स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए स्टेम सेल थेरेपी के इस्तेमाल को लेकर एडवाइजरी जारी की है। एडवाइजरी में बताया गया है कि स्टेम सेल का इस्तेमाल केवल मंजूरी प्राप्त स्थितियोंं के लिए ही नियमित स्टैंडर्ड क्लिनिकल केयर के तौर पर दिया जा सकता है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया है।

 

यह निर्देश उन सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए जारी किया गया है जिन्होंने क्लिनिकल एस्टेब्लिशमेंट्स ( रजिस्ट्रेशन एंड रेगुलेशन) एक्ट 2010 को अपनाया है। यह नियम यश चैरिटेबल ट्रस्ट और अन्य बनाम भारत संघ और अन्य मामल में 30 जनवरी 2026 को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आया है।

 

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ऑटिज्म के इलाज के लिए नहीं होगा स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल

प्रेस रिलीज के मुताबिक स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल केवल उन्हीं बीमारियों में किया जा सकता है जिन्हें स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने मंजूरी दी है। ऑटिज्म स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (ASD) के लिए किसी भी तरह की स्टेम सेल थेरेपी अभी सिर्फ स्वीकृति क्लिनिकल ट्रायल के तहत ही दी जा सकती है। इसका साफ मतलब है कि ऑटिज्म के मरीजों को अस्पताल या क्लिनिक में सामान्य इलाज की तरह स्टेम सेल थेरेपी नहीं दी जा सकती है।

 

 

इसके लिए इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और डिपार्टमेंट ऑफ बायोटेक्नोलॉजी (DBT) की 2017 की नेशनल गाइडलाइन फॉर स्टेम सेल रिसर्च और सरकार के अन्य नियमों का पालन करना जरूरी है।

क्या होता है स्टेम सेल थेरेपी?

स्टेम सेल थेरेपी एक मेडिकल तकनीक है जिसमें शरीर की खास तरह की सेल्स (कोशिकाओं) का उपयोग करके खराब या बीमार सेल्स को ठीक करने की कोशिश की जाती है। ये शरीर की मास्टर सेल्स होती हैं। ये शरीर में नए सेल्स को बनाने का काम करते हैं। स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल ब्लड कैंसर, लिम्फोमा, मल्टीपल मायलोमा और बौन मैरो से जुड़ी बीमारियों को ठीक करने के लिए किया जाता है।

 

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इन बीमारियों के लिए स्टेम सेल थेरेपी को मिली मंजूरी

 

डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ रिसर्च (DHR) के मुताबिक इन बीमारियों के इलाज के लिए स्टेम सेल थेरेपी का इस्तेमाल किया किया जा सकता है। इस लिस्ट में 32 बीमारियों का नाम शामिल है।

 

एडल्ट में स्टेम सेल थेरेपी-

 

एक्यूट माइलॉयड ल्यूकेमिया, क्रोनिक माइलॉयड ल्यूकेमिया,  माइलोफ्राइब्रोसिस, माइलोडिस्पलास्टिक सिंड्रोम, क्रोनिक लिम्फोसाइटिक ल्यूकेमिया,  डिफ्यूज लार्ज B सेल लिम्फोमा,पेरिफेरल T सेल लिम्फोमा, हॉजकिन लिम्फोमा, एक्वायर्ड सीवियर एप्लास्टिक एनीमिया जैसी बीमारियों के इलाज के लिए किया जा सकता है।