जंतर मंतर पर 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक को आज सुबह दिल्ली पुलिस सफदरजंग अस्पताल ले गई। अस्पताल ने बताया, 'लंबे समय तक भूखे रहने और शरीर में पानी की कमी के कारण सोनम वांगचुक कमजोर हो गए हैं। फिलहाल उनकी हालत स्थिर है, सभी स्वास्थ्य पैरामीटर सामान्य हैं। उनकी पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने कहा है कि बिना सहमति के उनके मुंह या नसों के जरिए कुछ भी नहीं दिया जाए.

 

सोनम वांगचुक के बाद जंतर मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) फाउंडर अभिजीत दीपके भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। ऐसे में एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि लंबे समय तक खाना न खाने या भूख हड़ताल से शरीर पर क्या असर पड़ता है। इस स्थिति क्या केवल पानी पीकर कई दिनों तक जिंदा रहा जा सकता है?

 

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अब कैसी है सोनम वांगचुक की सेहत?

अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, लंबे समय तक भूखे रहने की वजह से वांगचुक को हल्की कमजोरी और शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) की शिकायत है। डॉक्टरों ने बताया, वांगचुक के सभी वाइटल पैरामीटर सामान्य हैं। उनकी लगातार निगरानी की जा रही है और इलाज जारी है। पहले इमर्जेंसी मेडिसिन विभाग ने उनका इलाज किया, बाद में उन्हें मेडिसिन विभाग में भर्ती किया गया। 

 

फिलहाल सोनम वांगचुक की हालत स्थिर है और सभी अन्य स्वास्थ्य मानक सामान्य हैं, वह पूरी तरह होश में हैं। हालांकि, शरीर में पानी की कमी के कारण उनके इलेक्ट्रोलाइट स्तर पर असर के संकेत मिले हैं। इसलिए उन्हें कुछ समय तक अस्पताल में निगरानी में रखा जाएगा। इसके बाद दोबारा जांच की जाएगी। 

 

इससे पहले पानी-नमक पर रहने से उनके शरीर में ग्लूकोज का स्तर काफी कम हो गया था। इसके कारण उनका ब्लड शुगर लेवल 66-80 mg/dL के स्तर तक गिर गया था, 9 किलो से ज्यादा वजन घट गया था। 

भूख हड़ताल को लेकर डॉक्टर ने क्या बताया?

डॉ. पंकज खटाना, वरिष्ठ डॉक्टर (इंटरनल मेडिसिन), मारेंगो एशिया हॉस्पिटल, गुरुग्राम:-

भूख हड़ताल का शरीर पर गहरा असर पड़ता है। लंबे समय तक भोजन न मिलने पर शरीर अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए पहले जमा ऊर्जा का इस्तेमाल करता है और बाद में शरीर के ऊतकों को भी तोड़ना शुरू कर देता है। इसका असर व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, शरीर में मौजूद पोषण, बीमारियों और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करता है। 

उन्होंने यह भी बताया अगर कोई व्यक्ति केवल पानी और नमक के सहारे भूख हड़ताल करता है तो शरीर में पानी की कमी कुछ हद तक रोकी जा सकती है। लेकिन उसे ऊर्जा, प्रोटीन, विटामिन और अन्य जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते। इससे शरीर धीरे-धीरे कमजोर होता रहता है। 

 

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भूख हड़ताल से शरीर पर असर 

डॉक्टर बताते हैं, इस स्थिति में पहले 24 घंटे तक शरीर आखिरी बार खाए गए खाने और लिवर में जमा ग्लाइकोजन (कार्बोहाइड्रेट) से ऊर्जा लेता है। इस दौरान भूख, सिरदर्द, थकान और ब्लड शुगर कम होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 2 से 3 दिन बाद, ग्लाइकोजन खत्म होने पर शरीर फैट जलाकर ऊर्जा बनाना शुरू करता है। इस स्थिति में वजन घटना शुरू हो जाता है, कमजोरी और चक्कर आ सकते हैं। 

 

4 से 8 दिन बाद शरीर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत फैट और कीटोन बन जाते हैं। इससे ब्लड प्रेशर कम हो सकता है और शरीर की ताकत घटने लगती है। 8 से 12 दिन बाद मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं और जरूरी मिनरल्स की कमी हो सकती है। 12 दिन के बाद दिल, किडनी और अन्य अंगों पर असर पड़ सकता है। इस स्थिति में डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर और दिल की धड़कन अनियमित होने का खतरा बढ़ जाता है।

लंबे समय तक भूख हड़ताल के बाद खाना खतरनाक

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (NEJM) की स्टडी के मुताबिक, लंबे समय तक भूखे रहने के बाद अचानक खाना खतरनाक हो सकता है। इस स्थिति में रीफीडिंग सिंड्रोम का खतरा बढ़ जाता है। दिल, दिमाग और अन्य अंगों पर गंभीर असर पड़ सकता है। इसलिए लंबे उपवास के बाद खाना हमेशा डॉक्टरों की निगरानी में धीरे-धीरे शुरू करने की सलाह दी जा जाती है। 

डॉक्टर खटाना के मुताबिक, 'लंबे समय तक खाना न मिलने से शरीर की ऊर्जा, मांसपेशियां और महत्वपूर्ण अंग प्रभावित होने लगते हैं। इसलिए ऐसे मामलों में नियमित मेडिकल निगरानी बेहद जरूरी होती है।'

डिस्क्लेमर: यह लेख केवल स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। लंबे समय तक भूख हड़ताल या उपवास से का असर शरीर की स्थिति, वजन, स्वास्थ्य, पानी की उपलब्धता और मेडिकल जटिलताओं पर निर्भर करता है।