दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) के पार्कों में सुरक्षा इंतजाम भगवान भरोसे है। प्राधिकरण के अपने ऑडिट में पता चला कि उसके 736 पार्कों में से सिर्फ 16 में CCTV कैमरे चल रहे हैं। सिर्फ 2 प्रतिशत पार्कों में निगरानी की व्यवस्था है, कैमरे लगे हैं। यह ऑडिट उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू के आदेश पर हुआ।
DDA के एक पार्क में पिछले महीने 17 साल की एक लड़की से सामूहिक बलात्कार हुआ था। उसके बाद यह ऑडिट कराया गया। ऑडिट के बाद DDA ने अपने 190 पार्कों को हाई रिस्क श्रेणी में रखा है। यह कुल पार्कों का करीब एक चौथाई है। इसके अलावा 258 पार्क मीडियम रिस्क और 288 पार्क लो रिस्क श्रेणी में रखे गए हैं।
यह भी पढ़ें: केरल में लॉज से महिला का अपहरण, फर्जी पुलिस बनकर पहुंचे लोगों ने किया गैंगरेप
किन पार्कों को माना गया है हाई रिस्क?
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक हाई रिस्क श्रेणी में वे पार्क आते हैं, जहां रात में घुसपैठ होती है, स्थानीय लोग बवाल करते हैं, अतिक्रमण और अपराधियों के अड्डे वाला इलाका, घना जंगल या नशे से जुड़ी गतिविधियां पाई जाती हैं। इस लिस्ट में आस्था कुंज पार्क भी है, जहां 21 सितंबर को लड़की के साथ वारदात हुई थी।
हस्तसाल का ग्रीन एरिया, डिस्ट्रिक्ट पार्क हौज खास, मां आनंदमयी मार्ग का ग्रीन एरिया, संजय लेक और जहांपनाह सिटी फॉरेस्ट भी इसमें हैं। जंगल वाले इलाके और यमुना के बाढ़ क्षेत्र के बायोडायवर्सिटी पार्क भी इसी लिस्ट में हैं।
यह भी पढ़ें: सीनियर IAS के बेटे पर संगीन आरोप, युवती से रेप की कोशिश, मां ने बयां किया दर्द
खामियां जानकार भी नहीं हो रही सुधार की कोशिश
इंडियन एक्सप्रेस ने इससे पहले खबर दी थी कि 142 एकड़ के आस्था कुंज पार्क में चालू लैंप न होने से घना अंधेरा रहता है। वहां CCTV कैमरे भी नहीं थे। रिपोर्ट में यह भी बताया गया था कि डिस्ट्रिक्ट पार्क हौज खास और उत्तरी रिज के पास बोंटा पार्क समेत कई पार्कों में रात में रोशनी का ठीक इंतजाम नहीं है।
इन क्षेत्रों में क्या हो रहा है काम?
DDA ने एक बयान में कहा कि हाई रिस्क पार्कों पर 'तत्काल आधार पर' काम किया जा रहा है। ऑडिट में और भी कमियां मिली हैं। DDA ने 323 और पार्कों की पहचान की है, जहां नए CCTV लगाने की जरूरत है। रोशनी के मामले में 520 पार्कों में अतिरिक्त इंतजाम की जरूरत पाई गई।
231 पार्क ऐसे हैं, जहां तत्काल सुधार की जरूरत है। 163 पार्कों में गेट और एंट्री से जुड़ी खामियां थीं। कई गेट ऐसे हैं, जहां ताला ही नहीं लगता है। 399 पार्कों में चारदीवारी या बाउंड्री से जुड़ी खामियां मिलीं हैं। DDA के मुताबिक इनमें से 233 पार्कों में गायब ग्रिल का काम ठीक कर दिया गया है।
गश्त और बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू
सुधार के उपायों के बारे में DDA ने बताया कि राजधानी के 245 बड़े पार्कों में रात की गश्त हो रही है। एक अधिकारी के मुताबिक बड़े पार्कों में तेज कवरेज के लिए बाइक गश्त दी गई है। जरूरत वाली जगहों पर हूटर भी लगाए गए हैं, ताकि घटना पर जल्द कार्रवाई की जा सके। गश्त, गार्डों के प्रदर्शन, सुपरवाइजर की जवाबदेही, हाजिरी, रिपोर्टिंग और पुलिस से तालमेल के लिए स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर यानी SOP तैयार किए जा रहे हैं।
अब किस सुधार की हो रही है कवायद?
DDA ने 602 पार्कों में सुरक्षा गार्डों की बायोमेट्रिक हाजिरी शुरू कर दी है। इसे सभी पार्कों तक बढ़ाने की बात कही गई है। इसके अलावा वरिष्ठ अधिकारियों की अगुवाई में रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन यानी RWA के साथ बैठकें चल रही हैं। जिन पार्कों में खामियां हैं, उन्हें जल्द से जल्द सुधारा जाएगा।
