देश में होने वाले उपचुनाव आमतौर पर राष्ट्रीय स्तर पर ज्यादा चर्चा नहीं बटोरते लेकिन इस बार मामला अलग है। बिहार की राजधानी पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर हो रहा उपचुनाव पूरे देश में सुर्खियां बटोर रहा है। इसकी सबसे बड़ी वजह है प्रशांत किशोर का इसी सीट से पहली बार चुनावी मैदान में उतरना। जैसे ही प्रशांत किशोर ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया, वैसे ही उन पर राजनीतिक हमले भी तेज हो गए। अब इस कड़ी में सांसद पप्पू यादव भी शामिल हो गए हैं। उन्होंने प्रशांत किशोर पर तंज कसते हुए सवाल किया कि चुनाव से पहले वह कितनी बार बांकीपुर गए थे। इतना ही नहीं, पप्पू यादव ने उन्हें बहुरूपिया तक कह दिया।
पूर्णिया सांसद पप्पू यादव ने कहा, 'इस बहुरूपिए को इतनी कवरेज क्यों दी जा रही है? वह खुद कह रहे हैं कि मैं इतने पैसे लेकर चुनाव लड़ रहा हूं।' बांकीपुर से उनका क्या लेना-देना है? चुनाव से पहले वह कितनी बार बांकीपुर गए हैं? जो राजनीतिक दल इतने लंबे समय से जमीन पर संघर्ष कर रहे हैं, क्या उन्हें चुनाव लड़ना बंद कर देना चाहिए?'
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इसके बाद उन्होंने आगे कहा, 'जो पार्टियां और कार्यकर्ता सालों से संघर्ष कर रहे हैं, क्या उन्हें अपनी दुकान बंद कर देनी चाहिए? अगर सिर्फ पैसे के दम पर ऐसे बहरूपियों को जनता वोट देने लगे, तो फिर संघर्ष का क्या मतलब रह जाएगा? ऐसे लोग राजनीति की संस्कृति के लिए खतरा हैं। इन्हें लगता है कि ऊपर से आओ, लॉन्ग जंप लगाओ, पैराशूट से उतर जाओ, जनता को बहलाओ, युवाओं और गरीबों में पैसा बांटो और चुनाव जीत जाओ।'
पहले नितिन नवीन थे बांकिपुर के विधायक
BJP नेता नितिन नवीन के राज्यसभा सांसद बनने के बाद उन्होंने बांकीपुर विधानसभा सीट छोड़ दी, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराना पड़ रहा है। इस सीट पर प्रशांत किशोर का मुकाबला BJP के नीरज कुमार सिन्हा और RJD की रेखा गुप्ता से है। प्रशांत किशोर के लिए यह चुनाव सिर्फ एक विधानसभा सीट जीतने का सवाल नहीं है, बल्कि उनकी अब तक की राजनीतिक यात्रा की बड़ी परीक्षा भी है।
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साल 2022 में उन्होंने 'जन सुराज अभियान' की शुरुआत की थी। इसके तहत उन्होंने पूरे बिहार में हजारों किलोमीटर की पदयात्रा कर लोगों से सीधा संवाद किया। इसके बाद अक्टूबर 2024 में उन्होंने आधिकारिक तौर पर जन सुराज पार्टी बनाई। तब से वह लगातार खुद को NDA और RJD, दोनों के विकल्प के तौर पर पेश करते रहे हैं। उनका दावा रहा है कि बिहार में जाति की राजनीति नहीं, बल्कि बेहतर शासन और विकास के मुद्दों पर राजनीति होनी चाहिए।
