उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में उनकी मां सोनी देवी और पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी के लिए इंडिया गेट से लेकर राजघाट तक, सामाजिक कार्यकर्ता योगिता भयाना हमेशा साथ नजर आ रहीं हैं। वह पुलिस से भिड़ती हैं, कानून प्रक्रियाओं को देख रहीं हैं, अंकिता भंडारी केस की निष्पक्ष जांच के लिए लगातार दबाव बना रही हैं। पुलिस उन्हें भी कई बार अलग-अलग जगहों से प्रदर्शन पर बैठने को दौरान हटा चुकी है। वह भी मांग कर रही हैं कि दुष्यंत कुमार गौतम अगर अंकिता भंडारी हत्याकांड में संदिग्ध हैं तो उन्होंने केंद्र सरकार ने संवैधानिक संरक्षण राज्यपाल बनाकर क्यों दिया। 
 
बुधवार को दिल्ली में जब वीरेंद्र सिंह भंडारी और सोनी देवी राजघाट पर धरने पर बैठीं थीं तो वहां भी योगिता भयाना मौजूद थीं। उत्तराखंड में एक तरफ कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल बार-बार अंकिता भंडारी केस पर सरकार को घेर रहे हैं, वहीं दिल्ली में योगिता भयाना। वह बलात्कार पीड़ित महिलाओं को इंसाफ दिलाने के लिए सड़क से लेकर अदालतों तक में कानूनी और राजनीतिक लड़ाई लड़ती हैं। 

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कौन हैं योगिता भयाना?

योगिता भयाना सामाजिक कार्यकर्ता हैं और PARI फाउंडेशन की संस्थापक हैं। वह महिलाओं और बच्चों के अधिकारों के लिए काम करती हैं। साल 2007 से ही वह मानवाधिकार कार्यकर्ता के तौर पर सक्रिय हैं। निर्भया कांड के बाद उन्होंने जुवेनाइल जस्टिस कानूनों में बदलाव की मांग में अहम भूमिका निभाई। वह देश में यौन हिंसा के खिलाफ जमीनी स्तर पर लड़ाई लड़ती हैं। 

योगिता भयाना के मुताबिक निर्भया का केस उठाते समय उनके पास बलात्कार और बर्बरता के 8-9 और मामले थे। वह अपना पूरा दिन अदालतों में एक सुनवाई से दूसरी सुनवाई तक भागते हुए बिताती थीं। उन्होंने कहा कि न्याय की गारंटी नहीं दी जा सकती, लेकिन पीड़ितों के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया जा सकता है। 

योगिता भयाना यौन हिंसा के 1,000 से ज्यादा मामलों में लोगों की मदद कर रही है। राष्ट्रीय महिला आयोग ने उनके योगदान के लिए उन्हें सम्मानित किया है। महामारी के दौरान उन्होंने राहत कार्यों का नेतृत्व भी किया। वे टीवी और सोशल मीडिया पर भी सक्रिय हैं।

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अंकिता भंडारी केस में अब तक क्या हुआ है?

अंकिता भंडारी के अभिभावक दिल्ली में धरना दे रहे हैं। अंकिता भंडारी के अभिभावक, दुष्यत गौतम को राज्यपाल बनाने के खिलाफ जगह-जगह प्रदर्शन कर रहे हैं। कभी वे इंडिया गेट पर दिखते हैं, कभी राजघाट पर। उनके साथ हर जगह योगिता भयाना भी नजर आती हैं। उनकी एक ही मांग है कि किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को संवैधानिक पद पर नहीं होना चाहिए, केस की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। 

अब तक इस केस में क्या-क्या हुआ है

इस केस में 3 आरोपी हैं। पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता। 23 और 24 सितंबर 2022 को रिजॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, मैनेजर सौरभ भास्कर और असिस्टेंट मैनेजर अंकित गुप्ता को गिरफ्तार किया गया। पुलकित आर्य उस समय के BJP नेता विनोद आर्य का बेटा है। हत्या की बात सामने आने के बाद विनोद आर्य को पार्टी से निकाल दिया गया। आरोपियों ने अंकिता को नहर में धकेलने की बात कबूल की थी। मामले को लेकर उत्तराखंड में बड़े स्तर पर प्रदर्शन हुए।

19 दिसंबर 2022 को उत्तराखंड पुलिस ने करीब 500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। अंकिता पर रिजॉर्ट में एक VIP को सेक्सुअल फेवर देने का आरोप लगाया गया था। इनकार करने पर उनकी हत्या कर दी गई। आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 354, 302, 201 और 120B के साथ अनैतिक व्यापार (रोकथाम) अधिनियम की धारा 3(1) में केस दर्ज हुआ।

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क्या सजा दी गई है?

