उत्तर प्रदेश में गौतमबुद्ध नगर (नोएडा) की जिलाधिकारी (DM) मेधा रूपम और प्रदेश सरकार की ओर से दाखिल विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर बुधवार यानी 23 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट (SC) में सुनवाई हुई। जज सतीश चंद्र शर्मा और जज एनके सिंह की पीठ ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक आदेश पर रोक लगा दी। इसमें एक स्टूडेंट की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत हिरासत को अवैध ठहराया गया था। सुनवाई के बीच एक नया विवाद खड़ा हो गया है। विवाद कोर्ट के रोस्टर पर और याचिका की लिस्टिंग पर हो गया है। इतना ही नहीं, इस केस की सुनवाई के दौरान माइक बंद किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
SC की बेंच ने हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाया। फैसले में हाई कोर्ट ने DM पर सख्त टिप्पणी करते हुए निर्देश दिया था कि छात्र को दिए जाने वाले 5 लाख रुपये के मुआवजे की रकम उनके निजी वेतन से काटी जाए। SC के इस नए स्टे के बाद फिलहाल DM को बड़ी राहत मिली है।
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विवाद क्या है?
DM मेधा और प्रदेश की याचिका पर सुनवाई हो रही थी। DM को दिए राहत के आदेश के बाद SC में केसों के आवंटन को लेकर एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। 'लाइव लॉ' की रिपोर्ट के अनुसार, 13 जुलाई 2026 से लागू सुप्रीम कोर्ट की नई रोस्टर व्यवस्था के तहत 'हेबियस कॉर्पस' और 'निवारक हिरासत' से जुड़े मामलों की सुनवाई का अधिकार केवल देश की शीर्ष 4 पीठों, मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस एमएम सुंदरेश की अध्यक्षता वाली बेंच को ही दिया गया है। इसके बावजूद यह मामला जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ के सामने लिस्टिंग कैसे हुआ? इसे लेकर सवाल किया जा रहा है।
पहले से लंबित मामला
इस विवाद की दूसरी बड़ी वजह यह है कि नोएडा श्रमिक आंदोलन से जुड़े अन्य मुख्य मामले पहले से ही जस्टिस बीवी नागरत्ना की पीठ के सामने लंबित हैं। याचिकाकर्ता केशव आनंद ने एक हेबियस कॉर्पस याचिका दायर कर अपने भाई आदित्य आनंद और रूपेश रॉय को अदालत में पेश करने और उनकी गिरफ्तारी को रद्द करने की मांग की थी।
इस पर मई महीने में जस्टिस नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने यूपी पुलिस को दोनों को कोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया था। इसके बाद में उनकी न्यायिक हिरासत बढ़ाई थी। सवाल यह है कि जब एक ही घटनाक्रम से जुड़ा मुख्य मामला पहले से एक तय बेंच के पास है तो उससे जुड़ी याचिका का दूसरी बेंच में कैसे पहुंच गया? यह साफ तौर पर प्रक्रियात्मक खामियों की ओर इशारा करता है।
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कौन हें मैधा रूपम?
गौरतलब है कि नोएडा डीएम मेधा रूपम सीनियर IAS अधिकारी हैं। वह भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की बेटी हैं। इस मामले में हाई कोर्ट के कड़े रुख और अब सुप्रीम कोर्ट में रोस्टर को लेकर उठे सवालों ने इस पूरे घटनाक्रम को प्रशासनिक और कानूनी रूप से बेहद संवेदनशील बना दिया है।
