आम आदमी पार्टी ने साल 2022 में पंजाब में भारी बहुमत के साथ सरकार बनाई थी लेकिन पिछले साढ़े चार साल में सरकार में शामिल कई मंत्रियों को हटना पड़ा या फिर हटा दिया गया। गुलजार सिंह की मौत मामले में अब विपक्ष वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा के इस्तीफे की मांग कर रहा है। पंजाब कांग्रेस ने आज उनके इस्तीफे की मांग को लेकर चंडीगढ़ में बड़ा प्रदर्शन किया। गुलजार सिंह ने आत्महत्या करने से पहले हरपाल सिंह चीमा का नाम लिया था, जिसके कारण उनकी मुश्किलें बढ़ गई हैं। इससे पहले मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को भी इसी तरह के एक मामले में जेल जाने के कारण अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी थी।
दिलचस्प बात यह है कि सरकार बनने के महज दो महीने से कुछ ज्यादा समय बाद ही तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री डॉ. विजय सिंगला को मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। सिंगला पर टेंडर और विभागीय काम में एक प्रतिशत कमीशन मांगने के आरोप लगे थे। मुख्यमंत्री ने खुद आरोपों की पुष्टि करते हुए उनकी गिरफ्तारी के आदेश दिए थे। उस समय पार्टी ने कहा था कि भ्रष्टाचार बर्दाशत नहीं किया जाएगा।
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इन मंत्रियों के भी हुए इस्तीफे
विजय सिंगला के बाद खाद्य प्रसंस्करण एवं बागवानी मंत्री फौजा सिंह सरारी पर अनाज ढुलाई के ठेकेदारों से कथित वसूली की योजना से जुड़ी एक ऑडियो क्लिप को लेकर सवाल उठे। उन्होंने ऑडियो को एडिटेड बताया, लेकिन जनवरी 2023 में उन्हें मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा। इसके बाद इंदरजीत सिंह निज्जर ने निजी कारणों का हवाला देकर इस्तीफा दिया। गुरमीत सिंह मीत हेयर ने लोकसभा चुनाव जीतने के बाद मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था।
2024 में बड़ा बदलाव
इसके बाद आम आदमी पार्टी की सरकार में साल 2024 में बड़ा बदलाव किया गया। लकार सिंह, चेतन सिंह जौरामाजरा, अनमोल गगन मान और ब्रह्म शंकर जिम्पा को कैबिनेट से बाहर कर दिया गया। सितंबर 2024 में हुए सितंबर 2024 के फेरबदल में इन चारों के इस्तीफे लिए गए थे। इसके बाद 2025 में कुलदीप सिंह धालीवाल भी कैबिनेट से बाहर हुए। माना गया कि प्रदर्शन को लेकर पार्टी की नाराजगी की वजह से उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था।
लाल जीत सिंह भुल्लर
लालजीत सिंह भुल्लर ने मार्च 2026 में अपने मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था। अमृतसर के पंजाब स्टेट वेयरहाउसिंग कॉरपोरेशन के जिला मैनेजर गगनदीप सिंह रंधावा की आत्महत्या मामले में उन पर आरोप लगे थे। आत्महत्या से पहले रंधावा का एक वीडियो सामने आया, जिसमें उन्होंने कथित तौर पर तत्कालीन परिवहन मंत्री भुल्लर को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि वे उनके दबाव से परेशान थे। आरोप यह भी लगा कि रंधावा पर एक गोदाम का ठेका मंत्री के करीबी लोगों को देने के लिए दबाव बनाया जा रहा था और उन्हें भुल्लर के आवास पर बुलाकर कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया।
लालजीत सिंह भुल्लर ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया। मामले के तूल पकड़ने के बाद मुख्यमंत्री भगवंत मान ने निष्पक्ष जांच प्रभावित न हो, इसलिए भुल्लर से मंत्री पद से इस्तीफा ले लिया और मुख्य सचिव को जांच के आदेश दिए। इसके अगले दिन पुलिस ने रंधावा की पत्नी की शिकायत पर भुल्लर, उनके पिता सुखदेव सिंह भुल्लर और PA के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने समेत आरोपों में FIR दर्ज की और उन्हें बाद में गिरफ्तार भी किया।
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जेल में संजीव अरोड़ा
आम आदमी पार्टी की मुश्किलें यहीं खत्म नहीं हुई। रियल एस्टेट और कथित करीब 100 करोड़ रुपये के GST फ्रॉड से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग केस में मंत्री संजीव अरोड़ा के घर ED ने अप्रैल 2026 में रेड की थी और बाद में 9 मई को उन्हें PMLA के तहत गिरफ्तार कर लिया। अरोड़ा ने गिरफ्तारी को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में कहा कि कार्रवाई राजनीतिक प्रतिशोध से प्रेरित है और गिरफ्तारी की प्रक्रिया में PMLA की कानूनी सुरक्षा का पालन नहीं हुआ। उनकी जमानत याचिका पर अभी कोर्ट में सुनवाई चल ही रही है। हालांकि, उन्होंने अभी तक मंत्री पद से इस्तीफा नहीं दिया है। उनका जेल जाना पार्टी के लिए झटका है। इसके अलावा भी पार्टी के कई नेता और विधायक विवादों में रहे हैं।
