भारत और इंग्लैंड के बीच 3 मैचों की वनडे सीरीज चल रही है। यह सीरीज 1-1 की बराबरी पर खड़ी है। सीरीज का तीसरा और निर्णायक मुकाबला रविवार (19 जुलाई) को लॉर्ड्स में खेला जाना है। इस सीरीज के पहले दोनों मुकाबले लो-स्कोरिंग रहे हैं। भारत ने बर्मिंघम में खेले गए पहले मुकाबले में इंग्लैंड को 258 रन पर ढेर कर 6 विकेट से जीत हासिल की तो मेजबान टीम ने कार्डिफ में टीम इंडिया को 233 रन पर समेट सीरीज में बराबरी हासिल कर ली।

 

इन दोनों ही मैचों में गेंदबाजों का दबदबा रहा है। बर्मिंघम में इंग्लैंड को सस्ते में निपटाने के बावजूद भारतीय टीम रन चेज में फंस गई थी। उसने 160 रन पर 4 विकेट गंवा दिए थे। कप्तान शुभमन गिल रिटायर हर्ट होकर बाहर गए थे। ऐसे में भारत का स्कोर एक तरह से 160/5 था। अक्षर पटेल और वॉशिंगटन सुंदर ने छठे विकेट के लिए शतकीय साझेदारी कर टीम इंडिया को जीत की दहलीज तक पहुंचाया।

 

कार्डिफ में खेले गे दूसरे वनडे में भी रन चेज करने वाली टीम को मुश्किलें आईं। इंग्लैंड ने भारत के 234 रन के जवाब में 125 रन पर 6 विकेट खो दिए थे। जीत उससे दूर नजर आ रही थी लेकिन जो रूट ने एक छोर से मोर्चा संभाला और अपनी टीम को सीरीज में बराबरी दिला दी। जो रूट 99 रन बनाकर नाबाद रहे। उन्होंने अपनी पारी के दौरान बताया कि अब वनडे क्रिकेट में सिर्फ लप्पेबाजी से ही काम नहीं बन सकता है।

 

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बदल गया है वनडे क्रिकेट

पिछले कुछ सालों में टी20 की तरह वनडे में भी गेंदबाज बुरी तरह से पिटते रहे हैं। मगर अब नए नियम के चलते बल्लेबाजों पर अंकुश लगा है। खासकर वनडे मैचों में ओवरों में वैसी बल्लेबाजी देखने को नहीं मिलेगी, जैसा हम सालों से देखते आए हैं। दरअसल, ICC ने दो नई गेंदों का नियम बदल दिया है। पहले हर पारी में दोनों छोर से एक-एक नई गेंद का इस्तेमाल किया जाता था। 

 

नए नियम के अनुसार, पारी की शुरुआत से लेकर 34वें ओवर तक दो नई गेंदों का इस्तेमाल किया जा रहा है लेकिन इसके बाद एक ही गेंद से 50वें ओवर तक खेल हो रहा है। बॉलिंग करने वाली टीम 34वें ओवर के बाद दो में से किसी एक गेंद को चुन रही है, जिसका इस्तेमाल 35वें ओवर से 50वें ओवर तक दोनों छोर से हो रहा है। यह नियम पिछले साल जुलाई से लागू है। आखिरी 15 ओवर का खेल एक ही गेंद से होने से बल्लेबाजी मुश्किल हो गई है।

 

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रूट और राहुल जैसे बल्लेबाजों की अहमियत बढ़ी

दो नई गेंदों वाला नियम खत्म होने से जो रूट और केएल राहुल जैसे कम्पलीट तकनीक वाले बल्लेबाजों की अहमियत बढ़ी है। अब वनडे में आखिरी ओवरों में आंख मूंदकर बल्ला भांजने से काम नहीं बनने वाला। डेथ ओवरों में तेज गेंदबाजों को रिवर्स स्विंग भी मिलने लगा है, जिससे रूट और राहुल जैसे बल्लेबाज ही निपट सकते हैं। यही कारण है भारतीय टीम राहुल को डेथ ओवरों में ही ज्यादा इस्तेमाल करना चाह रही है।