भारत के 8 युवाओं को 2026 के QECT 100 यंग लीडर्स अवॉर्ड्स में जगह मिली है। इन युवाओं को अलग-अलग क्षेत्रों में किए जा रहे काम के लिए पहचान मिली है। इनमें शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण, स्वास्थ्य, कृषि और समाज के अलग-अलग वर्गों के लिए काम करने वाले युवा शामिल हैं। इस साल कॉमनवेल्थ देशों से चुने गए 100 युवाओं में भारत के सबसे ज्यादा 8 युवा शामिल हैं।

 

ब्रिटिश हाई कमीशन के मुताबिक इन अवॉर्ड्स की घोषणा 9 सितंबर को नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम में की गई। क्वीन एलिजाबेथ द्वितीय कॉमनवेल्थ ट्रस्ट (QECT) की ओर से हर साल ऐसे युवाओं को चुना जाता है जो अपने काम के जरिए समाज में बदलाव लाने की कोशिश कर रहे हैं। यह अवॉर्ड 18 से 35 साल की उम्र के युवाओं को मिलता है।

 

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भारत के ये 8 युवा कौन हैं?

आश्रया सेठ: आश्रया सेठ Impact91 और Happy Periods की फाउंडर हैं। वह पीरियड्स से जुड़ी जानकारी और सुविधाओं को आसान बनाने के लिए काम करती हैं। उन्होंने कम कीमत में सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने वाली मशीन बनाई है। उनके काम से करीब 10 लाख ऐसी महिलाओं और लड़कियों तक मदद पहुंची है, जिन्हें इन सुविधाओं की जरूरत थी। वह लड़कियों की पढ़ाई और टेक्नोलॉजी से जुड़ी जानकारी के लिए भी काम करती हैं।

 

अभिषेक गुप्ता: अभिषेक गुप्ता NavGurukul के पार्टनर और एक्टिंग CEO हैं। उनका काम खास तौर पर उन महिलाओं को सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की ट्रेनिंग देना है जिन्हें रोजगार के कम मौके मिलते हैं। उनके प्रोग्राम से 300 से ज्यादा महिलाओं को ट्रेनिंग मिली है। इनमें करीब 70 फीसदी महिलाएं आगे चलकर अपने संस्थान से जुड़ी लीडर बनीं। इस काम का मकसद महिलाओं को रोजगार और आर्थिक रूप से मजबूत बनाना है।

 

गिरीश मेहता: गिरीश मेहता Care Leavers’ Inner Circle (CLiC) के फाउंडर हैं। यह संस्था उन युवाओं की मदद करती है जो बच्चों के केयर सेंटर से बाहर आने के बाद अपनी नई जिंदगी शुरू करते हैं। उन्हें पढ़ाई, नौकरी, घर, कानूनी मदद और सरकारी सुविधाओं से जोड़ने का काम किया जाता है। अब तक 3,000 से ज्यादा युवाओं को इससे मदद मिल चुकी है। इसके लिए 24 घंटे हेल्पलाइन और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी चलाया जाता है।

 

ईशा जौहर: ईशा जौहर Project Jazba की को-फाउंडर हैं। वह जम्मू-कश्मीर में महिलाओं और युवाओं की पढ़ाई, नौकरी और अपना काम शुरू करने में मदद करती हैं। उनके प्रोजेक्ट के जरिए 200 से ज्यादा महिलाओं और युवाओं को अपना काम शुरू करने में मदद मिली है। उनका फोकस लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने पर है।

 

पल्लवी केजरीवाल: पल्लवी केजरीवाल The Right Pitch की फाउंडर हैं। वह ऐसे बच्चों के लिए काम करती हैं, जिन्हें पढ़ाई और दूसरी सुविधाओं के ज्यादा मौके नहीं मिलते। उनके प्रोजेक्ट में पढ़ाई के साथ खेल और कला जैसी एक्टिविटीज भी कराई जाती हैं। इससे बच्चों का आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें आगे बढ़ने में मदद मिलती है। उनके काम से बड़ी संख्या में बच्चों को फायदा मिला है।

 

समित साकिब गोरे: समित साकिब गोरे Vision Friend Eyewear और VCU Series के को-फाउंडर हैं। वह कम कीमत में आंखों की जांच और इलाज की सुविधा देने का काम करते हैं। उनके प्रोजेक्ट के जरिए अब तक 27 लाख से ज्यादा लोगों की मुफ्त आंखों की जांच हो चुकी है। 16 लाख से ज्यादा लोगों को चश्मे दिए गए हैं और 63 हजार से ज्यादा लोगों की मोतियाबिंद की सर्जरी कराई गई है।

 

शक्ति बालासुब्रमण्यम यादव: शक्ति बालासुब्रमण्यम यादव Buy Food with Plastic India की फाउंडर हैं। उनका प्रोजेक्ट लोगों को प्लास्टिक कचरा जमा करने के बदले खाना उपलब्ध कराने पर काम करता है। इससे जरूरतमंद लोगों को खाना मिलता है और प्लास्टिक कचरे को कम करने में भी मदद मिलती है। उनके काम के जरिए 1 लाख से ज्यादा प्लास्टिक बोतलों को लैंडफिल में जाने से रोका गया है।

 

काव्या जैन: काव्या जैन Sensei की फाउंडर हैं। यह यूके की एक सोशल एंटरप्राइज है जो नेत्रहीन और न्यूरोडाइवर्जेंट लोगों के लिए आसानी से समझ आने वाले रास्ते और संकेत बनाने पर काम करती है। इसके जरिए लोगों के लिए पब्लिक जगहों पर आना-जाना आसान बनाने की कोशिश की जाती है। 

 

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अक्टूबर में लंदन जा सकते हैं कुछ युवा

इस अवॉर्ड के जरिए चुने गए युवाओं को अपने काम को आगे बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग और दूसरी मदद दी जाएगी। उन्हें दूसरे देशों के युवाओं से जुड़ने का मौका भी मिलेगा। इसके अलावा अपने प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने के लिए वे माइक्रोग्रांट के लिए आवेदन कर सकते हैं। हालांकि हर अवॉर्ड पाने वाले को फंड मिलना जरूरी नहीं है।

 

QECT 100 यंग लीडर्स अवॉर्ड्स में चुने गए कुछ भारतीय युवा अक्टूबर में लंदन में होने वाले अवॉर्ड कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं। इस दौरान उन्हें अपने काम को आगे बढ़ाने और दूसरे देशों के युवाओं से मिलने का मौका मिलेगा। इस अवॉर्ड का मकसद कॉमनवेल्थ देशों के ऐसे युवाओं को एक साथ लाना है जो समाज के लिए अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं।

 

 साल 2026 में यह कार्यक्रम क्वीन एलिजाबेथ II की 100वीं जयंती के मौके से भी जुड़ा है। इस साल भारत से 8 युवाओं को चुना गया है। ये सभी युवा अलग-अलग क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और अपने काम के जरिए लोगों की मदद कर रहे हैं।