हम में से ज्यादातर लोगों की आदत होती है कि हल्का सा बुखार या जुकाम होने पर तुरंत एंटीबायोटिक ले लेते हैं। इसके लिए हम डॉक्टर से पूछते भी नहीं हैं। उस समय शरीर को आराम मिल जाता है। क्या आप जानते हैं कि हर छोटी छोटी बीमारी पर एंटीबायोटिक लेने की आदत जानलेवा हो सकती है। इसकी वजह से शरीर में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा बढ़ सकता है। 

 

हमने इस बार में गुरुग्राम के Neuberg Ehrlich Diagnostics के माइक्रोबायोलॉजिस्ट डॉ. विनोदिनी के बात की। उनसे जाना कि एंटीबायोटिक लेना कितना खतरनाक हो सकता है?

 

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एंटीबायोटिक लेना कितना नुकसानदायक हो सकता है?

एंटीबायोटिक हर तरह के बुखार या संक्रमण का इलाज नहीं है। ज्यादातर हल्के वायरल संक्रमण, जैसे सर्दी-जुकाम और फ्लू में एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती। बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से शरीर में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बिगड़ सकता है और एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस बढ़ सकता है। इससे भविष्य में होने वाले संक्रमण का इलाज मुश्किल हो सकता है।

इसलिए एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर की सलाह पर, सही मात्रा और बताई गई अवधि तक ही लेनी चाहिए।

क्या एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस कुछ मामलों में जानलेवा हो सकता है?

हां, कुछ मामलों में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस जानलेवा हो सकता है। ऐसा तब होता है जब बैक्टीरिया उन दवाओं पर असर करना बंद कर देते हैं, जो आमतौर पर संक्रमण को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।

ऐसी स्थिति में संक्रमण लंबे समय तक बना रह सकता है, गंभीर हो सकता है और खून में फैलकर *सेप्सिस* जैसी गंभीर समस्या पैदा कर सकता है। खासकर कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले मरीजों में इलाज के विकल्प सीमित हो सकते हैं।

 

समय पर जांच, डॉक्टर की सलाह के अनुसार एंटीबायोटिक का सही इस्तेमाल और दवा का पूरा कोर्स करना एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस को रोकने और इलाज के बेहतर परिणाम के लिए जरूरी है।

ICMR की स्टडी ने बढ़ाई चिंता

हाल ही में ICMR की स्टडी के मुताबिक जो बैक्टीरिया सामान्य दवाओं या एंटीबायोटिक्स से नहीं मरते उनसे मरीज की जान को ज्यादा खतरा रहता है।  इस रिपोर्ट में 2022 से 2025 के बीच अस्पताल में भर्ती हुए 1.6 लाख मरीजों के आंकड़ों का विशलेषण किया गया। इनमें से 26, 213 लोग ई कोलाई जैसे चार ग्राम नेगेटिव बैक्टीरिया से संक्रिमत थे। इससे भी चिंता की बात यह है कि इनमें से 61.1% इन्फेक्शन कार्बापेनम रेजिस्टेंट थे।

 

कार्बापेनम उन एंटीबायोटिक को कहा जाता है जिन्हें गंभीर संक्रमण के इलाज का आखिरी विकल्प माना जाता था। अब इनका इस्तेमाल इतना बढ़ गया है कि बैक्टीरिया इनके खिलाफ रेजिस्टेंट हो गए हैं जिसकी वजह से दवाएं काम नहीं कर रही हैं। इन लोगों में मृत्यु दर भी ज्यादा था। 

 

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एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का इलाज महंगा क्यों हो जाता है?

एंटीबायोटिक-रेजिस्टेंट संक्रमण के इलाज में खर्च बढ़ सकता है, क्योंकि ऐसे मामलों में ज्यादा मजबूत या महंगी दवाओं की जरूरत पड़ सकती है। मरीज को लंबे समय तक अस्पताल में रहना पड़ सकता है और अतिरिक्त जांच और लगातार निगरानी की जरूरत हो सकती है।

 

कुछ मामलों में नस के जरिए एंटीबायोटिक देने या ICU में इलाज की भी जरूरत पड़ सकती है। इसके अलावा, मरीज को ठीक होने में ज्यादा समय लग सकता है और काम से भी लंबे समय तक दूर रहना पड़ सकता है। इसलिए बिना जरूरत एंटीबायोटिक लेने से बचना केवल स्वास्थ्य के लिए ही नहीं, बल्कि मरीज और स्वास्थ्य व्यवस्था पर पड़ने वाले आर्थिक बोझ को कम करने के लिए भी जरूरी है।

कोई भी दवा लेने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?

  • कोई भी दवा लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह किस समस्या के लिए है, उसकी सही मात्रा कितनी है, कितने समय तक लेनी है और उसके संभावित साइड इफेक्ट क्या हो सकते हैं।
  • खुद से दवा लेने से बचना चाहिए, खासकर एंटीबायोटिक, स्टेरॉयड या डॉक्टर की पर्ची पर मिलने वाली दवाएं। अगर आप पहले से कोई दवा या सप्लीमेंट ले रहे हैं, तो उनके साथ होने वाले संभावित रिएक्शन के बारे में डॉक्टर को बताएं। अपनी किसी एलर्जी या पहले से मौजूद स्वास्थ्य समस्या के बारे में भी डॉक्टर को जरूर जानकारी दें।
  • अगर लक्षण बने रहते हैं या ज्यादा गंभीर हो जाते हैं, तो खुद से दवा की मात्रा बढ़ाने या इलाज बदलने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।