बिहार में शराब कंपनियों पर कार्रवाई को लेकर विभाग में बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। मद्य निषेध मंत्री मदन सहनी और विभागीय सचिव संजय कुमार सिंह के बीच मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। मंत्री ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखकर शिकायत की है। शराब की बड़ी खेप पकड़े जाने के बावजूद कंपनियों पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाया गया है।
बताया जा रहा है कि मंत्री मदन सहनी के निर्देश पर विभाग ने 10 प्रमुख शराब कंपनियों को नोटिस जारी किया था। कंपनियों से बिहार में शराब पहुंचने को लेकर स्पष्टीकरण मांगा गया था। दोषी पाए जाने पर कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की चेतावनी भी दी गई थी। मंत्री का कहना है कि बिहार में शराबबंदी लागू है, फिर भी बड़े पैमाने पर शराब पकड़ी जा रही है। यह शराब आखिर कहां से आ रही है? कंपनियों की जवाबदेही तय होनी चाहिएल वहीं, विभागीय अधिकारियों ने कानूनी अड़चनों का हवाला देकर इस कार्रवाई पर आपत्ति जताई है।
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क्या बोले अधिकारी?
अधिकारियों का तर्क है कि शराब कंपनियों पर इस तरह की कार्रवाई अदालत में टिक नहीं पाएगी। अधिकारियों का कहना है कि कंपनियां दूसरे राज्यों में लाइसेंस लेकर शराब बनाती हैं। बिहार में शराब पहुंचाना तस्करों का काम है। इसके लिए सीधे कंपनियों को दोषी ठहराना कानूनी रूप से सही नहीं होगा।
भड़क गए मंत्री
मंत्री ने कहा है कि शराबबंदी के नाम पर गरीब जेल जा रहे हैं। छोटे-छोटे तस्कर और पीने वाले पकड़े जा रहे हैं, लेकिन बड़े दोषियों पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। मंत्री ने कहा, गरीब जेल जा रहे हैं, लेकिन बड़ी कंपनियां खुलेआम शराब बेचकर मुनाफा कमा रही हैं। उनकी भी जवाबदेही तय होनी चाहिए। अगर कंपनियों की शराब बिहार में मिल रही है, तो उन्हें भी जवाब देना होगा।
मुख्यमंत्री को लिखा पत्र
मंत्री ने इस पूरे मामले को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को पत्र लिखा है। पत्र में उन्होंने विभागीय सचिव पर कार्रवाई में अड़ंगा लगाने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि विभाग के अधिकारी उनकी बात नहीं सुन रहे हैं। मंत्री ने पत्र में मांग की है कि शराब कंपनियों पर कार्रवाई के लिए स्पष्ट निर्देश दिए जाएं।
मंत्री और सचिव के बीच विवाद के बाद विभाग में हड़कंप मच गया है। विभाग के अधिकारी असमंजस में हैं। एक तरफ मंत्री का निर्देश है, दूसरी तरफ कानूनी अड़चनें हैं। सूत्रों का कहना है कि इस विवाद के बाद कई फाइलें अटक गई हैं। शराब कंपनियों को जारी नोटिस पर भी आगे की कार्रवाई रुकी हुई है।
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क्या है पूरा मामला?
बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू है। इसके बावजूद राज्य के अलग-अलग जिलों में लगातार शराब की बड़ी खेप पकड़ी जा रही है। हाल के दिनों में कई जिलों में ट्रक भरकर शराब पकड़ी गई है। जांच में पता चला है कि यह शराब पड़ोसी राज्यों की कंपनियों से आ रही है। मंत्री का कहना है कि कंपनियों को पता है कि उनकी शराब बिहार में जा रही है, फिर भी वे सप्लाई रोक नहीं रही हैं। इसी को लेकर मंत्री ने 10 बड़ी कंपनियों को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया था। अधिकारियों का कहना है कि शराब कंपनियों के पास दूसरे राज्यों में उत्पादन और बिक्री का वैध लाइसेंस है। बिहार में शराब की तस्करी के लिए सीधे कंपनियों पर FIR करना कानूनी रूप से कमजोर होगा।
अधिकारियों का तर्क है कि यदि सरकार ने बिना ठोस सबूत के कंपनियों पर FIR दर्ज की, तो कंपनियां अदालत में चली जाएंगी और सरकार की किरकिरी होगी। मंत्री और अफसर के बीच इस विवाद की चर्चा राजनीतिक गलियारों में भी हो रही है। विपक्ष ने भी इस मुद्दे को उठाया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार में तालमेल नहीं है। मंत्री और अफसर एक-दूसरे के खिलाफ पत्र लिख रहे हैं। वहीं, सत्तापक्ष का कहना है कि यह विभागीय मामला है। मुख्यमंत्री जल्द ही इसका समाधान निकालेंगे। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के फैसले पर टिकी हैं। मुख्यमंत्री इस मामले में क्या फैसला लेते हैं, इस पर सबकी नजर है।
