सिद्धार्थ मल्होत्रा और तमन्ना भाटिया की फिल्म 'द वन: फॉर्स ऑफ द फॉरेस्ट' रिलीज हो गई है। यह एक सुपरनैचुरल थ्रिलर फिल्म है। इस फिल्म का निर्देशन पंचायत फेम दीपक कुमार मिश्रा ने किया है। फिल्म की कहानी में रहस्यमयी जंगल, वन देवी का मंदिर और छठ मैया से जुड़ी आस्था का तड़का लगाया गया है। इस फिल्म का इंतजार दर्शकों को बेसब्री से था।
इस फिल्म को लेकर दर्शक लगातार एक्स अकाउंट पर रिव्यू दे रहे हैं। लोगों का कहना है कि फिल्म आपकी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरती है। कमजोर कहानी की वजह से फिल्म मजेदार नहीं लगती है।
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दर्शकों को कैसी लगी 'द वन'?
एक व्यक्ति ने लिखा, "लोककथाओं और अलौकिक दुनिया का कॉन्सेप्ट दिलचस्प है। फिल्म का फर्स्ट हाफ दिलचस्प है। विजुअल और बीजीएम प्रभावशाली है लेकिन सेकंड हाफ में स्क्रीन प्ले कमजोर पड़ जाता है।'
दूसरे व्यक्ति ने लिखा, 'द वन बहुत ही खराब ऐक्टिंग, स्क्रीनप्ले, म्यूजिक। सब कुछ बेकार से घटिया के बीच में है। मनिष पॉल ठीक है और सुनील ग्रोवर विलेन के रोल में अच्छे नहीं लगे। सिद्धार्थ की परफॉर्मेंस बहुत खराब है।' तीसरे व्यक्ति ने लिखा, 'द वन देख कर लगा कि ऐकता कपूर का कोई सीरियल देख रहा हूं।' कुछ लोगों ने फिल्मों को अच्छा रिव्यू भी दिया है।
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'द वन' की कहानी
'द वन' की शुरुआत मुंबई में रहने वाले कपल ऋषि (सिद्धार्थ मल्होत्रा) और ममता (तमन्ना भाटिया) के साथ होती है। दोनों अपनी जिंदगी की निजी परेशानियों से लड़ रहे हैं। इस बीच ऋषि को अपने गांव देवांचल जाना पड़ता है। गांव जाकर उसे पता चलता है कि एक जंगल है जिसमें सूर्यास्त के बाद जाना मना होता है। ऋषि इन बातों में भरोसा नहीं करता है और दूसरी तरफ जंगल के बीच से एक सड़क निकालने का प्रस्ताव रखा जाता है ताकि विकास हो सके। ऋषि धीरे-धीरे उस रहस्यमयी जंगली की तरफ खींचता चला जाता है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब ऋषि जंगल में सड़क बनने की बात को लेकर सहमत नहीं होता है और जंगल को बचाने का फैसला करता है।
फिल्म का फर्स्ट हाफ मजेदार है लेकिन इंटरवल के बाद कहानी खो जाती है। वन देवी और जंगल के रहस्य को मजबूती से पेश करने में नाकमयाब रहती है।
