उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही से दरोगा बनने का सपना पूरा करने वाले 500 से अधिक जवान अब नियमों के पेंच में फंस गए हैं। दरोगा भर्ती-2025 का अंतिम चयन परिणाम जुलाई 2026 में जारी हो चुका है। चयनित अभ्यर्थियों में बड़ी संख्या ऐसे सिपाहियों की है, जो वर्ष 2025 में ही पुलिस विभाग में भर्ती हुए थे। अभी उनकी दो साल की परिवीक्षा अवधि पूरी नहीं हुई है। दरोगा पद पर चयन के बाद सिपाही पद से त्यागपत्र देकर नई जिम्मेदारी संभालने की प्रक्रिया में अब आर्थिक देनदारी सबसे बड़ी बाधा बन गई है।
विभागीय नियमों के अनुसार परिवीक्षा अवधि पूरी होने से पहले सेवा छोड़ने की स्थिति में प्रशिक्षण पर खर्च हुई रकम और निर्धारित अवधि के वेतन की वसूली का मामला सामने आ रहा है। इससे कई चयनित सिपाहियों पर करीब आठ लाख रुपये तक की रकम जमा करने का दबाव बन सकता है। जवानों के मुताबिक, पुलिस प्रशिक्षण के दौरान विभाग की ओर से करीब 2 लाख 58 हजार रुपये खर्च किए जाते हैं। इसके अलावा दो साल की अवधि के वेतन को जोड़ने पर देनदारी की रकम करीब आठ लाख रुपये तक पहुंच सकती है। 2025 में भर्ती हुए सिपाहियों ने अभी बहुत कम समय सेवा की है, ऐसे में इतनी बड़ी रकम एकमुश्त जमा करना उनके लिए मुश्किल है।
विभाग में ऊंचे पद पर जा रहे, फिर भी नियम का पेच
चयनित सिपाहियों का कहना है कि वे पुलिस विभाग छोड़कर किसी दूसरी नौकरी में नहीं जा रहे हैं। उन्होंने विभागीय व्यवस्था के तहत प्रतियोगी परीक्षा पास कर उसी पुलिस विभाग में सिपाही से उपनिरीक्षक का पद हासिल किया है। इसके बावजूद पुरानी सेवा से संबंधित आर्थिक शर्त उनके सामने बड़ी चुनौती बन गई है। जवानों का तर्क है कि उन्होंने मेहनत और परीक्षा के जरिए उच्च पद हासिल किया है। ऐसे में उन्हें सिपाही पद से दरोगा पद पर जाने के लिए लाखों रुपये एकमुश्त जमा करने की बाध्यता से राहत मिलनी चाहिए।
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चयनित सिपाहियों की मांग है कि विभाग उनसे प्रशिक्षण पर खर्च हुई 2.58 लाख रुपये की रकम जमा करा ले लेकिन वेतन से जुड़ी शेष देनदारी को एक साथ जमा कराने की बाध्यता खत्म की जाए। उनका प्रस्ताव है कि बाकी रकम की वसूली दरोगा बनने के बाद उनके वेतन से मासिक किस्तों में कर ली जाए। इससे विभाग का पैसा भी सुरक्षित रहेगा और चयनित जवानों पर अचानक लाखों रुपये जुटाने का बोझ भी नहीं पड़ेगा।
नियम में बदलाव की मांग
बाहर जाने और उसी विभाग में उच्च पद पर चयन होने की स्थिति को एक नजर से नहीं देखा जाना चाहिए।उनका कहना है कि प्रशिक्षण खर्च की वसूली सुनिश्चित रखते हुए वेतन कीजवानों की मांग है कि सिपाही से उपनिरीक्षक पद पर चयनित होने वाले कर्मचारियों के लिए अलग व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि किसी कर्मचारी के विभाग से पूरी तरह रकम किस्तों में काटने की अनुमति दी जाए, ताकि योग्य अभ्यर्थी केवल आर्थिक वजह से दरोगा पद पर जाने से न रुकें।
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दरोगा भर्ती-2025 के परिणाम के बाद सामने आया यह मामला भविष्य में सिपाही पद पर रहते हुए उच्च पदों की परीक्षा देने वाले पुलिसकर्मियों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। चयनित जवान चाहते हैं कि शासन और पुलिस मुख्यालय उनकी स्थिति को देखते हुए व्यावहारिक समाधान निकालें। अब इन सिपाहियों की नजर विभाग के फैसले पर है। यदि प्रशिक्षण खर्च जमा कराने के बाद बाकी रकम की वसूली दरोगा के वेतन से किस्तों में करने की व्यवस्था बनती है, तो 500 से अधिक चयनित जवानों को बड़ी राहत मिल सकती है।
