जाह्नवी कपूर और राम चरण की पेड्डी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हो गई है। इस फिल्म के कुछ सीन और जाह्नवी के किरदार ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। एक तरफ लोगों का कहना है कि जाह्नवी कपूर का किरदार बेहद कमजोर है, जिसके विचारों को बहुत कम दिखाया गया है। इसके बजाय जाह्नवी के किरदार को  की इच्छाओं के पात्र के तौर पर दिखाया गया है। साथ ही कई दर्शकों का मानना है कि जाह्नवी को इस फिल्म में ऑब्जेक्टिफाई किया गया है। सोशल मीडिया पर लोग जाह्नवी के किरदार की आलोचना कर रहे हैं। साथ ही, फिल्म सेंसर बोर्ड पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि वह ऐसे दृश्यों पर रोक क्यों नहीं लगाता।

 

पेड्डी एक तमिल फिल्म है। इस फिल्म में राम चरण, जाह्नवी कपूर के अलावा शिव राजकुमार, रवि किशन, जगपति बाबू और बोमन ईरानी ने भी काम किया है। इस फिल्म के निर्देशक बुची बाबू सना हैं। फिल्म के कुछ सीन और जाह्नवी के किरदार को स्क्रीन पर दिखाने के तरीके की फैंस ने आलोचना की है। आइए जानते हैं सोशल मीडिया पर पेड्डी फिल्म को लेकर क्या कहा जा रहा है?

 

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जाह्नवी को ऑब्जेक्टिफाई किया गया?

पेड्डी फिल्म में एक ऐसा सीन दिखाया गया है, जिसमें महिला की सहमति (कन्सेंट) को अहमियत नहीं दी गई। फिल्म में राम चरण का नाम पेड्डी है और जाह्नवी का नाम अचियम्मा है। फिल्म में पेड्डी यह कहते नजर आता है कि वह अचियम्मा को उनकी मर्जी के बिना छूना चाहता है, क्योंकि वह कभी उससे प्यार नहीं करेगी। साथ ही उसके पिता पेड्डी से उसकी शादी भी नहीं कराएंगे।

 

इसके अलावा पूरी फिल्म में जाह्नवी को राम चरण के इर्द-गिर्द दिखाया गया है। उनके विचारों या व्यक्तित्व की बजाय उनकी खूबसूरती और आकर्षण को ज्यादा दिखाया गया है। इसे लेकर लोगों ने नाराजगी जाहिर की है।

 

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फिल्म के बारे में लोगों की राय

एक अकाउंट पर मोहन नाम के व्यक्ति ने कहा, 'मैं सच में जानना चाहता हूं कि कितने लोग सिर्फ ऐसे सीन देखने के लिए थिएटर जाते हैं। मैंने हाल ही में एक फिल्म रिव्यू पढ़ा, जिसमें फीमेल लीड की सिर्फ 'ग्लैमर जोड़ने' के लिए तारीफ की गई थी। उनकी एक्टिंग पर एक भी शब्द नहीं कहा गया। यह सदियों से भारतीय सिनेमा की दुखद कहानी रही है।'

दूसरे व्यक्ति ने कहा, 'अब समय आ गया है कि फिल्मों में हीरोइनों को सेक्शुअलाइज करना बंद किया जाए। सच में एक सीन है, जहां हीरो उसका चेहरा बताता है, लेकिन कैमरा उसकी कमर दिखाता है।'

एक अन्य व्यक्ति ने कहा, 'फिल्म के पहले हाफ में जाह्नवी के सीन एकदम वल्गर और घटिया हैं।'

एक तीसरे ने कहा, 'हीरोइन को एक मजबूत कैरेक्टर मिलना चाहिए था। इसके बजाय उसे कई अश्लील, घटिया और ऑब्जेक्टिफाइंग सीन एक साथ जोड़कर एक रोल का नाम दे दिया गया। यह बोल्ड नहीं है, यह ग्लैमरस नहीं है। यह सिर्फ खराब और घटिया राइटिंग है। ऑडियंस में मौजूद हर महिला के लिए यह पूरी तरह शर्मिंदगी की बात है।'