पश्चिम बंगाल की शुभेंदु अधिकारी सरकार ने मंगलवार को एक बड़े फैसले में राज्य की 66 जातियों को नियमित कर दिया है जो 2010 से पहले राज्य की ओबीसी आरक्षण लिस्ट में शामिल थीं। इस तरह से बंगाल में अब ओबीसी आरक्षण सरकारी नौकरियों में 7 प्रतिशत तक सिमट गया है।

 

अपने नए फैसले में शुभेंदु अधिकारी सरकार ने ओबीसी आरक्षण का 2010 वाला फार्मूला लागू किया है। बंगाल में ओबीसी आरक्षण 7 प्रतिशत पर सिमटने के बाद अब सिर्फ 66 जातियों को ही ओबीसी आरक्षण का लाभ मिल सकेगा। बीजेपी ने ममता बनर्जी का एक और बड़ा फैसला पलट द‍िया है। 

 

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ओबीसी आरक्षण का 2010 वाला फार्मूला लागू

बीजेपी सरकार ने ओबीसी आरक्षण का 2010 वाला फार्मूला लागू किया है। पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने ज‍िन जात‍ियों को ओबीसी यानी अन्य पिछड़ा वर्ग की ल‍िस्‍ट में डाला था, बीजेपी ने उन सभी जातियों को आरक्षण की ल‍िस्‍ट से बाहर कर द‍िया है। इनमें कई मुस्‍लि‍म जात‍ियां भी शामिल थीं। 

 

शुभेंदु अध‍िकारी सरकार ने एक नया नोटिफिकेशन जारी करते हुए कहा क‍ि 2010 से पहले की जो ओबीसी लिस्ट है, अब वही लागू होगी उसी फार्मूले पर आगे भी नौकर‍ियों और शिक्षण संस्‍थानों में आरक्षण मिलेगा। इस फैसले के बाद अब राज्य में केवल 66 जातियों या वर्गों को ही सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में 7 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा।

नया आदेश के मायने क्या हैं?

नए नोटिफिकेशन के मुताबिक, अब बंगाल में कुल 66 जातियां/समुदाय ही ओबीसी आरक्षण के दायरे में आएंगे। इन्हें ही सरकारी नौकरियों और अन्य सरकारी पदों पर 7 फीसदी आरक्षण का लाभ मिलेगा।

 

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2024 के बाद नियमितीकरण का आदेश

यह नोटिफिकेशन मई 2024 के कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के मुताबिक जारी किया गया था, जिसमें पश्चिम बंगाल में कई जातियों का ओबीसी स्टेटस रद्द कर दिया गया था और इसे गैर-कानूनी बताया गया था। कोर्ट ने पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) (सेवाओं और पदों में खाली जगहों का आरक्षण) एक्ट, 2012 के तहत बताए गए कई वर्गों को रद्द कर दिया।

 

इस फैसले ने वर्गों के हिसाब से ओबीसी आरक्षण के ढांचे को भी खत्म कर दिया। वर्ग A (ज्यादा पिछड़े वर्ग) के लिए 10 प्रतिशत और कैटेगरी B (पिछड़े वर्ग) के लिए 7 प्रतिशत। फैसले के बाद, राज्य में कुल औबीसी आरक्षण 7 प्रतिशत तक सीमित कर दिया गया है।

 

बीजेपी सरकार ने कहा कि इस फैसले का मकसद कोर्ट के निर्देशों के मुताबिक सामाजिक न्याय और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।