केंद्र सरकार ने मोबाइल स्क्रीन प्रोटेक्टर यानी टेम्पर्ड ग्लास के लिए ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स (BIS) सर्टिफिकेशन अनिवार्य कर दिया है। इसका मतलब यह है कि अब अगर स्क्रीन गार्ड तय मानकों पर खरे नहीं उतरेंगे, तो उन्हें बाजार में बेचने से रोक दिया जाएगा।
इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने 21 सितंबर 2026 को नोटिफिकेशन जारी करते हुए स्क्रीन प्रोटेक्टर को 'अनिवार्य रजिस्ट्रेशन ऑर्डर 2021' की लिस्ट में शामिल कर दिया है। यह नियम 1 अप्रैल 2027 से लागू हो जाएगा। यानी अब कंपनियों के पास तैयारी के लिए केवल 6 महीने का वक्त बचा है।
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स्क्रीन गार्ड को लेकर क्या है BIS नियम?
नए नियम के तहत, अप्रैल 2027 के बाद सिर्फ वही टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर बिक सकेंगे जो भारतीय मानक पर खरे उतरेंगे। यानी BIS का स्टैंडर्ड मार्क पूरा करना होगा। इस स्टैंडर्ड में ग्लास की मजबूती, इम्पैक्ट रेजिस्टेंस, मोटाई, ऑप्टिकल क्लैरिटी और चिपकने की क्वालिटी जैसे पैमानों की जांच होगी। ऐसे में अब बिना BIS रजिस्ट्रेशन वाली फैक्ट्री से बना या इम्पोर्ट किया गया स्क्रीन गार्ड न बनाया जा सकेगा, न बेचा जा सकेगा।
भारत में कितना बड़ा है टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन का मार्केट?
कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स यानी CAIT 2025 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा स्मार्टफोन बाजार है, यहां हर साल करीब 40 करोड़ टेम्पर्ड ग्लास स्क्रीन प्रोटेक्टर बिकते हैं, जिनकी कुल रिटेल कीमत करीब 20,000 करोड़ रुपये आंकी गई है। इस भारी मांग का 90% से ज्यादा हिस्सा चीन और दूसरे एशियाई देशों से आने वाले सस्ते इम्पोर्ट से पूरा होता है, जबकि घरेलू हिस्सा बहुत छोटा है और गुणवत्ता में भी काफी अंतर देखने को मिलता है।
सरकार अब BIS सर्टिफिकेशन अनिवार्य करके इस बाजार को व्यवस्थित करने और घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देने की कोशिश कर रही है। इसी कड़ी में ऑप्टिमस इंफ्राकॉम जैसी कंपनी ने कॉर्निंग के साथ मिलकर नोएडा में अपना प्लांट लगाया है, जिससे उसे अकेले वित्त वर्ष 2027 तक 1,800-2,000 करोड़ रुपये का कारोबार मिलने की उम्मीद है।
क्या महंगे होंगे टेम्पर्ड ग्लास?
BIS सर्टिफिकेशन के लिए टेस्टिंग, लैब सर्टिफिकेशन, फैक्ट्री रजिस्ट्रेशन में कंपनियों की लागत बढ़ सकती है, यह लागत आम तौर पर प्रोडक्ट की कीमत में जुड़ जाती है। फिलहाल 90% से ज्यादा मांग सस्ते, बिना जांचे इम्पोर्ट से पूरी होती है। ऐसे में नए नियम के बाद इन सस्ते इम्पोर्ट पर रोक लगेगी, जिससे बाजार में सस्ते विकल्प कम हो सकते हैं।
वहीं मोबाइल डिवाइस बनाने वाली इंडस्ट्री बॉडी ICEA के चेयरमैन पंकज मोहिन्द्रू का कहना है कि यह अनिवार्य सर्टिफिकेशन घटिया प्रोडक्ट से लोगों को बचाएगा और घरेलू व वैश्विक कंपनियों के लिए बराबर मौका बनाएगा। इसका मकसद क्वालिटी सुधारना है, भले ही इसके लिए कीमत में कुछ बढ़त आए।
इसके अलावा, दूसरी ओर ऑप्टिमस इंफ्राकॉम जैसी कंपनियां अब भारत में ही बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू कर रही हैं, ऐसे में घरेलू उत्पादन बढ़ने से लंबे समय में कीमतें स्थिर या कम भी हो सकती हैं, क्योंकि इम्पोर्ट पर निर्भरता घटेगी।
