एक तरफ पश्चिम बंगाल की हार के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) में खलबली मची हुई है। लोकसभा में उसके 20 सांसद अलग गुट बनाने का दावा कर रहे हैं और राज्यसभा में हर दिन कोई न कोई सांसद इस्तीफा दे दे रहा है। इस बीच उद्धव ठाकरे की भी टेंशन बढ़ सकती है। कहा जा रहा है कि शिवसेना (उद्धव बाला साहब ठाकरे) के 9 में से 7 सांसद भी पाला बदलने की तैयारी में हैं। इस बारे में शिवसेना (UBT) के नेता और प्रवक्ता आनंद दुबे ने कहा है कि इस समय तो सेल लगी हुई है और जिसको कहीं जाना ही होगा, उसे कोई कहां रोक पाएगा। चर्चा है कि ये सांसद दो तिहाई वाले फॉर्मूले के सहारे या तो अलग गुट बना सकते हैं या फिर एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल हो सकते हैं।
चर्चा है कि हाल ही में इन 7 सांसदों ने एकनाथ शिंदे से एक गुपचुप मुलाकात भी की है। अपना कुनबा बढ़ाने के लिए तेजी से काम कर रही भारतीय जनता पार्टी (BJP) के लिए तो यह अच्छी ही खबर होगी क्योंकि उसका लक्ष्य संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत जुटाना है। इसी के चलते ऐसे दलों के नेताओं को केंद्रीय कैबिनेट में भी पद दिए जा सकते हैं।
इधर सीक्रेट मीटिंग और दिल्ली में अमित शाह से एकनाथ शिंदे की मुलाकात के बाद सुगबुगाहट बढ़ गई है। अगर ऐसा होता है तो ना सिर्फ एकनाथ शिंदे की ताकत बढ़ेगी बल्कि लोकसभा में नेशनल डेमोक्रैटिक अलायंस (NDA) के संख्या बल में भी इजाफा हो जाएगा।
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क्या बोली शिवसेना (UBT)?
इस मामले पर शिवसेना (UBT) के नेता आनंद दुबे ने कहा, 'देखिए इस समय सेल लगी हुई है। इस समय मार्केट में एक सेल लगी है। टीएमसी से अलग लोग टूट रहे हैं, हम सुन रहे हैं कि हमारी पार्टी से अलग लोग टूट रहे हैं। सब टूटकर बीजेपी में जा रहे हैं। बीजेपी कह रही है कि हम महासागर हैं, जो छोटो-मोटी नदियां हैं, वे आकर हमसे मिल जाएं। दरिया से सागर, सागर से दरिवा वाला गाना है ना! हमें लगता है कि इस मामले को ज्यादा तूल नहीं देना चाहिए।'
उन्होंने आगे कहा, 'हम 2024 से सुन रहे हैं ऑपरेशन टाइगर होने वाला है। ऑपरेशन लोटस होने वाला है। कब होने वाला है? जिसको जाना है, उसको कोई रोक सकता है क्या? जाने वाले चले गए। वे 2022 में ही चले गए। रुकने वाले हमारी तरह ठहर गए। हमें लगता है कि यह जो 7 सांसदों की बात है, यह शायद हीं जुमलेबहाजी न हो तो मुझे लगता है कि इसके लिए इंतजार करना चाहिए। फिलहाल तो महासागर का ध्यान टीएमसी की तरफ है। एक बार टीएमसी का सारा जल
अपने में मिला लेगी तो फिर किसी और देखेगी। बीजेपी बहुत भूखी है, कितने भी सांसद आएं, उसका पेट नहीं भरता है।'
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BJP ने क्या कहा?
इसी बारे में बीजेपी के नेता राम कदम ने कहा है, 'जब नैया डूबती है तब सारे लोग उस नैया को छोड़कर अपनी जान बचाने के लिए भागते हैं। पूर्वी भारत में जिस तरह से ममता बनर्जी ने अपनी विचारधारा बदली और वही असर उद्धव ठाकरे पर आया और उन्होंने अपनी विचारधारा बदली। विचारधारा बदलने का खामियाजा उद्धव ठाकरे पहले भी भुगत चुके हैं और आने वाले भविष्य में भी भुगतेंगे। फिर हम दो, हमारे दो यानी मैं एक और मेरा बेटा होगा, ऐसी भविष्यवाणी उनके ही दल के नेता कर रहे हैं।'
उन्होंने आगे कहा, 'ममता जी के बारे में तो बद से बदतर हाल हैं। लोग उनके मंत्रियों के घर में जाकर अंडे फेंककर अपना पुराना गुस्सा निकाल रहे हैं। जब भी विचारधारा से समझौता होता है तो जनता किसी को माफ नहीं करती। जनता ना तो ममता बनर्जी को माफ नहीं करेगी और ना ही उद्धव ठाकरे को। इनके सारे नेताओं का जाना तो तय है। सही समय का इंतजार कुछ नेता कर रहे हैं और कुछ नेताओं को लेने के लिए अन्य दल आगे-पीछे हो रहा है। इतना ही सवाल हो रहा है।'
बता दें कि साल 2024 के लोकसभा चुनाव में महा विकास अघाड़ी के तहत चुनाव लड़ी शिवसेना (UBT) के पास कुल 9 लोकसभा सांसद हैं। राज्यसभा में अब शिवसेना (UBT) के पास सिर्फ संजय राउत ही बचे हैं।
