चुनाव आयोग, SIR और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर गांधी जयंती के दिन दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन बुलाया गया था। अलग-अलग छात्र संगठनों, सामाजिक संगठनों और राजनीतिक दलों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। AISA समेत कई छात्र संगठनों के लोग प्रदर्शन के लिए जंतर मंतर पहुंचे। लेकिन दिल्ली पुलिस ने किसी को भी प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी।
पुलिस ने प्रदर्शन में पहुंचे योगेंद्र यादव, छात्र नेता नेहा बोरा, AAP नेता सौरभ भारद्वाज और RJD सांसद मनोज झा को हिरासत में लिया। प्रदर्शन में CEC ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग उठाई जा रही है। SIR के दौरान वोटर लिस्ट में हुए बदलाव को लेकर भी सवाल पूछे जा रहे हैं।
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IYC और NSUI को दफ्तर के पास ही रोका गया
जंतर मंतर से करीब आधा किलोमीटर दूर कांग्रेस का युवा संगठन भारतीय युवा कांग्रेस (IYC) और छात्र संगठन NSUI भी प्रदर्शन के लिए धरना स्थल पर पहुंचने वाले थे। लेकिन वे अपने दफ्तर से आगे नहीं बढ़ सके। पुलिस और फोर्स ने उन्हें दफ्तर के पास ही रोक दिया।
दफ्तर से निकलते ही हिरासत में ले गई पुलिस
भारतीय युवा कांग्रेस का दफ्तर 5 रायसीना रोड पर है। दफ्तर के मुख्य गेट के सामने से ही जंतर मंतर रोड शुरू होता है। यहां से आधा किलोमीटर दूर बाकी प्रदर्शनकारी पहुंच रहे थे और वहीं पुलिस उन्हें हिरासत में ले रही थी। IYC और NSUI के कार्यकर्ता मुश्किल से 100 मीटर ही चल पाए थे कि पुलिस ने रास्ते में उन्हें रोक लिया। इसके बाद उन्हें वहीं से वापस भेज दिया गया।
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क्यों हो रहा है जंतर मंतर पर प्रदर्शन?
इंडियन एक्सप्रेस ने अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि चुनाव आयोग के दो सदस्यों, सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 10 महीनों में कम से कम 14 बार मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के सामने अपनी आपत्तियां रखीं, लेकिन उन्हें अनदेखा किया गया। कुछ फैसले उनकी जानकारी के बिना मनमाने तौर पर लिए गए। ये आपत्तियां वोटर लिस्ट से जुड़े फैसलों, पंजीकरण की प्रक्रिया और आयोग के डिजिटल सिस्टम से जुड़ी बताई गई हैं।
क्यों चुनाव आयोग पर ही उठने लगे हैं सवाल?
रिपोर्ट ऐसे समय आई जब SIR के तहत वोटर लिस्ट के बड़े बदलाव पर पहले से सवाल उठ रहे थे। विपक्ष ने इन आरोपों को सच बताया है। विपक्ष का दावा है कि सरकार ज्ञानेश कुमार के जरिए चुनावी प्रक्रिया को BJP के पक्ष में प्रभावित कर रही है।
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ज्ञानेश कुमार क्या कह रहे हैं?
ज्ञानेश कुमार ने सभी आरोपों से इनकार किया है। सरकार, BJP और चुनाव आयोग ने भी इन्हें खारिज किया है। आयोग ने जवाब में कहा कि किसी भी संस्था में मतभेद सामान्य बात है। इसी रिपोर्ट के बाद 2 अक्टूबर के विरोध-प्रदर्शन और उनके इस्तीफे की मांग तेज हुई है। अब दिल्ली में सरकार को घेरने की तैयारी विपक्षी दल कर रहे हैं। प्रदर्शन की इजाजतन हीं दा जा रही है।
