दुनिया के विकसित देशों में खेल और खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए शानदार स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर, खास ट्रेनिंग प्रोग्राम और कई तरह की योजनाएं चलाई जाती हैं। इन्हीं की बदौलत ये देश ओलंपिक, कॉमनवेल्थ और दूसरे बड़े अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों में बेहतरीन प्रदर्शन करते हैं। भारत ने भी खेलों को बढ़ावा देने और नई प्रतिभाओं को आगे लाने के मकसद से 'खेलो इंडिया' कार्यक्रम की शुरुआत की। यह योजना अक्टूबर 2017 में लॉन्च की गई थी। खेलो इंडिया, भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय की एक प्रमुख खेल विकास योजना है, जिसका मकसद जमीनी स्तर से खिलाड़ियों को पहचानना और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।

 

इस योजना के तहत चुने गए खिलाड़ियों को खेलो इंडिया एथलीट (KIA) कहा जाता है। हर एथलीट को सरकार की ओर से हर साल 6.28 लाख रुपये की आर्थिक मदद दी जाती है। इसमें हर महीने 10,000 रुपये जेब खर्च भी शामिल होता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो 2019-20 में 2,711 एथलीटों को इस वित्तीय सहायता के लिए चुना गया था। वहीं, 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 2,905 हो गई है। इसका मतलब है कि सिर्फ इन एथलीटों को मिलने वाली सीधी आर्थिक मदद पर ही सरकार करीब 182.43 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। हालांकि, यह रकम केवल खिलाड़ियों को सीधे दी जाने वाली सहायता है। इसके अलावा खेलो इंडिया योजना के तहत खेल इंफ्रास्ट्रक्चर, कोचिंग, ट्रेनिंग सुविधाओं और अन्य व्यवस्थाओं पर भी सरकार करोड़ों रुपये का अलग से खर्च करती है।

 

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ऐसे में जब से यह योजना की शुरुआत हुई है, तब से इस पर हजारों करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। जिसके बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या देश के सभी राज्यों को बराबर मौका मिला? जिन राज्यों को ज्यादा खिलाड़ी, बेहतर सुविधाएं और ज्यादा मदद मिली, क्या वहीं से सबसे ज्यादा मेडल विजेता भी निकले? और छोटे राज्यों में छिपी प्रतिभाओं को भी क्या उतना ही सहारा मिला, जितना बड़े राज्यों के खिलाड़ियों को मिला?

खेलो इंडिया में अब तक कितने एथलीट चुने गए हैं?

राज्य सभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 797 के लिए 5 फरवरी 2026 को दिए गए जवाब के मुताबिक, खेलो इंडिया योजना के तहत 2019-20 से 2025-26 तक के आंकड़े बताते हैं कि देश में खेल प्रतिभाओं को लगातार बढ़ावा मिल रहा है। साल 2019-20 में इस योजना से 2,711 खिलाड़ी जुड़े थे। अगले ही साल यानी 2020-21 में यह संख्या बढ़कर 3,030 के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई। इसके बाद कुछ वर्षों तक खिलाड़ियों की संख्या 2,750 से 2,850 के बीच बनी रही लेकिन 2025-26 में यह आंकड़ा फिर बढ़कर 2,905 हो गया।

 

 

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अगर बड़े राज्यों की बात करें, तो हरियाणा लगातार देश का सबसे दमदार प्रदर्शन करने वाला राज्य बना हुआ है। साल 2025-26 में हरियाणा के 514 खेलो इंडिया एथलीट चुने गए हैं, जो किसी भी राज्य में सबसे ज्यादा हैं। इसके बाद महाराष्ट्र के 314, उत्तर प्रदेश के 189, तमिलनाडु के 186, राजस्थान के 168 और कर्नाटक के 164 एथलीट चुने गए हैं।

 

