उत्तर प्रदेश के जिला कानपुर में नगर निगम सदन की बैठक के दौरान शनिवार को उस समय हंगामा खड़ा हो गया, जब सपा और भाजपा के पार्षद आपस में भिड़ गए। वार्ड परिसीमन को लेकर चर्चा के बीच सपा पार्षद रजत कौशिक बाजपेयी और भाजपा पार्षद विकास जायसवाल के बीच कहासुनी के बाद मारपीट हो गई। दोनों के बीच हाथापाई बढ़ने पर सदन में मौजूद दूसरे पार्षदों ने बीच-बचाव किया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही करीब आधे घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी।
बैठक के दौरान वार्ड परिसीमन से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के बीच रजत कौशिक बाजपेयी और विकास जायसवाल के बीच विवाद शुरू हुआ। देखते ही देखते कहासुनी ने मारपीट का रूप ले लिया। सपा पार्षद की ओर से भाजपा पार्षद पर हमला किए जाने की बात सामने आई, जिसके बाद भाजपा पार्षदों ने विरोध शुरू कर दिया। दूसरे पार्षदों ने दोनों को अलग कर मामला शांत कराने की कोशिश की। मारपीट के बाद नगर निगम सदन में काफी देर तक हंगामा और नारेबाजी का माहौल बना रहा। स्थिति बिगड़ती देख कार्यवाही को करीब आधे घंटे के लिए रोकना पड़ा। महापौर ने पार्षदों को सदन की मर्यादा बनाए रखने की बात कहते हुए कहा कि 'यह सदन है, दंगल नहीं। बाहर जाकर लड़ो।'
‘टोटी चोर’ के नारे से भी गरमाया माहौल
हंगामे के दौरान भाजपा पार्षदों की ओर से सपा पार्षद के खिलाफ ‘टोटी चोर’ के नारे लगाए जाने की बात भी सामने आई। इससे सदन का माहौल और गरमा गया। दोनों पक्षों के पार्षदों के बीच तीखी नोकझोंक के बाद काफी देर तक विरोध और हंगामा चलता रहा। बैठक के दौरान भाजपा से निष्कासित किए गए पार्षद पवन गुप्ता की सदन में मौजूदगी का मुद्दा भी उठा। इसे लेकर पार्षदों ने विरोध जताया। इससे पहले पवन गुप्ता और अंकित मौर्य को तीन सदन बैठकों से निष्कासित किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी
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कार्यकारिणी के छह सदस्यों का होना था चुनाव
दरअसल, 26 सितंबर की नगर निगम सदन की बैठक मुख्य रूप से कार्यकारिणी के छह रिक्त सदस्यों के चुनाव के लिए बुलाई गई थी। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक कार्यकारिणी के कई सदस्यों का कार्यकाल 13 अगस्त को समाप्त हो गया था, जबकि सिविल लाइंस के पार्षद यशपाल सिंह के निधन के बाद एक पद भी रिक्त हुआ था। इन रिक्त पदों पर चुनाव कराया जाना था। महापौर की ओर से सभी दलों के पार्षदों के साथ सहमति बनाने की कोशिश की जा रही थी।
टेंडर घोटाले का मुद्दा उठाने की मांग
नगर निगम में चल रहे कथित टेंडर घोटाले का मुद्दा भी बैठक से पहले चर्चा में था। कांग्रेस पार्षद दल के नेता हाजी सुहेल अहमद ने महापौर को पत्र देकर टेंडर प्रक्रिया से जुड़े मामले पर सदन में चर्चा कराने और अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की थी। पत्र में टेंडर से जुड़े अभिलेख, निर्णय और जांच रिपोर्ट सदन के सामने रखने की मांग भी की गई थी।टेंडर मामले की जांच को लेकर हाल में सीडीओ की अध्यक्षता में हुई जांच में 15 से अधिक फर्मों के पंजीकरण और टेंडर से जुड़े दस्तावेजों में गड़बड़ियां मिलने की रिपोर्ट सामने आई है। जांच रिपोर्ट शासन को भेजे जाने की जानकारी भी प्रकाशित हुई है।
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सफाई व्यवस्था को लेकर भी उठे सवाल
बैठक में पार्षद गोविंद ने अपने क्षेत्र में करीब दो साल से कूड़ा न उठाए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने नगर निगम प्रशासन से सफाई व्यवस्था दुरुस्त कराने की मांग की। पार्षदों ने टेंडर प्रक्रिया, विभिन्न नगर निगम समितियों और विकास कार्यों से जुड़े सवालों पर भी नगर आयुक्त से स्पष्ट जवाब मांगा।इस तरह कार्यकारिणी के छह सदस्यों के चुनाव के लिए बुलाई गई नगर निगम की बैठक राजनीतिक खींचतान, पार्षदों के बीच मारपीट और विभिन्न मुद्दों पर हुए हंगामे के चलते चर्चा में आ गई।
