महाराष्ट्र की सियासत में उद्धव ठाकरे को एक के बाद एक सियासी झटके लग रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) के 2 सांसदों ने रविवार को उद्धव ठाकरे के नेतृत्व से बगावत की है। धाराशिव के सांसद ओमराजे निंबालकर और हिंगोली के सांसद नागेश आष्टिकर ने एकनाथ शिंदे की अगुवाई वाली शिवसेना में शामिल होने का एलान कर दिया है। यह फैसला उद्धव ठाकरे की पार्टी को बड़ा झटका माना जा रहा है।
ओमराजे निंबालकर ने संजय राउत और अन्य नेताओं द्वारा उनके खिलाफ दिए गए बयानों पर नाराजगी जताई। उनके पिता पवनराजे निंबालकर के हत्याकांड में सभी आरोपियों को कोर्ट से बरी किए जाने के कुछ दिन बाद उन्होंने यह फैसला लिया। उद्धव ठाकरे ने उन्हें मनाने की आखिरी कोशिश भी की, लेकिन ओमराजे निंबालकर नहीं माने।
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ओमराजे निंबालकर ने अपने गांव में स्थानीय नेताओं से बैठक की। उन्होंने कहा कि विपक्ष में रहकर भारतीय जनता पार्टी (BJP) नेता पद्मसिंह पाटिल और उनके बेटे के खिलाफ लड़ना अब संभव नहीं है।
बगावत की क्या वजह बता रहे ओमराजे निंबालकर?
ओमराजे निंबालकर, सांसद, शिवसेना (UBT):-
राजनीति के लिए हमें सत्ता पक्ष की जरूरत है। कार्यकर्ताओं को भी ताकत चाहिए। मैं पद या लालच की वजह से शिंदे की शिवसेना में नहीं शामिल हो रहा हूं, राजनीतिक मजबूरियों और क्षेत्रीय हितों के लिए ऐसा फैसला कर रहा हूं।
ओमराजे निंबालकर ने साफ कहा कि वह शिंदे गुट में पैसे या पद के लालच से नहीं, बल्कि राजनीतिक मजबूरियों और क्षेत्रीय मुद्दों को देखते हुए शामिल हो रहे हैं।
नागेश आष्टिकर ने क्या कहा है?
हिंगोली सांसद नागेश आष्टिकर ने फेसबुक लाइव पर बताया कि विपक्ष में रहकर विकास कार्यों को कराना बहुत मुश्किल हो गया है। उन्होंने कहा, 'विपक्ष में फंड और मंजूरी दोनों की कमी होती है।'
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कब अलग होंगे?
शिवसेना के एक नेता ने बताया कि जरूरी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद एक-दो दिन में इन दोनों सांसदों के शिंदे गुट में शामिल होने का औपचारिक ऐलान किया जाएगा। दो सांसदों के इस रुख के बाद शिवसेना (यूबीटी) में और बगावत बढ़ सकती है। कई मीडिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि उद्धव गुट में बचे चार सांसद भी जल्द ही शिंदे गुट में जा सकते हैं।


