दुनिया भर में बुद्ध की प्रतिमा मशहूर है। अलग-अलग धर्म के लोग भी अपने घर में गौतम बुद्ध जी की प्रतिमा रखते हैं। बुद्ध के अलावा कई लोग लाफिंग बुद्धा की प्रतिमा भी अपने घर में रखते हैं। दोनों की प्रतिमाओं में कई अंतर हैं। जहां एक तरफ भारत के गौतम बुद्ध की प्रतिमा शांत मुद्रा में होती है, दूसरी तरफ लाफिंग बुद्धा की प्रतिमा में हंसते हुए बुद्ध नजर आते हैं। शांत प्रतिमा वाले बुद्ध भारत के राजकुमार सिद्धार्थ गौतम थे, जिन्हें दुनिया भर में गौतम बुद्ध के नाम से जाना और पूजा जाता है।
लाफिंग बुद्धा चीन के थे, जिनका असली नाम बुदाई था। वह चीन में एक भिक्षु थे। माना जाता है कि बुदाई हर कठिन परिस्थिति को हंसकर काट लेते थे, इस वजह से उन्हें लाफिंग बुद्धा कहा जाता है। बुद्ध और लाफिंग बुद्धा की शिक्षाओं को समझकर किसी भी व्यक्ति का मन शांत और तनाव मुक्त हो सकता है।
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आज के दौर में कई लोगों को हर समय तनाव महसूस होता है। परिवार की टेंशन और ऑफिस में काम के प्रेशर की वजह से कई लोग डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करते हैं। ऐसे में लोगों को बुद्ध और लाफिंग बुद्धा के विचारों को अपने जीवन में अपनाना चाहिए, ताकि डिप्रेशन से बच सकें।
गोतम बुद्ध और लाफिंग बुद्धा में अंतर
गौतम बुद्ध का जन्म 5वीं सदी में नेपाल के लुंबिनी में हुआ था। वह राजकुमार सिद्धार्थ थे। उन्होंने सांसारिक मोह-माया का त्याग कर ज्ञान की प्राप्ति की थी।
लाफिंग बुद्धा का जन्म 10वीं शताब्दी में हुआ था। वह एक भिक्षु थे। वह हमेशा अपने साथ एक झोला लेकर चलते थे, जिसके जरिए वह बच्चों और गरीब लोगों में खुशियां बांटते थे। चीन के धार्मिक जानकारों के मुताबिक, लाफिंग बुद्धा को गौतम बुद्ध का भविष्य का अवतार माना जाता है।
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गौतम बुद्ध की शिक्षाएं
दुख की वजह तलाशना - बुद्ध ने कहा था कि अगर व्यक्ति के जीवन में दुख है, तो उस दुख का कारण भी होता है। लोगों के दुख की वजह इच्छा और लगाव है। जब व्यक्ति किसी चीज को पाने की इच्छा रखता है और वह चीज उसे नहीं मिलती, तो उसे दुख होता है। साथ ही जिस चीज से हमें लगाव होता है, उसके दूर चले जाने पर भी व्यक्ति दुखी हो जाता है। इसी वजह से व्यक्ति को अपनी इच्छा और लगाव पर नियंत्रण रखना चाहिए।
वर्तमान में जीना - धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गौतम बुद्ध का मानना था कि अक्सर लोग अपने अतीत या भविष्य की चिंता करते हैं। इस स्थिति में व्यक्ति का मन अतीत के पछतावे या भविष्य की चिंता में उलझा रहता है। इसलिए व्यक्ति को वर्तमान में जीना चाहिए।
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लाफिंग बुद्धा की शिक्षाएं क्या हैं?
हंसते रहना - लाफिंग बुद्धा के विचारों के मुताबिक, व्यक्ति को हर परिस्थिति में खुश और सकारात्मक रहना चाहिए। चाहे परिस्थिति कितनी भी कठिन हो, व्यक्ति को धैर्य और मुस्कान के साथ जीवन जीना चाहिए।
देना सीखो - लाफिंग बुद्धा के हाथ में हमेशा एक झोला होता था, जिसमें हर किसी को कुछ न कुछ देने के लिए रहता था। लाफिंग बुद्धा का मानना था कि लोगों में बांटने और मदद करने की भावना से मन का खालीपन दूर होता है। साथ ही लोगों के बीच रहने और खुशियां बांटने से मन का दुख भी कम होता है।
नोट - यह लेख धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी की हम पुष्टि नहीं करते है।
