मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार पर उज्जैन में 168 एकड़ जमीन खरीदने के आरोपों को लेकर सियासत गरमा गई है। विपक्ष इस मुद्दे पर लगातार मुख्यमंत्री को घेर रहा है। इसी बीच समाजवादी पार्टी प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का एक बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। अखिलेश ने इन आरोपों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) की राजनीतिक साजिश बताया है। 

 

उनका कहना है कि इसके पीछे बीजेपी का बड़ा गेम प्लान है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी की तीन बड़ी रणनीतियां हैं और इसी के तहत तीन राज्यों के मुख्यमंत्रियों को हटाने की तैयारी की जा रही है।

मोहन यादव को बदनाम किया जा रहा

अखिलेश यादव ने कहा कि मोहन यादव को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री पहले रियल एस्टेट कारोबार से जुड़े रहे हैं और BJP भी इस बात को अच्छी तरह जानती है। ऐसे में जमीन खरीद के मामले को राजनीतिक रंग देकर उन्हें घेरने की कोशिश की जा रही है।

 

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अखिलेश यादव का बयान

मोहन यादव को लेकर अपने बयान में अखिलेश यादव ने कहा, 'मोहन यादव को बदनाम करने के लिए BJP ने साजिश की है। अगर मोहन यादव पर यह आरोप है तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने तो 300-600 एकड़ जमीन ली है। यह कोई नई बात नहीं है। वह पहले रियल स्टेट का काम करते थे। क्या BJP नहीं जानती?'

 

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उन्होंने आगे कहा, 'यह आरोप इसलिए लग रहा है कि BJP रास्ता ढूंढ रही है कि 3 मुख्यमंत्री कैसे बदलें। BJP मुख्यमंत्री बदलना चाहते हैं इसलिए आरोप लगवा रहे हैं। इन्हें मध्य-प्रदेश, राजस्थान के मुख्यमंत्री को हटाना है। इन दो को इसलिए हटा रहे हैं कि उन्हें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को हटाना है। यह हटाने की साजिश चल रही है। उत्तर प्रदेश की जनता जानती है कि इस बार साइकिल इतनी तेज चलेगी कि अपने आप मुख्यमंत्री हट जाएंगे।'

मोहन यादव पर क्या हैं आरोप?

मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन और आसपास के इलाकों में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी। एक अंग्रेजी अखबार की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, 13 दिसंबर 2023 के बाद इन लोगों ने कम से कम 137 प्लॉट खरीदे, जिनका कुल रकबा करीब 168 एकड़ है।

 

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रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन जमीनों को शहर में चल रहे विकास कार्यों का सबसे ज्यादा फायदा मिला। इनमें से कुछ जमीनों को बाद में बेच भी दिया गया। हालांकि, रिपोर्ट में साल 2026 के दौरान हुई जमीन की खरीद-बिक्री को शामिल नहीं किया गया है।