बिहार में स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में बड़ा कदम उठाने की तैयारी है। राज्य सरकार ग्रीन हाइड्रोजन के क्षेत्र में बड़े निवेश की तैयारी कर रही है। पटना में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 के प्रारूप को लेकर समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश दिए। इस नीति के तहत राज्य में करीब 16 हजार करोड़ रुपये के निवेश और 12 हजार रोजगार के अवसर पैदा करने का प्रस्ताव है।
मुख्यमंत्री ने बैठक में स्वच्छ ऊर्जा, हरित तकनीक और सतत विकास की संभावनाओं पर चर्चा की। बैठक में बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी लिमिटेड की ओर से प्रस्तुतीकरण दिया गया। इसमें बिहार में ग्रीन हाइड्रोजन की अर्थव्यवस्था बनाने, इसके लक्ष्य, निवेश को बढ़ावा देने और नीति लागू करने से जुड़ी जानकारी दी गई।
यह भी पढ़ें: बिहार में 100 हेक्टेयर में होगी औषधीय पौधों की खेती, किसानों को मिलेगा अनुदान
2030 तक 5 मिलियन टन का लक्ष्य
बैठक में राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन के 2030 तक के लक्ष्य पर चर्चा हुई। इसके साथ ही बिहार में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी बात हुई। प्रस्तावित बिहार ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 के अलग-अलग प्रावधानों पर भी चर्चा की गई। राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन का लक्ष्य 2030 तक देश में हर साल कम से कम 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने की क्षमता तैयार करना है। इसी लक्ष्य के अनुसार बिहार में भी ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाएगा।
प्रस्तावित नीति के तहत बिहार में करीब 16 हजार करोड़ रुपये के निवेश की संभावना है। इससे करीब 12 हजार रोजगार के अवसर पैदा होने का अनुमान है। यह निवेश ऊर्जा, खाद, रिफाइनरी और परिवहन जैसे क्षेत्रों में आने की संभावना है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन-2030 के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बिहार में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और इस्तेमाल को बढ़ावा दिया जाए। इससे राज्य में स्वच्छ ऊर्जा और हरित तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।'
उन्होंने ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, इस्तेमाल और निवेश को बढ़ावा देने के लिए जरूरी सुविधाएं तैयार करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा, 'ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की ऊर्जा है। इससे प्रदूषण कम होगा और ऊर्जा के क्षेत्र में बिहार आत्मनिर्भर बन सकेगा।'
बरौनी में प्लांट की तैयारी
मुख्यमंत्री ने कहा, 'बरौनी रिफाइनरी और हिंदुस्तान उर्वरक रसायन लिमिटेड के अधिकारियों के साथ मिलकर बिहार के दूसरे क्षेत्रों में भी हाइड्रोजन प्लांट लगाने की संभावनाओं पर चर्चा की जाए।' बरौनी में पहले से रिफाइनरी और खाद कारखाना है। वहां ग्रीन हाइड्रोजन की जरूरत भी है और इसके उत्पादन की संभावना भी है। मुख्यमंत्री ने कहा, 'राज्य में ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन और इस्तेमाल की संभावनाओं को देखते हुए संबंधित उद्योगों और संस्थानों के साथ मिलकर आगे की योजना तैयार की जाए।'
उद्योग विभाग, ऊर्जा विभाग और बिहार स्टेट पावर होल्डिंग कंपनी मिलकर इस पर काम करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, 'बिहार में सौर ऊर्जा की भी काफी संभावनाएं हैं। सौर ऊर्जा की मदद से ग्रीन हाइड्रोजन बनाया जाता है। इसलिए सौर ऊर्जा और ग्रीन हाइड्रोजन को एक साथ बढ़ावा दिया जाए। इससे किसानों को भी फायदा होगा और उद्योगों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा मिल सकेगी।
यह भी पढ़ें: 'बिहार के बाढ़-सूखा किसानों को 15 हजार दें', तेजस्वी यादव ने केंद्र से की मांग
क्या है ग्रीन हाइड्रोजन?
ग्रीन हाइड्रोजन एक तरह का स्वच्छ ईंधन है। इसे पानी को इलेक्ट्रोलिसिस प्रक्रिया से हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में अलग करके बनाया जाता है। इसमें सौर और पवन ऊर्जा का इस्तेमाल होता है। इसलिए इसे स्वच्छ ऊर्जा का एक विकल्प माना जाता है। केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन शुरू किया है। इसके तहत 2030 तक देश में 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
बिहार में ग्रीन हाइड्रोजन नीति लागू होने से रिफाइनरी, खाद कारखाने, स्टील और परिवहन क्षेत्र में इसका इस्तेमाल बढ़ सकता है। इससे कार्बन उत्सर्जन कम करने में मदद मिलेगी। 16 हजार करोड़ रुपये के निवेश से नए उद्योग लगने की संभावना है और करीब 12 हजार लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है। इसके अलावा दूसरे स्तर पर भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
बैठक में ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, वित्त विभाग के प्रधान सचिव विनय कुमार, ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
