देश भर में चुनाव आयोग की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन ( SIR ) प्रक्रिया के तहत ड्राफ्ट मतदाता सूचियों से करीब 13.37 करोड़ नाम हटाए गए हैं। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम भी पंजाब की वोटर लिस्ट से हटा दिया गया है। राघव चड्ढा 2022 में आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर राज्यसभा पहुंचे थे और अप्रैल 2026 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए थे।

राघव चड्ढा ने आरोप लगाया है कि पंजाब की आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार ने राजनीतिक बदले की भावना से उनका नाम काटा है। वहीं पंजाब सरकार के अधिकारी और आम आदमी पार्टी ने कहा है कि SIR प्रक्रिया चुनाव आयोग चलाता है और राज्य सरकार की इसमें कोई भूमिका नहीं है।

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राघव चड्ढा का नाम क्यों बाहर हो गया?

चुनाव आयोग के रिकॉर्ड के मुताबिक राघव चड्ढा का नाम 13 अगस्त को जारी हुई पंजाब की ड्राफ्ट सूची से हटा दी गई है। उनका नाम 'एब्सेंट, शिफ्टेड, डेड, डुप्लीकेट' लिस्ट ASDD में डाल दिया गया है। उनकी एंट्री के सामने स्थायी रूप से बाहर चले गए लिखा गया है। पंजाब में SIR से पहले की कुल मतदाता सूची में से करीब 20.66 लाख नाम हटाए गए हैं।

9.7 प्रतिशत नाम मतादाता सूची में नहीं हैं। राघव चड्ढा के साथ भी यही हुआ है। पंजाब की अंतिम SIR सूची 12 अक्टूबर को जारी होने वाली है। ड्राफ्ट स्तर पर हटाए गए लोगों के पास दावा और आपत्ति दर्ज कराकर दोबारा सूची में शामिल होने का मौका है। इसके लिए 13 अगस्त से 12 सितंबर तक एक महीने की समयसीमा दी गई है।

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राघव चड्ढा ने भगवंत मान सरकार पर क्या आरोप लगाए?

राघव चड्ढा ने X पर दावा किया कि राजनीतिक साजिश की वजह से उनका नाम हटाया गया है। उन्होंने कहा कि पंजाब की AAP सरकार ने अपनी बदले की राजनीति को अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट तक पहुंचा दिया है। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ ड्राफ्ट सूची है अंतिम सूची नहीं है। यह दावा और आपत्ति प्रक्रिया के अधीन है। उन्होंने कहा कि वह SIR दिशानिर्देशों के तहत मौजूद कानूनी प्रावधानों की मदद से अपना नाम शामिल कराएंगे। उन्होंने कहा है कि अक्टूबर 2026 में जारी होने वाली अंतिम सूची में इसे ठीक करा लेंगे।

AAP सरकार ने हटवाया राघव चड्ढा का नाम?

राघव चड्ढा ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग ने जून 2025 में जारी अपने विस्तृत SIR दिशानिर्देशों में कहा था कि जनप्रतिनिधियों को ड्राफ्ट सूची में शामिल किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि वह पंजाब से मौजूदा सांसद हैं। अगर उनका नाम चिह्नित हुआ था तो गाइडलाइन के पैराग्राफ 4 डी के तहत उन्हें ड्राफ्ट सूची में शामिल किया जाना जरूरी था। 

राघव चड्ढा ने कहा कि यह निर्देश नजरअंदाज नहीं किया गया बल्कि जानबूझकर उनके मामले में इसका उल्लंघन किया गया। उन्होंने कहा कि AAP भले ही पंजाब सरकार चला रही हो लेकिन पंजाब की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट उसकी निजी संपत्ति नहीं है। राघव चड्ढा ने कहा कि पंजाब से सांसद होने के बावजूद उन्हें शिफ्टेड बताया गया है। यह महज क्लर्क स्तर पर की जाने वाली गलती नहीं है, यह राजनीतिक बदले की साजिश है। 

 

 



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पंजाब सरकार और AAP ने क्या कहा है?

राघव चड्ढा के आरोपों को पंजाब के अधिकारी और सरकार के प्रतिनिधि खारिज कर रहे हैं। उनका कहना है कि आरोप पूरी तरह गलत हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रक्रिया में पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है और मुख्य निर्वाचन अधिकारी चुनाव आयोग की ओर से नियुक्त अधिकारी होते हैं।

आम आदमी पार्टी ने कहा है कि SIR चुनाव आयोग करता है राज्य सरकार नहीं इसलिए किसका नाम सूची में रहेगा या हटेगा यह तय करने में पंजाब सरकार की कोई भूमिका नहीं है। उन्होंने कहा कि यह सार्वजनिक रिकॉर्ड में है कि राघव चड्ढा दिल्ली में रहते आए हैं पंजाब में नहीं। 

AAP उन्होंने कहा कि अगर वह अब पंजाब में नहीं रहते तो अपना वोटर रजिस्ट्रेशन बनाए रखना या बदलना उनकी अपनी जिम्मेदारी थी। अब वह इसके लिए AAP या पंजाब सरकार को जिम्मेदार नहीं ठहरा सकते।

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दिल्ली या पंजाब, राघव चड्ढा हैं कहां के?

लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 3 के मुताबिक राज्यसभा सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार का देश की किसी भी संसदीय सीट पर मतदाता के रूप में पंजीकृत होना जरूरी है। 2022 के राज्यसभा चुनाव के अपने हलफनामे में राघव चड्ढा ने बताया था कि वह दिल्ली के राजिंदर नगर स्थित बूथ नंबर 52 पर मतदाता के रूप में दर्ज हैं। पंजाब से सांसद बनने के बाद उन्होंने पंजाब की वोटर लिस्ट में अपना नाम शामिल कराया था। 1 जून 2024 को हुए लोकसभा चुनाव में उन्होंने पंजाब के मोहाली के एक बूथ पर वोट डाला था।

दिल्ली वाला खेल, पंजाब में हो गया?

अप्रैल 2026 में BJP में शामिल होने से पहले राघव चड्ढा 6 अन्य AAP सांसदों के साथ आम आदमी पार्टी में थे। वह अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी माने जाते थे। तब वह भी आरोप लगाते थे कि बीजेपी ने वोटर लिस्ट में छेड़छाड़ की है। साल 2025 के दिल्ली विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री आतिशी और राज्यसभा सांसद संजय सिंह के साथ उन्होंने केजरीवाल की नई दिल्ली सीट पर बड़े पैमाने पर मतदाता सूची धोखाधड़ी की साजिश का आरोप लगाया था। अब यही उनके साथ भी हो गया है।