उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने चुनाव आयोग और मतदाता सूची के संशोधन ( SIR ) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर हेरफेर हो रही है। अविनाश पांडे, राष्ट्रीय प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत और कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा 'मोना' ने आरोप लगाया है कि बड़े स्तर पर चुनाव आयोग हेरफेर कर रहा है, आपत्तियों को सुना नहीं जा रही है। यह वोट चोरी है।

 

अविनाश पांडे ने दावा किया कि 10 अप्रैल को अंतिम ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद जुलाई से सितंबर के बीच पीलीभीत सदर विधानसभा (127) में 13,150 मतदाताओं के नाम बदल दिए गए। उनके मुताबिक यह बदलाव बिना फॉर्म-6 या फॉर्म-7 के हुआ। कांग्रेस ने यह भी कहा कि इन मामलों में वोटर आईडी यानी EPIC नंबर और सीरियल नंबर वही रहे, लेकिन नाम बदल दिए गए।

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पीलीभीत सदर को लेकर कांग्रेस के दावे क्या हैं?

अविनाश पांडे ने कहा कि नाम बदलने का एक उदाहरण 'रशीद' से 'अब्दुल' है। उन्होंने यह भी दावा किया कि 804 जीवित और मौजूद मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए। साथ ही 2,600 ऐसे नाम जोड़े गए, जो उनके अनुसार वहां रहते ही नहीं हैं। कांग्रेस के हिसाब से एक ही विधानसभा में कुल 16,554 वोटों में गड़बड़ी हुई।

 

सुप्रिया श्रीनेत ने योगी सरकार के मंत्री और पीलीभीत सदर से विधायक संजय गंगवार की तस्वीर दिखाई। उन्होंने कहा कि गंगवार 2022 का चुनाव सिर्फ 6,930 वोटों से जीते थे। उनके मुताबिक उसी क्षेत्र में 16,000 से ज्यादा वोटों में गड़बड़ी पकड़ी गई है।

 

श्रीनेत ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और आयोग के आईटी प्रमुख सीमा खन्ना की तस्वीरें भी दिखाईं। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्रीय स्तर पर सॉफ्टवेयर के जरिए शाम के समय कुछ ही मिनटों में थोक में नाम बदले गए।

 

 



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मुस्लिमों को लेकर क्या दावा कर रही है कांग्रेस?

सुप्रिया श्रीनेत ने दावा किया कि बदले गए ज्यादातर नाम मुस्लिम पुरुषों के हैं। उन्होंने उदाहरण दिए कि मोहम्मद यूसुफ को हसरत, मोहम्मद वसीम को शेर मोहम्मद और मोहम्मद शादाब को सलीम खान कर दिया गया। उनका आरोप था कि ऐसा इसलिए किया गया, ताकि ये लोग मतदान के दिन वोट न डाल सकें।

 

कांग्रेस नेताओं ने प्रदेश स्तर पर भी आरोप लगाए। श्रीनेत के मुताबिक उत्तर प्रदेश में हर साल लाखों नए वोटर जुड़ने चाहिए, लेकिन अब 2 करोड़ से ज्यादा मतदाताओं के नाम कटने का दावा किया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताया।

कांग्रेस की 3 मांगें क्या हैं?

पहली, सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर तुरंत संज्ञान ले और विवादित SIR प्रक्रिया को खारिज करे। दूसरी, सभी नागरिक और कार्यकर्ता चुनाव आयोग की वेबसाइट पर अपना EPIC नंबर और नाम जांचें। नाम बदला मिले तो कांग्रेस कार्यालयों से संपर्क करें। तीसरी, जिलाधिकारी और एसडीएम स्तर के अधिकारी सामने आकर गड़बड़ी ठीक करें।

 

आराधना मिश्रा ने कहा कि पार्टी राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के नेतृत्व में कानूनी सलाह ले रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस उत्तर प्रदेश के हर जिले में इस मुद्दे पर बड़े स्तर पर लड़ाई लड़ेगी। दिए गए ब्योरे में इन आरोपों पर चुनाव आयोग या प्रशासन की प्रतिक्रिया का जिक्र नहीं है।

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और किस रिपोर्ट का जिक्र सरकार को घेर रही कांग्रेस?

चुनाव आयोग के डिजिटल प्लेटफॉर्म ECINet को लेकर एक ऑडिट रिपोर्ट सामने आई है। इस प्लेटफॉर्म पर राज्यों के अधिकारियों की पहुंच केंद्रीय स्तर से बंद या चालू की जा सकती है। यह ऑडिट सिविक टेक पहल 'चर्चाग्राम' ने किया है। रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि ECINet के जरिए चुनाव प्रक्रिया को केंद्रीकृत किया गया है और 'वोट चोरी' का पूरा खेल दिल्ली से चलाया जा रहा है।

 

द हिंदू की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑडिट रिपोर्ट के लेखक सौरव राजपूत हैं। वह डेटा साइंटिस्ट हैं और IIT दिल्ली और IIM कलकत्ता के पूर्व छात्र हैं। रिपोर्ट के मुताबिक ECINet में राज्य नोडल अधिकारी यानी SNO के लिए अलग प्रबंधन सेक्शन है। इसमें अधिकारी को जोड़ने, संभालने और अपडेट करने की सुविधा है। कांग्रेस इस दाव को लेकर सवाल उठा रही है।

इस रिपोर्ट पर कांग्रेस क्या कह रही है?

चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी पहले ECINet और मतदाता सूची के डेटाबेस के केंद्रीकरण पर आपत्ति जता चुके हैं। यह रिपोर्ट उसी संदर्भ में अहम मानी जा रही है। कांग्रेस ने अपने बयान में कहा कि ज्ञानेश कुमार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जोड़ी ने ऐसा सिस्टम बनाया, जिसमें कोई उनकी गड़बड़ियों की जांच न कर सके। पार्टी ने इसे 'देशद्रोह' बताया और कहा कि इसकी सजा जरूर मिलेगी।

 

कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने भी X पर पोस्ट किया। उन्होंने कहा कि कानून के तहत मतदाता सूची पर EROs का वैधानिक अधिकार है। उनके मुताबिक ECINet और चुनाव आयोग का IT विभाग देशभर में इन सुरक्षा उपायों की अनदेखी कर रहे हैं।  

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कांग्रेस क्या कह रही है?

कांग्रेस के यूपी प्रभारी राजेंद्र पाल ने कहा, 'चुनाव आयोग ने SIR के जरिए एक ऐसी साजिश रची है, जिससे किसी को भी हराया और जिताया जा सकता है। आज हम चुनाव आयोग का पर्दाफाश करेंगे और उन बातों को सामने लाएंगे, जिनके बारे में आम जनता सोच भी नहीं सकती। ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में SIR की प्रक्रिया पूरी की और 10 अप्रैल को अंतिम ड्राफ्ट लिस्ट जारी की। लेकिन सूची जारी होने के बाद पता चला कि चुनाव आयोग ने लोगों के साथ बड़ा फ्रॉड किया है।'