सबसे दिलचस्प बात यह है कि देश का सबसे ज्यादा आबादी वाला राज्य उत्तर प्रदेश, हरियाणा से काफी पीछे है। कम आबादी वाला हरियाणा, उत्तर प्रदेश के मुकाबले करीब तीन गुना ज्यादा एथलीट तैयार कर रहा है। वहीं महाराष्ट्र में पिछले कुछ वर्षों से गिरावट देखने को मिली है, जबकि तमिलनाडु और राजस्थान ने अपने प्रदर्शन में उल्लेखनीय सुधार किया है।

 

छोटे राज्यों का प्रदर्शन भी कई मामलों में हैरान करने वाला रहा है। इसका सबसे बड़ा उदाहरण मणिपुर है। कम आबादी वाला यह राज्य खेलो इंडिया योजना में लगातार शानदार भागीदारी दिखा रहा है। साल 2025-26 में यहां के 124 खेलो इंडिया एथलीट चुने गए हैं, जबकि पिछले कुछ वर्षों में यह संख्या 255 तक पहुंच चुकी है। इसी तरह ओडिशा और झारखंड जैसे अपेक्षाकृत छोटे राज्यों ने भी लगातार अच्छा प्रदर्शन किया है और अपनी मौजूदगी मजबूत की है। वहीं, सिक्किम, लद्दाख, लक्षद्वीप, नागालैंड और अंडमान-निकोबार जैसे छोटे राज्य और केंद्रशासित प्रदेश अभी भी काफी कम संख्या में एथलीट तैयार कर पा रहे हैं।

 

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खेलो इंडिया पर कितना बजट खर्च हुआ?

राज्य सभा के अतारांकित प्रश्न संख्या 154 के 29 जनवरी 2026 को दिए गए जवाब के मुताबिक, खेलो इंडिया योजना शुरू होने के बाद इसके बजट में लगातार बढ़ोतरी हुई है। साल 2016-17 में इस योजना के लिए 118.10 करोड़ रुपये दिए गए थे और पूरी रकम खर्च भी कर दी गई। इसके बाद 2017-18 में बजट बढ़कर 350 करोड़ रुपये और 2018-19 में 500.09 करोड़ रुपये पहुंच गया। साल 2019-20 में पहली बार इस योजना का बजट 578 करोड़ रुपये के पार पहुंचा, जिसमें से 575.52 करोड़ रुपये खर्च किए गए। वहीं, कोरोना महामारी के दौरान 2020-21 में बजट घटकर 328.77 करोड़ रुपये रह गया, लेकिन सरकार ने 338.06 करोड़ रुपये खर्च किए। यानी, तय बजट से भी ज्यादा पैसा खर्च किया गया।

 

 

कोरोना महामारी के बाद सरकार ने खेलो इंडिया पर खर्च बढ़ाने की रफ्तार तेज कर दी। साल 2021-22 में इस योजना के लिए 869 करोड़ रुपये का बजट तय किया गया, जो उस समय तक का सबसे बड़ा आवंटन था। हालांकि, इसमें से 764.29 करोड़ रुपये ही खर्च हो सके, यानी पूरी राशि का उपयोग नहीं हो पाया। इसके बाद 2022-23 में तय किए गए 600 करोड़ रुपये में से 596.39 करोड़ रुपये खर्च किए गए।

 

वहीं, 2023-24 में 880 करोड़ रुपये के बजट में से 872.20 करोड़ रुपये खर्च हुए। यानी इन दोनों वर्षों में करीब 99 फीसदी बजट का इस्तेमाल किया गया। हालांकि, इसके बाद बजट में फिर कटौती देखने को मिली। 2024-25 में खेलो इंडिया का बजट घटकर 746.54 करोड़ रुपये रह गया। वहीं, 2025-26 में इसे और कम करके 700 करोड़ रुपये कर दिया गया। 15 जनवरी 2026 तक इस वित्त वर्ष में 628.91 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके थे।

 

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किन राज्यों में निवेश को राष्ट्र या अंतरराष्ट्रीय सफलता में बदला?

