सनातन धर्म में भादों महीने में आने वाली पूर्णिमा बेहद शुभ मानी जाती है। सभी पूर्णिमाओं में से भाद्रपद पूर्णिमा सबसे खास मानी जाती है। आज के दिन पूरे देश में भाद्रपद पूर्णिमा मनाई जा रही है। इस पर्व पर सभी भक्त भगवान विष्णु की पूजा-पाठ करते हैं। साथ ही कई लोग व्रत भी रखते हैं। भाद्रपद पूर्णिमा की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके अगले दिन से ही पितृ पक्ष की शुरुआत होगी। इस वजह से भाद्रपद पूर्णिमा का महत्व बढ़ जाता है। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, आज के दिन लोगों को व्रत रखने के साथ-साथ भाद्रपद की कथा पढ़नी या सुननी चाहिए।
हिंदू पंचांग के मुताबिक, भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा की तिथि 25 सितंबर की रात 11:06 बजे से शुरू हुई थी, जो आज यानी 26 सितंबर की रात 10:18 बजे तक रहेगी। धार्मिक जानकारों के मुताबिक, आज के दिन लोगों को भगवान विष्णु की पूजा-पाठ के साथ-साथ दान-पुण्य भी करना चाहिए। जानकारी के लिए बता दें कि इस दिन सिर्फ सुबह पूजा नहीं की जाती है, बल्कि रात के समय चंद्रमा को अर्घ्य भी देना चाहिए। मान्यता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के घर में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
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क्या है पूजा की विधि?
इस दिन आप सुबह-सुबह स्नान करें, जिसके बाद साफ कपड़े पहनकर घर का पूजा स्थान साफ करें। भगवान विष्णु की पूजा करें। उन्हें फूल, फल और मिठाई का भोग चढ़ाना चाहिए। प्रसाद चढ़ाने के बाद भाद्रपद पूर्णिमा की कथा पढ़ें। इसके बाद पूरा परिवार मिलकर आरती करें।
धार्मिक जानकारों के मुताबिक, पूर्णिमा की रात व्यक्ति को चंद्रमा की पूजा करनी चाहिए। इस दौरान व्यक्ति को दूध में जल मिलाकर अर्घ्य देना चाहिए। मान्यता है कि इससे व्यक्ति के घर में सुख, शांति और समृद्धि आती है। आज के दिन शाम को 6 बजकर 9 मिनट पर चंद्रोदय होगा।
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शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 04:46 मिनट से 05:33 मिनट तक रहेगा।
विजय मुहूर्त-दोपहर 02:23 मिनट से 03:11 मिनट तक रहेगा।
गोधूलि मुहूर्त- शाम 06:24 मिनट से 06:48 मिनट तक रहेगा।
निशिता मुहूर्त- रात 11:59 मिनट से 12:46 मिनट तक रहेगा।
भाद्रपद पूर्णिमा की कथा
धार्मिक कथाओं के अनुसार, एक समय राजा पृथु नाम के एक राजा थे, जो अपने राज्य के हर व्यक्ति को सुखी रखते थे। राजा हमेशा अपनी प्रजा की भलाई के बारे में सोचते थे। इसी को लेकर उनके मन में चिंता रहती थी। तभी एक दिन राजा पृथु ने साधुओं से पूछा कि ऐसा कौन-सा व्रत है, जिसके प्रभाव से व्यक्ति पर भगवान की कृपा बनी रहेगी।
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तब साधुओं ने कहा कि पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। इसके साथ ही जरूरतमंद लोगों को भोजन कराने से व्यक्ति को भगवान का आशीर्वाद मिलेगा।
राजा पृथु ने ऋषियों की बात मानकर व्रत रखा। उस दिन वह सुबह जल्दी उठे और भगवान विष्णु की पूजा की। पूजा-पाठ के बाद राजा ने पंडितों और जरूरतमंद लोगों को भोजन कराया। उन्होंने अपनी प्रजा के सुखद जीवन के लिए प्रार्थना की थी। राजा की प्रार्थना से भगवान विष्णु प्रसन्न हुए, जिसके प्रभाव से राज्य में सुख-शांति का माहौल बन गया। राजा के साथ पूरी प्रजा ने भी भाद्रमास पूर्णिमा का व्रत रखना शुरू कर दिया।
नोट: यह लेख धार्मिक मान्यताओं और गणनाओं पर आधारित है। इसकी पुष्टि हम नहीं करते हैं।
