लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। भगवान श्रीराम को कथित रूप से 'काल्पनिक और पौराणिक पात्र' बताने संबंधी बयान को लेकर दायर शिकायत मामले में वाराणसी की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने बड़ा आदेश दिया है। अदालत ने निचली अदालत के शिकायत खारिज किए जाने के आदेश को निरस्त करते हुए मामले में दोबारा सुनवाई के निर्देश दिए हैं।
यह मामला अधिवक्ता हरिशंकर पांडेय की ओर से दायर शिकायत से जुड़ा है। शिकायत में आरोप लगाया गया था कि राहुल गांधी ने साल 2025 में अमेरिका के ब्राउन यूनिवर्सिटी में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भगवान श्रीराम को 'मिथकीय और काल्पनिक' पात्र बताया था, जिससे करोड़ों सनातन धर्मावलंबियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं।
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शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई और एफआईआर दर्ज कराने की मांग की थी। हालांकि, मई 2025 में वाराणसी की एसीजेएम (एमपी-एमएलए) अदालत ने यह याचिका यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि कथित बयान विदेश में दिया गया था और ऐसे मामले में आवश्यक स्वीकृति की जरूरत होगी।
इसके बाद हरिशंकर पांडेय ने निचली अदालत के आदेश को चुनौती देते हुए पुनरीक्षण याचिका दायर की। सुनवाई के बाद विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश यजुवेंद्र विक्रम सिंह ने निचली अदालत का आदेश रद्द कर दिया और मामले को पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया। अदालत ने निर्देश दिया है कि शिकायत पर कानून के अनुसार नए सिरे से सुनवाई कर उचित आदेश पारित किया जाए।
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राहुल गांधी को भेजा जा सकता है नोटिस
याचिकाकर्ता पक्ष का कहना है कि अब मामले की फिर से सुनवाई होगी और प्रक्रिया के तहत राहुल गांधी को नोटिस या समन जारी किए जाने पर भी विचार किया जा सकता है। अदालत ने माना कि शिकायत को केवल तकनीकी आधार पर खारिज नहीं किया जा सकता और मामले के तथ्यों की विधिक जांच आवश्यक है।
रायबरेली से सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से जुड़ा यह मामला राजनीतिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत के ताजा आदेश के बाद कांग्रेस और भाजपा के बीच बयानबाजी तेज होने की संभावना है, जबकि शिकायतकर्ता पक्ष इसे सनातन आस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बता रहे हैं। फिलहाल मामला वाराणसी की निचली अदालत में दोबारा सुनवाई के लिए भेज दिया गया है, जहां अगली सुनवाई में आगे की कानूनी प्रक्रिया तय होगी।
