर 47 मिनट का समय शुभ बताया गया है।धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दशहरा के दिन अबूझ मुहूर्त होता है, जो नया घर, गाड़ी और गहने खरीदने के लिए बेहद शुभ माना जाता है।

 

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क्या है विजयदशमी का महत्व?

धार्मिक जानकारों का मानना है कि नवरात्रि के नौवें दिन भगवान राम ने मां दुर्गा की आराधना की थी, ताकि उन्हें रावण का वध करने की शक्ति मिले। मां दुर्गा के आशीर्वाद से विजयदशमी के दिन भगवान राम ने रावण का वध किया। इस वजह से विजयदशमी के दिन रावण दहन की परंपरा निभाई जाती है, जिससे लोगों को बुराई पर अच्छाई की जीत की सीख मिलती है।

 

नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।