बिहार के जमुई जिले के खैरा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में नौ छात्राओं की तबीयत अचानक खराब हो गई। सुबह के समय जब सभी छात्राएं प्रार्थना के लिए लाइन में खड़ी थीं तब अचानक कुछ बच्चियों को उल्टी और दस्त होने लगा। यह देखकर स्कूल के स्टाफ में हड़कंप मच गया और बिना किसी देरी के सभी बीमार छात्राओं को इलाज के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया।अस्पताल के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. अमित आनंद ने बताया कि सभी छात्राओं को अस्पताल में भर्ती कर लिया गया है। फिलहाल सबकी हालत नियंत्रण में है और उन्हें जरूरी दवाइयां और स्लाइन दी जा रही है।
एक साथ इतनी बच्चियों के बीमार पड़ने की वजह से स्कूल में डर का माहौल है और उनके माता-पिता भी काफी परेशान हैं। प्रशासन ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चियों में डिहाइड्रेशन के लक्षण मिले हैं। शुरुआती तौर पर यह आशंका जताई जा रही है कि यह समस्या खराब खाने, गंदे पानी या फिर बहुत ज्यादा गर्मी की वजह से हुई हो सकती है लेकिन बीमारी की असली वजह अभी साफ नहीं हो पाई है।
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बताया गया कि सुबह करीब 9:30 पर रोज की तरह सभी छात्राएं मैदान में प्रार्थना करने के लिए कतार में खड़ी थीं। उसी दौरान कुछ छात्राओं को अचानक चक्कर आने लगे और घबराहट महसूस होने लगी। एक के बाद एक कुल नौ छात्राएं बीमार पड़ गई। विद्यालय की वार्डन और शिक्षकों ने तुरंत इसकी खबर बीडीओ और स्वास्थ्य विभाग को दी। बिना एक पल भी गंवाए सभी छात्राओं को गाड़ी में बैठाकर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया गया। अस्पताल में डॉक्टरों की टीम पहले से तैयार थी। सभी छात्राओं को अलग-अलग बेड पर लिटाकर तुरंत उनका इलाज शुरू कर दिया गया। अस्पताल में भर्ती होने वाली छात्राओं में बबली हेंब्रम, नंदनी कुमारी, सरस्वती मरांडी, प्रिया हासदा, चांदनी कुमारी, सुनीता मुरमू, फूलमणि हेमरम और अनीषा टुडू समेत कुल नौ छात्राएं शामिल हैं। डॉक्टरों ने बताया कि इन सभी की उम्र 12 से 15 साल के बीच है। समय रहते बच्चियों को अस्पताल पहुंचा दिए जाने की वजह से एक बड़ा खतरा टल गया।
पानी का लिया गया सैंपल
जांच के दौरान सभी बच्चियों में डिहाइड्रेशन के लक्षण मिले हैं। उन्हें समय पर जरूरी दवा, ओआरएस और स्लाइन दी जा रही है। डॉक्टर के मुताबिक सभी की हालत अब पूरी तरह से काबू में है और वे खतरे से बाहर हैं। डॉक्टर का कहना है कि एक साथ इतनी सारी छात्राओं के बीमार पड़ने के पीछे कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं। खराब खाना, दूषित पानी या फिर उमस भरा मौसम इसकी वजह हो सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इस बीमारी की सही वजह का पता लगाने के लिए हर उस जगह की जांच जरूरी है जहां से बच्चियों ने खाया या पिया था। यह पता लगाया जाएगा कि शुक्रवार की रात या शनिवार की सुबह छात्राओं ने क्या खाया था। वे पानी कहां से पीती थीं और हॉस्टल में साफ-सफाई कैसी रखी जाती है। इसके लिए स्कूल के रसोईघर, पीने के पानी की टंकी और खाने-पीने की चीजों के सैंपल लेकर जांच करवाई जाएगी।
अधिकारियों ने प्रबंधन से मांगी पूरी रिपोर्ट
इधर जैसे ही इस घटना की खबर शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन को मिली वे तुरंत हरकत में आ गए। बड़े अधिकारियों ने स्कूल के मैनेजमेंट से इस पूरी घटना की रिपोर्ट मांग ली है। इस कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय में गरीब और आदिवासी परिवारों की छोटी बच्चियां हॉस्टल में रहकर अपनी पढ़ाई करती हैं। ऐसे में एक साथ नौ छात्राओं के बीमार पड़ जाने से स्कूल के खाने और पीने की साफ-सफाई पर बहुत बड़े सवाल खड़े हो गए हैं।
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बच्चियों के माता-पिता ने भी प्रशासन से यह मांग की है कि उनकी बेटियों के स्वास्थ्य के साथ किसी भी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। फिलहाल सभी छात्राओं का इलाज अस्पताल में चल रहा है और वे डॉक्टरों की देखरेख में हैं। प्रशासन ने यह भरोसा दिया है कि जांच पूरी होने के बाद जो भी कारण सामने आएगा उसके हिसाब से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
