जम्मू-कश्मीर में 27 अक्तूबर को मंत्रिमंडल में बड़ा बदलाव हो गया। एक दिन पहले सभी मंत्रियों ने इस्तीफा सौंप दिया था। यह इस्तीफा सीएम उमर अब्दुल्ला को भेजा गया था। नए मंत्रिमंडल में 4 नए मंत्रियों समेत को शपथ दिलाई गई और सतीश शर्मा कैबिनेट से बाहर हो गए। अब मंत्रियों की संख्या बढ़ी तो नाराजगी भी बढ़ी। इस नाराजगी ने अलग राग अलापा है और अब चर्चा है कि उमर अब्दुल्ला की सरकार खतरे में है। उनकी ही पार्टी के 25 विधायकों ने कुछ मांगें रखकर अल्टीमेटम दे दिया है। ये सब उस वक्त हुआ है जब उमर अब्दुल्ला ने निधि राजदान से शादी की है और अपने जीवन की एक नई पारी शुरू की है। दूसरी तरफ पार्टी के लोकसभा सांसद आगा सैयद रूहुल्लाह मेहदी तो पार्टी छोड़ने का ही एलान कर चुके हैं। उन्होंने इसके लिए 3 नवंबर की तारीख चुनी है।
पिछले ही महीने उमर अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के तौर पर 2 साल का कार्यकाल पूरा किया। उसी महीने उनकी ही पार्टी के नेता उन्हें अपने वादे याद दिला रहे हैं। बताते चलें कि चुनाव के दौरान नेशनल कॉन्फ्रेंस ने अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35 (A) बहाल कराने और जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य बनाने का वादा किया था। अब उनकी ही पार्टी के नेताओं का कहना है कि उमर अब्दुल्ला इस मुद्दे को लेकर ढीले पड़ गए हैं।
क्या चाहते हैं बागी विधायक?
पार्टी के 42 में से 25 विधायकों ने शीर्ष नेतृत्व को अल्टीमेटम दिया है। पहली शर्त है कि जिन 4 नेताओं को मंत्री बनाया गया है, उनको हटाकर नए सिरे से मंत्रिमंडल विस्तार हो। साथ ही, यह भी मांग की गई है कि मंत्रिमंडल पर फैसला लेने के लिए पार्टी में विस्तार से चर्चा हो। इतना ही नहीं, मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर सोगामी को भी हटाने की मांग की जा रही है। उन पर आरोप लगाए गए हैं कि वह संगठन के काम में हस्तक्षेप करते हैं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को गुमराह करते हैं।
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इन विधायकों का कहना है कि मंत्री के पद पर जिन नेताओं के 2 साल हो चुके हैं, उन्हें हटाया जाए। इसी क्रम में डिप्टी सीएम सुरिंदर चौधरी को भी हटाने कीा मांग हो रही है। इस बगावत की अगुवाई गुरेज के विधायक नजीर अहमद गुरेजी और थानामंडी के विधायक मुजफ्फर इकबाल खान कर रहे हैं। इन नेताओं ने 4 सदस्यों का एक प्रतिनिधिमंडल बनाने का फैसला किया है जो पार्टी के मुखिया फारूक अब्दुल्ला और सीएम उमर अब्दुल्ला से मिलकर अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपने का इंतजार कर रहा है। दरअसल, इन नाराज विधायकों में कई ऐसे भी हैं जिन्होंने मंत्री बनाए जाने की उम्मीद लगाई थी लेकिन यह उम्मीद पूरी नहीं हुई।
रूहुल्लाह मेहदी ने भी उठाए सवाल
लोकसभा में पार्टी के दो सांसद हैं। इनमें से एक आगा रूहुल्लाह मेहदी भी अब बगावत पर उतर आए हैं। लगभग ढाई दशक से नेशनल कॉन्फ्रेंस में काम कर रहे रूहुल्लाह का कहना है कि वह 3 नवंबर को पार्टी से अलग होने का औपचारिक एलान कर सकते हैं।
कयास लगाए जा रहे हैं कि वह नई पार्टी बना सकते हैं। इसके बारे में उन्होंने कहा है कि उन्हें ऐसे लोगों की तलाश है जिन पर कोई पुराना बोझ ना हो और वे इस रास्ते पर चलने को तैयार हों।
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जम्मू-कश्मीर सरकार के मंत्री
पहले: उमर अब्दुल्ला (सीएम), सुरिंदर चौधरी (डिप्टी सीएम), जावेद डार, जावेद राणा, सकीना इट्टू और सतीश शर्मा।
नया मंत्रिमंडल: उमर अब्दुल्ला (सीएम), सुरिंदर चौधरी (डिप्टी सीएम), जावेद डार, जावेद राणा, सकीना इट्टू, अली मोहम्मद सागर, अल्ताफ अहमद कालू, शमीमा फिरदौस और मीर सैफुल्ला।
विधानसभा का गणित क्या है?
90 विधानसभा सीटों वाली जम्मू-कश्मीर विधानसभा में बहुमत के लिए कुल 46 विधायकों का समर्थन चाहिए। 2024 के चुनाव में नेशनल कॉन्फ्रेंस ने 42, बीजेपी ने 29, कांग्रेस ने 6 और पीडीपी ने 3 सीटों पर जीत हासिल की थी। उमर अब्दु्ल्ला की पार्टी ने कांग्रेस, सीपीएम और कुछ निर्दलीय विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई है।
अगर नेशनल कॉन्फ्रेंस के 25 विधायक बगावत करते हैं तो उसके पास कुल 17 विधायक ही बचेंगे। कांग्रेस के 6 विधायकों को मिलाकर यह संख्या 23 तक जाएगी और कुछ निर्दलीयों का साथ लेने के बावजूद बहुमत से बहुत दूर हो जाएगी। ऐसी स्थिति में अगर मुख्य विपक्षी बीजेपी अविश्वास प्रस्ताव ले आती है तो उमर अब्दुल्ला की सरकार गिर सकती है।
