उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ की सड़कों पर तेजी से बढ़ रहे ई-रिक्शों के बीच इनके रजिस्ट्रेशन को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। परिवहन विभाग की जांच में पता चला है कि एक ही व्यक्ति और फर्म के नाम पर बड़ी संख्या में ई-रिक्शा रजिस्टर्ड हैं। छत्तीसगढ़ के एक व्यक्ति की फर्म गोदावरी ई-मोबिलिटी लिमिटेड के नाम पर अकेले लखनऊ में 114 ई-रिक्शा संचालित किए जा रहे हैं। इससे हर दिन एक लाख रुपये से अधिक की कमाई होने की बात सामने आई है।
विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि 493 लोगों के नाम पर 2690 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं, जबकि 4506 लोगों के पास दो-दो वाहन सड़कों पर दौड़ रहे हैं। सैकड़ों लोगों के नाम पर कई-कई ई-रिक्शा पंजीकृत हैं। मनमाने तरीके से हो रहे पंजीकरण से सड़क पर अतिक्रमण और जाम की समस्या बढ़ने के साथ यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। परिवहन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक विष्णु प्रसाद तिवारी के नाम 28, गोदावरी ई-मोबिलिटी लिमिटेड के नाम 27, बिमलेश कुमार सिंह के नाम 16, चंद्र प्रकाश निगम के नाम 15, काइनेटिक ग्रीन एनर्जी एंड पावर सॉल्यूशंस लिमिटेड के नाम 14 और सोनू राजपूत के नाम 13 ई-रिक्शा दर्ज हैं।
इसी तरह साहिल अहमद के नाम 11, राशिद अली के नाम 11, हसमत बेग के नाम 11, रविकिरण सिंह के नाम 10, पंकज कुमार सिंह के नाम 10, मोहम्मद फहद के नाम 10 और अब्दुल सलाम सिद्दीकी के नाम भी 10 ई-रिक्शा पंजीकृत हैं।
हाई कोर्ट भी जता चुका है चिंता
कुछ दिन पहले ही हाई कोर्ट ने टिप्पणी की थी कि सड़कों पर ई-रिक्शों की भीड़ बढ़ती जा रही है और इनकी संख्या 80 हजार के पार हो गई है। इसके पीछे ऐसे लोग बताए जा रहे हैं, जो अलग-अलग फर्मों और दूसरे नामों से ई-रिक्शा पंजीकृत कराकर उनका संचालन कर रहे हैं। राजधानी में बड़ी संख्या में ई-रिक्शों के संचालन से कई इलाकों में सड़क पर अतिक्रमण और जाम की स्थिति बन रही है। परिवहन विभाग की जांच में सामने आए आंकड़ों ने इस समस्या की गंभीरता को और स्पष्ट कर दिया है।
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केंद्रीय मोटर वाहन अधिनियम, 1989 की धारा 2-ए में ई-रिक्शा और ई-कार्ट की व्यवस्था की गई है। इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहित करने के लिए इनके पंजीकरण में कई तरह की सहूलियत दी गई हैं। उत्तर प्रदेश में इन वाहनों से रोड टैक्स नहीं लिया जाता, पंजीकरण भी मुफ्त है और किसी भी मार्ग पर चलने के लिए परमिट लेने की जरूरत नहीं होती।यही वजह है कि दूसरे वाहनों की तरह इनकी संख्या सीमित नहीं की गई है और लोग बड़ी संख्या में ई-रिक्शा खरीदकर उनका पंजीकरण करा सकते हैं।
एक से ज्यादा ई-रिक्शा खरीदने पर रोक नहीं
परिवहन आयुक्त आशुतोष निरंजन का कहना है कि एक व्यक्ति के एक से अधिक ई-रिक्शा खरीदने पर फिलहाल कोई रोक नहीं है। हालांकि, हाई कोर्ट ने इन वाहनों को नियंत्रित करने का आदेश दिया है। इसके बाद शासन स्तर पर व्यवस्था तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है।इस संबंध में अपर परिवहन आयुक्त राजस्व आरके विश्वकर्मा की अध्यक्षता में समिति गठित की गई है। समिति ई-रिक्शों के संचालन और निगरानी को लेकर नियमावली तैयार कर रही है। इसके साथ ही इनकी संख्या को लेकर भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
समिति अपने निर्णय और सुझावों के आधार पर प्रस्ताव शासन को भेजेगी। इसके बाद हाई कोर्ट के आदेश को लागू कराया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक ई-रिक्शा संचालन और निगरानी के लिए नियमावली बनाने के साथ ही इनकी संख्या को लेकर भी प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद ई-रिक्शों के मनमाने तरीके से संचालन पर रोक लगने और इनकी संख्या को नियंत्रित करने की उम्मीद है।
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ई-रिक्शों की बढ़ती संख्या का असर बिजली की खपत पर भी पड़ रहा है। खबर के मुताबिक एक ई-रिक्शा चार्ज करने में करीब आठ यूनिट बिजली खर्च होती है। राजधानी में ई-रिक्शा और ई-आटो की संख्या करीब 80 हजार बताई गई है और ये घरेलू बिजली का उपयोग कर रहे हैं।इनसे रोजाना करीब छह लाख 40 हजार यूनिट बिजली की खपत हो रही है। आठ रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से महीने में करीब 15 करोड़ 36 लाख रुपये की बिजली की खपत हो रही है
