हिंदू धर्म में सदियों से व्रत और भगवान की पूजा-पाठ करने की परंपरा चली आ रही है। अक्सर लोग पूजा-पाठ और व्रत इसलिए रखते हैं ताकि भगवान उनकी मनोकामना पूरी कर दें। इसी तरह लाखों भक्त धार्मिक कार्य इसलिए करते हैं, ताकि उन्हें जीवन-मृत्यु के चक्र से यानी मोक्ष मिले। इसके अलावा कई लोग व्रत और पूर्ण भाव से पूजा-पाठ करते हैं, जिनके मन में इच्छा रहती है कि उन्हें भगवान के दर्शन मिलें। ऐसे में भक्तों को जानना चाहिए कि पूजा-पाठ और व्रत करने से व्यक्ति को मोक्ष मिलता है या नहीं।
व्रत रखना केवल एक धार्मिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि इससे व्यक्ति की शारीरिक शुद्धि भी होती है। हिंदू धर्म में लोग तभी व्रत रखते हैं, जब कोई खास पर्व-त्योहार हो। हिंदू धर्म के बेहद खास धर्म ग्रंथ में पूजा-पाठ और मोक्ष को लेकर कई खास बातें बताई गई हैं। तो इसी ग्रंथ के आधार पर आइए जानते हैं कि व्रत और पूजा करने से व्यक्ति को मोक्ष मिलता है या नहीं।
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व्रत रखने से नहीं मिलता मोक्ष
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण ने साफ तौर पर बताया है कि लोग यज्ञ, दान और व्रत करते हैं। इन कर्मों से भले ही पुण्य प्राप्त हो जाए, लेकिन इससे व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति नहीं होती है। इसी सिलसिले में भगवद्गीता के अध्याय 2 में बताया गया है कि जो लोग वेदों में बताए गए पूजा और यज्ञ में उलझे रहते हैं, वे कई बार स्वर्ग की कामना करते हैं। जिस वजह से वह व्यक्ति संसार के बंधनों में बंध जाता है। मोह-माया के कारण व्यक्ति कभी मोक्ष हासिल नहीं कर पाता है। गीता के अनुसार व्यक्ति को सच्चा मोक्ष तभी मिलता है, जब कर्म बिना किसी फल की इच्छा के किए जाएं।
भगवद्गीता के अनुसार पूजा और व्रत रखना गलत नहीं है। व्रत और पूजा-पाठ करने से व्यक्ति का मन शुद्ध होता है। वहीं व्यक्ति को तीन योग करने चाहिए, जो कि कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग हैं। इन्हें अपनाकर व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति हो सकती है।
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मोक्ष का मार्ग
भगवद्गीता में श्रीकृष्ण भगवान ने अर्जुन को मोक्ष के तीन रास्ते यानी तीन योग बताए हैं, जिसके जरिए व्यक्ति को मोक्ष मिल सकता है। इन्हें कर्म योग, भक्ति योग और ज्ञान योग कहा जाता है।
कर्म योग- व्यक्ति को फल की चिंता किए बगैर कर्म करते रहना चाहिए। अगर व्यक्ति कर्म करते वक्त फल की चिंता करता है, तो वह सांसारिक बंधनों से बंधा हुआ माना जाता है। ऐसे में व्यक्ति को मोक्ष नहीं मिल पाता।
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भक्ति योग- भक्तों को इस प्रकार भगवान की पूजा-पाठ और आराधना करनी चाहिए, जो अनन्य हो। इस दौरान व्यक्ति को सांसारिक मनोकामनाओं से दूर रहना चाहिए।
ज्ञान योग- इसका मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति की सिर्फ बुद्धि तेज हो, बल्कि वह अपने मन की बातें भी समझ सके। इन तीन योगों को अपनाकर व्यक्ति को मोक्ष मिल सकता है।
नोट- यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।
