20 लोकसभा सांसद और 58 विधायकों के बाद टीएमसी के तीन पूर्व राज्यसभा सांसदों ने गुरुवार को बीजेपी का दामन थाम लिया है। बंगाल बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने पूर्व टीएमसी राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बारिक और सुखेंदु शेखर रॉय को पटका पहनाकर पार्टी में शामिल करवाया। माना जा रहा है कि आने वाले राज्यसभा चुनाव में बीजेपी इन्हीं नेताओं को अपना प्रत्याशी बना सकती है।
कुछ समय पहले ही तीनों नेताओं ने टीएमसी के राज्यसभा सदस्य के तौर पर इस्तीफा दिया था। अपने इस्तीफे के दौरान प्रकाश चिक बारिक ने कहा था कि उन्होंने बंगाल की जनता की राय मानकर यह कदम उठाया है।
सुष्मिता देव ने व्यक्तिगत कारणों से इस्तीफा देने की बात कही थी। उनका कहना था कि वह असम में काम करना चाहती हैं। बीजेपी में शामिल होने वाले सुखेंदु शेखर रॉय ने पश्चिम बंगाल की पूर्ववर्ती टीएमसी सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।
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टीएमसी और लेफ्ट ने की टकराव की राजनीति
बंगाल बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा, 34 साल तक लेफ्ट का शासन रहा। इसके बाद तृणमूल कांग्रेस ने राज किया। पश्चिम बंगाल में इतने लंबे समय तक जो सियासत हुई, उसने हमारे संघीय ढांचे को नकारा और ठुकराया। केंद्र के साथ सहयोग करने के बजाय टकराव का रास्ता चुना गया। इससे सारा विकास रुक गया।
उन्होंने आगे कहा कि पीएम मोदी के नेतृत्व में भरोसा जताते हुए तीन सांसदों ने तृणमूल कांग्रेस से इस्तीफा दिया। आज,ये तीनों सुष्मिता देव, प्रकाश चिक बारिक और सुखेंदु शेखर रॉय बीजेपी में शामिल हो गए हैं। ये तीनों सांसद दिग्गज नेता हैं और राज्यसभा में इनका काम सभी को पता है।
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सबसे बड़ी बगावत से जूझ रही टीएमसी
बंगाल विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के बाद तृणमूल कांग्रेस अपने इतिहास के सबसे बड़ी सियासी संकट का सामना कर रही है। पहले 80 में से 58 विधाकों ने बगावत करके एक नया गुट बना लिया। उसके बाद 20 सांसदों ने त्रिपुरा की एक गुमनाम सियासी पार्टी में शामिल होकर टीएमसी नेतृत्व की धड़कनें बढ़ा दी। इस बीच बागीगुट ने पार्टी के चुनाव चिह्न और नाम पर भी दावा ठोक दिया है।
