चीन में करीब 600 साल पुराने डॉक्टर के मेडिकल औजारों पर एक खास पदार्थ के अवशेष मिले हैं। इन औजारों में लोहे की कैंची और चिमटी शामिल हैं। वैज्ञानिकों ने इन पर बचे पुराने अवशेषों की जांच की तो उनमें एकोनिटम पौधे से जुड़े जहरीले पदार्थ के संकेत मिले। रिसर्च के मुताबिक, उस समय इस पौधे से तैयार पदार्थ का इस्तेमाल सर्जरी के दौरान दर्द कम करने और शरीर के किसी हिस्से को सुन्न करने के लिए किया जाता था।

 

ये मेडिकल औजार चीन के जियांगयिन में मिले एक पुराने मकबरे से जुड़े हैं। यह मकबरा शिया चुआन नाम के डॉक्टर का बताया गया है जो 1348 से 1411 के बीच रहे थे। मकबरे से मिली कैंची और चिमटी अब जियांगयिन म्यूजियम में रखी हैं।

 

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औजारों पर क्या मिला?

वैज्ञानिकों ने औजारों की सतह पर मौजूद बहुत छोटे अवशेषों की जांच की। इसके लिए उन्होंने लेजर की मदद से पदार्थों की पहचान करने वाली खास तकनीक का इस्तेमाल किया। इसे SRS तकनीक कहा जाता है। इससे बहुत कम मात्रा में मौजूद पुराने पदार्थों की भी जांच की जा सकती है।

 

जांच में मिले रासायनिक संकेत एकोनिटम पौधे से मिलने वाले पदार्थों से मेल खाते हैं। इनमें एकोनिटाइन नाम के जहरीले पदार्थ से जुड़े संकेत भी मिले। एकोनिटम एक जहरीला पौधा है जिसका इस्तेमाल पुराने समय में दवाओं में भी किया जाता था।

 

वैज्ञानिकों ने इन अवशेषों की जांच के बाद पुराने चीनी चिकित्सा ग्रंथों में दी गई जानकारी से भी इसकी तुलना की। इन ग्रंथों में सर्जरी के दौरान दवाओं के इस्तेमाल का जिक्र मिलता है। इनमें बताया गया है कि सर्जरी से पहले जिस जगह पर काम करना होता था वहां सुन्न करने वाली दवा लगाई जाती थी और इसके बाद कैंची से त्वचा काटी जाती थी।

जहरीला पदार्थ दवा कैसे बना?

यही इस खोज की सबसे खास बात है। रिसर्च के मुताबिक, उस समय एकोनिटम से तैयार पदार्थ का इस्तेमाल शरीर के किसी खास हिस्से को सुन्न करने के लिए किया जाता था। इसे सर्जरी वाली जगह पर लगाया जाता था ताकि उस हिस्से में दर्द कम महसूस हो।

 

पुराने चीनी चिकित्सा ग्रंथों में भी ऐसे सुन्न करने वाले पदार्थों का जिक्र मिलता है। इनमें काओवू सैन नाम की एक दवा का उल्लेख है। इसे मरीज को दर्द कम महसूस कराने के लिए इस्तेमाल किया जाता था और सर्जरी के दौरान इसकी मदद ली जाती थी।

 

एकोनिटम पौधा काफी जहरीला होता है लेकिन उस समय इसके जहरीले असर को कम करने के लिए इसे अलग-अलग तरीकों से तैयार किया जाता था। इसे सिरके में उबाला जाता था और काले सोयाबीन के घोल में भिगोया जाता था। इसके अलावा कुछ दूसरी प्रक्रियाओं की मदद से भी इसके जहरीले असर को कम किया जाता था। इन तरीकों का मकसद पौधे के जहरीले असर को कम करना था। 

 

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इस खोज का क्या महत्व है?

इस खोज से पता चलता है कि मिंग राजवंश के सयम चीन के डॉक्टर सर्जरी के लिए कैंची और चिमटी जैसे औजारों के साथ दर्द कम करने वाली दवाओं का भी इस्तेमाल करते थे। खास बात यह है कि एक जहरीले पौधे से मिलने वाले पदार्थ को अलग-अलग तरीकों से तैयार करते सर्जरी में इस्तेमाल किया जाता था।

 

रिसर्च के मुताबिक, उस समय के डॉक्टर जानते थे कि यह दवा जहरीली है। इसलिए वे इसे खास तरीके से तैयार करके और सही मात्रा में इस्तेमाल करते थे ताकि इसका असर भी हो और नुकसान भी कम हो।