हरियाणा में आवारा मवेशियों की समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने कई कदम उठाए हैं। इनमें चार 'गौ वन' विकसित करना शामिल है। राज्य लोक उद्यम ब्यूरो के अध्यक्ष मोहन लाल कौशिक ने सोमवार को यह जानकारी दी। मोहन लाल कौशिक ने हरियाणा गौ सेवा आयोग के अधिकारियों के साथ बैठक की अध्यक्षता की। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने ग्राम पंचायतों को निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा है कि गौशालाओं को कम से कम 10 एकड़ 'गोचर' भूमि दी जाए। इससे गायों के लिए चारे का इंतजाम हो सकेगा।
राज्य लोक उद्यम ब्यूरो के अध्यक्ष मोहन लाल कौशिक ने बताया कि फिलहाल राज्य में करीब 70,000 गाय सड़कों पर घूम रही हैं। इन्हें गौशालाओं और गौ वन में रखने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। गौ सेवा आयोग, ग्राम पंचायतों और शहरी निकायों का सहयोग लिया जा रहा है। इनकी मदद से मवेशियों को गौशालाओं और गौ वन में रखा जाएगा।
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चार जिलों में बनेंगे गौ वन
महेंद्रगढ़ के भोजावास गांव में 89 एकड़ में गौ वन बनाने का काम अंतिम चरण में है। पलवल के राजपुरा खादर, कैथल के भूना और करनाल के सांभली में भी गौ वन बनाने की प्रक्रिया जारी है।
राज्य में करीब 707 पंजीकृत गौशालाएं हैं। इनमें फिलहाल लगभग 40,000 गाय रखी गई हैं। बाकी मवेशियों को नई गौशालाओं में भेजने का काम चल रहा है।
22 नई गौशालाएं इसी महीने होंगी चालू
इस महीने 22 गौशालाओं को चालू किया जाएगा। इसके अलावा 14 नई गौशालाएं खोलने की प्रक्रिया भी चल रही है। जल्द ही सभी पंजीकृत गौशालाओं को ई-रिक्शा दिए जाएंगे। इन्हें 'गौ सेवा रथ' कहा जाएगा। इनका इस्तेमाल घायल और बीमार गायों की मदद के लिए होगा।
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सरकार गौशालाओं को चारा अनुदान के रूप में आर्थिक मदद दे रही है। इसके लिए पोर्टल खुला है। पंजीकृत गौशालाएं 14 अक्टूबर तक आवेदन कर सकती हैं।