18 मार्च 2023 को कोटद्वार की सत्र अदालत ने तीनों के खिलाफ आरोप तय किए। पुलकित पर हत्या (302), सबूत मिटाने (201) और छेड़छाड़ (354A) की धाराओं के साथ अनैतिक व्यापार अधिनियम लगा। सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता पर धारा 302, 201 और अनैतिक व्यापार अधिनियम के तहत आरोप तय हुए।

19 मई 2025 को कोटद्वार कोर्ट में 47 अभियोजन गवाहों की गवाही के बाद सुनवाई पूरी हुई। 29 और 30 मई 2025 को कोर्ट ने तीनों को दोषी करार दिया। पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता को कठोर आजीवन कारावास की सजा मिली। 

किस बात को लेकर अब तक धरना दे रहा अंकिता का परिवार?

कई रिपोर्ट में दावा किया गया कि जिस 'VIP' के लिए अंकिता भंडारी पर दबाव बनाया जा रहा था, वह दुष्यंत गौतम हो सकते हैं। द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक तत्कालीन डीआईजी पी. रेणुका देवी ने बताया था कि रिजॉर्ट में VIP मेहमानों के लिए एक 'प्रेसिडेंशियल सुइट' था। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि व्हाट्सऐप चैट से पता चलता है कि पुलकित आर्य, अंकिता पर देह व्यापार के लिए दबाव डाल रहा था। इस खुलासे के बाद स्थानीय लोगों में गुस्सा फैला। लोगों ने रिजॉर्ट में तोड़फोड़ की। इसके बाद प्रशासन ने रिजॉर्ट के कुछ हिस्से गिरा दिए। इस कार्रवाई को जल्दबाजी बताया गया। आलोचकों का कहना है कि इससे मामले के अहम सबूत नष्ट हो गए।

कैसे दुष्यंत गौतम का नाम सामने आया?

जनवरी 2026 में द हिंदू की रिपोर्ट में बताया गया कि अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने आरोप लगाया था कि VIP राज्य के एक वरिष्ठ BJP नेता थे। उर्मिला BJP के पूर्व विधायक सुरेश राठौर की साथी हैं। 4 से 6 जनवरी 2026 के बीच स्थानीय लोगों और सत्तारूढ़ BJP के कुछ सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में CBI जांच की मांग की थी। 6 जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि आगे की जांच कराई जाएगी। 30 जून 2026 को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों को अंतरिम राहत, सजा के निलंबन और जमानत देने से इनकार कर दिया।

अंकिता के परिवार और उनके लिए इंसाफ मांग रहे लोगों का कहना है कि 'VIP' के तौर पर BJP नेता दुष्यंत कुमार गौतम का नाम बार-बार लिया है। दुष्यंत गौतम पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव हैं और उत्तराखंड के प्रभारी रह चुके हैं। अब वह  उन्होंने आरोपों को खारिज किया है और आरोप लगाने वालों के खिलाफ मानहानि की कार्यवाही शुरू की है। 12 अक्टूबर 2026 को उन्हें सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किया गया।

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योगिता भयाना के लिए नाक की लड़ाई क्यों है यह केस?

अंकिता के माता-पिता की मांग है कि दुष्यंत कुमार गौतम को राज्यपाल के पद से हटा दिया जाए। कांग्रेस का आरोप है कि नियुक्ति दुष्यंत गौतम को बचाने के लिए की गई है। पार्टी का तर्क है कि पद पर रहते हुए राज्यपाल पर आपराधिक कार्यवाही नहीं हो सकती।

मामले के मुख्य आरोपी पुलकित आर्य और उसके दो साथियों को अदालत से उम्रकैद की सजा मिलने के बावजूद, अंकिता के परिजन और योगिता भयाना कथित VIP एंगल की जांच को लेकर लगातार मोर्चा खोले हुए हैं। पीड़ित परिवार और योगिता भयाना ने हाल ही में दिल्ली के इंडिया गेट और राजघाट पर विरोध-प्रदर्शन कर इस मामले को एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा में ला दिया है। 

उनकी मांग है कि घटना से जुड़े उस कथित 'अज्ञात VIP' की भूमिका की गहन जांच हो, जिसका जिक्र घटना के समय से ही सामने आता रहा है। इस संबंध में सोशल मीडिया पर सामने आए कुछ ऑडियो और वीडियो के आधार पर जांच एजेंसियां पड़ताल कर रही हैं। योगिता भयाना का कहना है कि जब तक पूरे षड्यंत्र का पर्दाफाश नहीं होता, उनकी कानूनी और सामाजिक लड़ाई जारी रहेगी।