इंसान अक्सर अपनी आंखें बंद करके मृत्यु के बारे में सोचता है, जहां वह नरक और स्वर्ग की कल्पना करता है। ऐसी कल्पना इटली के कवि दांते की थी, जिन्होंने नरक की कल्पना कर 'द डिवाइन कॉमेडी' नाम की कविता लिखी थी। सनातन धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण में नरक के बारे में बताया गया है, जिसमें साफ तौर पर बताया गया है कि व्यक्ति को उसके कर्मों के आधार पर नरक में सजा मिलती है। इसी तरह दांते ने डिवाइन कॉमेडी कविता के जरिए नरक यात्रा बताई है।

 

दांते ने 'द डिवाइन कॉमेडी' 13वीं शताब्दी में लिखी थी। यह इटली में दुकानों पर बेची जाती थी। इसमें लिखी गई नरक की यात्रा को पढ़कर लोग प्रभावित होते थे। हिन्दू धर्मग्रंथ गरुड़ पुराण में व्यक्ति की मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा बताई गई है, जिसमें नरक और नरक में मिलने वाली यातनाओं के बारे में बताया गया है। इसी तरह डिवाइन कॉमेडी कविता में नरक और नरक में लोगों को मिलने वाली सजा के बारे में रोचक तरीके से लिखा गया है।

 

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डिवाइन कॉमेडी में नरक चक्र

 

डिवाइन कॉमेडी में 9 प्रकार के नरक बताए गए हैं। इन 9 प्रकार के नरकों में अलग-अलग कर्मों की सजा दी जाती है। जहां व्यक्ति की आत्मा को झूठ बोलने से लेकर लालच जैसे पाप करने की सजा दी जाती है। अब सवाल उठता है कि नौवें नरक में किस प्रकार की सजा दी जाती है।

 

1. लीम्बो - दांते ने पहले नरक का नाम लीम्बो रखा है, जो उन गैर-ईसाई लोगों के लिए है जो ईसा मसीह से पहले जन्मे थे। इस नरक में रहने वाली आत्माओं को सजा नहीं दी जाती है, सिर्फ यहां रहने वाले लोगों को स्वर्ग से दूर रखा जाता है।

 

2. वासना-इस नरक में उन लोगों को सजा दी जाती है, जो अपनी पूरी जिंदगी वासना और शारीरिक सुखों के लालच में रहते हैं। इस नरक में लगातार तेज हवा बहती है। तेज हवा लोगों को थप्पड़ के समान लगती है। दांते के मुताबिक यह सजा इसलिए दी जाती है क्योंकि वासना में लिप्त व्यक्ति का मन एक जगह नहीं ठहरता है।

 

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3. पेटूपन - इस चक्र में उन लोगों की आत्मा रहती है, जिन्होंने अपने जीवन में खाने को लेकर लालच किया था। यहां एक राक्षस लोगों को बर्फीली जमीन पर लिटाता है, साथ ही बर्फीली बारिश कराकर तड़पाता है। ज्यादा खाने वाले लोगों की आत्मा को इसलिए सजा दी जाती है क्योंकि वे हमेशा दूसरों की परवाह किए बिना खाना खाते थे।

 

4. लालच - नरक के इस चक्र में लोगों की आत्माओं को दो अलग-अलग हिस्सों में सजा दी जाती है। पहले हिस्से में उन लोगों को सजा दी जाती है जो अपने जीवन में नशे की लत में डूबे थे। वहीं दूसरे हिस्से में उन लोगों को रखा जाता है जो धन-संपत्ति के लालच में रहते थे।

 

5. अहंकार - इस नरक में वे लोग रहते हैं, जिन्होंने अपने जीवन में दूसरों पर गुस्सा किया था।

 

6. अधर्मी - डिवाइन कॉमेडी कविता में नरक के छठे चक्र को लेकर बताया गया है कि इस चक्र में उन लोगों की आत्माएं सजा काटती हैं, जिन्होंने अपने पूरे जीवन ईश्वर पर भरोसा नहीं किया।

7. हिंसा - नरक के सातवें हिस्से को तीन भागों में बांटा गया है। जहां एक तरफ हत्यारे लोगों की आत्माएं रखी गई हैं, वहीं दूसरी तरफ हिंसा करने वाले लोगों की आत्माओं को सजा दी जाती है, जबकि तीसरी तरफ आत्महत्या करने वाले लोगों को सजा दी जाती है।

 

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8. धोखा - नरक के आठवें चक्र में उन लोगों की आत्माओं को रखा गया है, जिन्होंने अपने जीवन में दूसरों को धोखा दिया।

 

9. विश्वासघात - इस नरक में लूसिफर नाम का शैतान उन लोगों की आत्माओं को सजा देता है, जिन्होंने अपने परिवार, लव पार्टनर और दोस्तों को धोखा दिया।

 

गरुड़ पुराण से समानता

दांते की नरक की परिकल्पना में 9 चक्र हैं, जहां हर चक्र एक पाप के लिए है। व्यक्ति की आत्मा को सजा मिलती है। उसी प्रकार गरुड़ पुराण में भी अलग-अलग नरकों जैसे रौरव, महारौरव और कुम्भीपाक नरक का जिक्र किया गया है, जहां हर नरक में अलग-अलग पापों की अलग-अलग सजा दी जाती है।

 

कर्म के आधार पर दंड मिलता है। जैसा दांते में वासना के लिए सजा का जिक्र किया गया है, वैसा ही गरुड़ पुराण में दंड के बारे में बताया गया है। जहां चोरी करने वाले को कांटों पर घसीटा जाना जैसा दंड बताए गए हैं। डिवाइन कॉमेडी में लोगों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले एक व्यक्ति का जिक्र किया गया है। वैसा ही गरुड़ पुराण में यमराज न्यायाधीश हैं और चित्रगुप्त कर्मों का लेखा-जोखा रखते हैं।

 

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डिवाइन कॉमेडी और गरुड़ पुराण दोनों में मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा, पाप-पुण्य और कर्मों के अनुसार मिलने वाले दंड का उल्लेख मिलता है। इसी वजह से दोनों की अक्सर तुलना की जाती है। हालांकि, दोनों ग्रंथ अलग-अलग मान्यताओं पर आधारित हैं। गरुड़ पुराण में नरक का दंड अस्थायी माना गया है, जबकि डिवाइन कॉमेडी में नरक को शाश्वत दंड के रूप में दिखाया गया है।