हिमाचल प्रदेश की तीर्थन घाटी के धारागाड़ गांव में गुरुवार सुबह उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक मकान में अचानक भीषण आग भड़क उठी। आग इतनी तेजी से फैली कि देखते ही देखते पूरा मकान आग की चपेट में आ गया और जलकर राख हो गया। हादसा सुबह करीब 5 बजे का बताया जा रहा है। राहत की बात यह रही कि इस अग्निकांड में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई।

 

जानकारी के अनुसार, बंजार उपमंडल मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर दूर ग्राम पंचायत कण्डीधार के धारागाड़ गांव में जय चंद पुत्र गंगा राम के मकान में अचानक आग लग गई। मकान में दो परिवार रह रहे थे। सुबह के समय आग लगने की जानकारी मिलते ही गांव में हड़कंप मच गया। स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और आग पर काबू पाने के प्रयास शुरू किए। ग्रामीणों की तत्परता से आग को आसपास के मकानों तक फैलने से रोकने में मदद मिली।

दो परिवारों को भारी नुकसान

आग की तीव्रता इतनी अधिक थी कि मकान और उसमें रखा सामान बचाया नहीं जा सका। अग्निकांड में दोनों परिवारों को घरेलू सामान, कपड़े, बिस्तर और अन्य आवश्यक वस्तुओं सहित भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, समय रहते लोगों के बाहर निकल आने से किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई। घटना की सूचना प्रशासन को मिलने के बाद राजस्व विभाग की टीम भी मौके पर पहुंची और नुकसान का जायजा लिया। तहसीलदार बंजार नीरज शर्मा ने बताया कि प्रभावित दोनों परिवारों को तत्काल अंतरिम राहत के तौर पर 10-10 हजार रुपये प्रदान किए गए हैं। इसके अलावा परिवारों की तत्काल जरूरत को देखते हुए आवश्यक घरेलू सामान भी उपलब्ध करवाया गया है।

 

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तहसीलदार ने कहा कि आग से हुए नुकसान का विस्तृत आकलन किया जा रहा है। आकलन रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार प्रभावित परिवारों को अतिरिक्त राहत उपलब्ध करवाई जाएगी। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों को हरसंभव सहायता देने का आश्वासन दिया गया है।

 

कुल्लू की ऊंची और ग्रामीण घाटियों में सर्दियों के दौरान घरों में आग जलाने, हीटर, अंगीठी और अन्य ताप उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ जाता है। ऐसे में प्रशासन और अग्निशमन विभाग की ओर से लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत रहती है। खासकर लकड़ी से बने पुराने मकानों में आग लगने पर इसके तेजी से फैलने का खतरा रहता है।

 

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प्रशासन की एडवाइजरी

प्रशासन की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों से अपील की गई है कि सर्दी के मौसम में अंगीठी, हीटर, तंदूर और अन्य ताप उपकरणों को जलाकर कभी भी बिना निगरानी के न छोड़ें। सोने से पहले यह सुनिश्चित करें कि अंगीठी और आग पूरी तरह बुझ चुकी हो। घरों में इस्तेमाल होने वाले बिजली के हीटर और अन्य उपकरणों के लिए गुणवत्तापूर्ण वायरिंग और उचित क्षमता वाले बिजली कनेक्शन का इस्तेमाल किया जाए।

 

एक ही सॉकेट पर कई अधिक क्षमता वाले उपकरण लगाने से बचें और खराब तार, प्लग अथवा स्विच को तत्काल बदलवाएं। प्रशासन की ओर से यह भी सलाह दी जाती है कि घरों में रसोई गैस सिलिंडर, चूल्हे और हीटिंग उपकरणों का इस्तेमाल करते समय विशेष सावधानी बरती जाए। गैस की गंध आने पर बिजली के स्विच ऑन या ऑफ न करें और तत्काल गैस की आपूर्ति बंद कर सुरक्षित स्थान पर जाएं।

गांवों में प्राथमिक स्तर पर तैयारी जरूरी

दुर्गम ग्रामीण क्षेत्रों में अग्निशमन वाहन के पहुंचने में समय लग सकता है। ऐसे में ग्रामीणों को प्राथमिक स्तर पर आग से बचाव की तैयारी रखने की जरूरत है। घरों के आसपास सूखी घास, लकड़ी और अन्य ज्वलनशील सामग्री का अनावश्यक ढेर नहीं लगाना चाहिए। परिवार के सदस्यों को आपात स्थिति में बाहर निकलने का सुरक्षित रास्ता पहले से पता होना चाहिए। धारागाड़ की घटना ने एक बार फिर ग्रामीण क्षेत्रों में अग्नि सुरक्षा को लेकर सतर्कता बढ़ाने की जरूरत को सामने ला दिया है। प्रशासन ने प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत देकर उनके लिए जरूरी सहायता उपलब्ध करवाई है, जबकि नुकसान का विस्तृत आकलन पूरा होने के बाद नियमानुसार अतिरिक्त राहत मिलने की उम्मीद है।