तमिलनाडु की सत्तारूढ़ पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) परिसीमन के मुद्दे पर एक हो गए हैं। दोनों दल, मिलकर केंद्र सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। दोनों पार्टियां कह रही हैं कि अगर संसद में इस संबंध में फिर कोई बिल लाया गया तो वे उसका पुरजोर विरोध करेंगे। एमके स्टालिन और मुख्यमंत्री जोसेफ विजय भी इस मुद्दे पर एक साथ हैं।
DMK के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने 16 जुलाई को अपने सांसदों की बैठक में कहा कि वे राज्य के हितों को नुकसान पहुंचाने वाली किसी भी योजना का मुकाबला करेंगे। DMK प्रवक्ता सरवनान अन्नादुराई ने कहा कि यह बिल राज्यों खासकर तमिलनाडु के हितों के खिलाफ है। इससे पहले भी ऐसा बिल लाया गया था, जिससे राज्य को नुकसान हुआ था।
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कैसे एक-दूसरे के साथ आए विजय-स्टालिन?
अप्रैल में एमके स्टालिन ने प्रस्तावित विधेयक की कॉपी जलाकर इसका जमकर विरोध किया था। इसे उन्होंने काला कानून बताया था। उन्होंने कहा था कि इससे तमिल लोगों को नुकसान होगा। सी. जोसेफ विजय ने भी परिसीमन का विरोध किया है। चुनाव से पहले उन्होंने इसे केंद्र सरकार की पूर्वाग्रही योजना बताया था। सत्ता में आने के बाद भी 10 जुलाई को करूर में उन्होंने कहा था कि तमिलनाडु का प्रतिनिधित्व कमजोरन नहीं पड़ने देंगे।
साथ देने की मजबूरी क्या है?
विजय और एमके स्टालिन परिसीमन के मुद्दे पर एक नजर आ रहे हैं। दोनों तमिल राजनीति करते हैं, दोनों दलों को आशंका है कि अगर परिसीमन विधेयक आया तो इसका नुकसान राज्य को होगा, प्रतिनिधित्व कमजोर पड़ेगा। उन्होंने बार-बार यह डर दिखाया है कि तमिलनाडु की सीटें जानबूझकर कम कर दी जाएंगी।
दोनों का तर्क है कि जनसंख्या-आधारित परिसीमन से दक्षिणी राज्यों का संसद में प्रतिनिधित्व घट सकता है और यह उनके लिए राजनीतिक नुकसान होगा। इसी वजह से दोनों ने केंद्र के प्रस्ताव के खिलाफ साझा रुख अपनाते हैं।
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क्या संसद में फिर पेश होगा विधेयक?
मॉनसून सत्र की शुरुआत 20 जुलाई से हो रही है। सरकार के एजेंडा में परिसीमन विधेयक नहीं है। DMK का कहना है कि वे सभी घटनाक्रम पर नजर रख रहे हैं और अगर कोई बैठक या बिल आया तो अपना रुख साफ करेंगे।
भारतीय जनता पार्टी क्या सोचती है?
बीजेपी ने इस मुद्दे पर कहा है कि डेलिमिटेशन होना चाहिए और यह 2000 में ही हो जाना चाहिए था। वहीं, AIADMK ने अभी इस मुद्दे पर चुप्पी साधी है। दोनों पार्टियां अब विधानसभा चुनाव से पहले इस मुद्दे पर एकजुट होकर तमिलनाडु के हितों की रक्षा करने का संदेश दे रही हैं।
