उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक 4 साल की बच्ची के साथ रेप की घटना सामने आई थी। इस मामले में पुलिस प्रशासन और अस्पताल पर भी लापरवाही के आरोप लगे थे। अब बच्ची के पिता ने आरोप लगाया है कि अगर अस्पताल समय पर इलाज करता, तो उनकी बेटी शायद बच सकती थी। पिता की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में है और कोर्ट ने पुलिस प्रशासन और अस्पताल पर सवाल उठाए थे। इसके साथ ही अस्पताल पर जुर्माना लगाने की बात भी कही है। 

 

पिता ने बताया कि उनकी याचिका पर 16 जून को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। उन्होंने कहा कि उनकी बेटी घायल थी और काफी खून बह रहा था, लेकिन जिन दो अस्पतालों में वह उसे लेकर गए, वहां इलाज नहीं किया गया। समय से इलाज ना मिल पाने के कारण चार साल की मासूम की जान चली गई थी। बच्ची के पिता का कहना है कि इस घटना से उनका पूरे सिस्टम पर भरोसा टूट गया।

 

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क्या है पूरा मामला?

यह घटना 16 मार्च 2026 की है। परिवार के अनुसार, बच्ची उस दिन शाम करीब 6 बजे नंदग्राम स्थित घर के बाहर खेल रही थी। आरोप है कि पड़ोस में रहने वाला एक व्यक्ति उसे अपने साथ बाजार ले गया, जहां उसने उसे खाने की चीजें दिलाईं और फिर वहां से लेकर चला गया। बताया जा रहा है कि आरोपी बच्ची को सुनसान और झाड़ियों वाले इलाके में ले गया। वहां उसके साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया और फिर उसके सिर पर ईंट से हमला किया गया। इसके बाद बच्ची कई घंटों तक वहीं घायल हालत में पड़ी रही। इसके बाद परिवार को बच्ची बेहोश तथा खून से लथपथ अवस्था में मिली थी। 

अस्पतालों पर लगे आरोप

पिता के अनुसार, वह बच्ची को पहले खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर सेंटर और फिर सेंट जोसेफ अस्पताल लेकर गए थे। पिता ने बताया कि  बच्ची के कपड़े नहीं थे और काफी खून बह रहा था। उन्होंने बच्ची को गोद में लेकर मोटरसाइकिल पर बैठाया, जबकि एक दोस्त बाइक चला रहा था और बाकी लोग रास्ता खाली कराने में मदद कर रहे थे। सबसे पहले वे खजान सिंह मानवी हेल्थ केयर गए। पिता का कहना है कि वहां डॉक्टरों ने कहा कि उनके पास इलाज की सुविधा नहीं है और उन्हें बड़े अस्पताल जाना चाहिए। पिता ने बताया कि उन्होंने हाथ जोड़कर इलाज की गुहार लगाई, लेकिन अस्पताल ने एंबुलेंस तक की व्यवस्था नहीं की।

 

इसके बाद वे सेंट जोसेफ अस्पताल गए। पिता के अनुसार, वहां डॉक्टरों ने कहा कि यह मेडिको-लीगल मामला है और बच्ची को सरकारी अस्पताल ले जाना होगा। इसके बाद वह बच्ची को सरकारी अस्पताल लेकर गए। बच्ची के पापा ने कहा, 'हमारी बच्ची मिलने के बाद करीब दो घंटे तक जिंदा थी। दो प्राइवेट अस्पतालों में जाने के बाद बच्ची को सरकारी अस्पताल ले जाया गया, लेकिन रास्ते में उसकी मौत हो गई।'

जांच में दोषी पाए गए अस्पताल

बच्ची की मौत के बाद पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि बच्ची का मर्डर बेरहमी से किया गया है। बाद में मामले की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बनी एसआईटी ने  भी पिता के आरोपों की जांच की। जांच में यह बात सामने आई कि दोनों प्राइवेट अस्पतालों ने गंभीर हालत में लाई गई बच्ची को तुरंत इलाज नहीं दिया। 

 

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अस्पताल को देना होगा मुआवजा

पिता ने अस्पतालों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।  की बेंच ने सुनवाई के दौरान एक अस्पताल के वकील से पूछा कि वह बच्ची के माता-पिता को अपनी ओर से कितना मुआवजा देने को तैयार है। कोर्ट ने कहा कि अगर अस्पताल खुद से मुआवजा तय नहीं करता है, तो कोर्ट खुद तय करेगा। कोर्ट ने इस मामले में अस्पतालों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया है। वहीं, पीड़ित पक्ष के वकील ने दोनों अस्पातलों पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अगर बच्ची को समय रहते इलाज दिया जाता तो बच्ची बच सकती थी।