खेलो इंडिया योजना के तहत एथलीटों का चयन 2019-20 से शुरू हुआ। इसलिए 2018 और 2023 एशियन गेम्स, 2018 और 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स, टोक्यो ओलंपिक 2020 और नेशनल गेम्स 2022 और 2023 के नतीजों को सीधे खेलो इंडिया से जोड़ना सही नहीं होगा। उस समय तक खिलाड़ियों को योजना के तहत बहुत कम समय का प्रशिक्षण मिला था। वहीं पेरिस ओलंपिक 2024 और नेशनल गेम्स 2025 का विश्लेषण ज्यादा सही माना जा सकता है, क्योंकि खिलाड़ियों को चार-पांच साल का समय मिल चुका था।

 

 

पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत ने 6 पदक जीते। इनमें हरियाणा के 2, जबकि महाराष्ट्र, पंजाब और दिल्ली के 1-1 खिलाड़ी पदक विजेता रहे। इसके अलावा भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने भी कांस्य पदक जीता। दूसरी ओर, 2019-20 से 2023-24 के बीच खेलो इंडिया के तहत 14,068 एथलीट चुने गए। इनमें सबसे ज्यादा हरियाणा (2,104), महाराष्ट्र (1,839), दिल्ली (1,023), मणिपुर (878) और कर्नाटक (750) के खिलाड़ी थे।

 

इन आंकड़ों से पता चलता है कि हरियाणा और महाराष्ट्र जैसे राज्य खेलो इंडिया में भी आगे हैं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं। हालांकि, सिर्फ खिलाड़ियों की संख्या के आधार पर यह नहीं कहा जा सकता कि किसी राज्य ने उतने ही ज्यादा अंतरराष्ट्रीय पदक जीते। इसलिए खेलो इंडिया के असर का सही आकलन ओलंपिक के साथ-साथ एशियन गेम्स, विश्व चैंपियनशिप और नेशनल गेम्स जैसे बड़े टूर्नामेंटों के प्रदर्शन को मिलाकर करना ज्यादा सही होगा।

 

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2019-20 से 2025-26 के बीच खेलो इंडिया योजना के तहत सबसे ज्यादा एथलीट तैयार करने वाले राज्यों का असर नेशनल गेम्स 2025 में भी साफ देखने को मिला। हरियाणा ने सबसे ज्यादा 3,108 एथलीट तैयार किए और 153 मेडल जीतकर तीसरे स्थान पर रहा। महाराष्ट्र ने 2,478 एथलीट तैयार किए और 201 मेडल के साथ दूसरा स्थान हासिल किया। वहीं, कर्नाटक (1,071 एथलीट) पांचवें, तमिलनाडु (1,012 एथलीट) छठे और पंजाब (1,163 एथलीट) नौवें स्थान पर रहे। यानी खेलो इंडिया के तहत सबसे ज्यादा एथलीट तैयार करने वाले टॉप-10 राज्यों में से 7 राज्य नेशनल गेम्स की टॉप-10 मेडल तालिका में भी शामिल रहे। इससे साफ पता चलता है कि खेलो इंडिया से तैयार हो रही प्रतिभाएं अब राष्ट्रीय स्तर पर मेडल भी दिला रही हैं।

 

 

हालांकि, हर राज्य के साथ ऐसा नहीं हुआ। दिल्ली (1,326 एथलीट), उत्तर प्रदेश (1,240), मणिपुर (1,111) और राजस्थान (831) ने बड़ी संख्या में एथलीट तैयार किए, लेकिन मेडल के मामले में वे टॉप-10 में जगह नहीं बना सके। दूसरी तरफ, मध्य प्रदेश ने सिर्फ 658 और उत्तराखंड ने 382 एथलीट तैयार किए, फिर भी दोनों राज्यों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए क्रमशः चौथा और सातवां स्थान हासिल किया। यानी सिर्फ ज्यादा एथलीट तैयार करना ही काफी नहीं है, उन्हें अच्छी ट्रेनिंग, बेहतर कोचिंग और मुकाबलों का सही माहौल मिलना भी उतना ही जरूरी है।