तुलसी पीठ के रामभद्राचार्य हाल ही में उत्तर प्रदेश में रामकथा सुनाने गए थे, जहां उन्होंने कुछ बयान दिए। कथा के दौरान उन्होंने वृंदावन के प्रेमानंद की तारीफ की थी। रामभद्राचार्य ने बताया कि प्रेमानंद युवाओं को धर्म से जोड़ने का काम कर रहे हैं, जो कि सराहनीय है। रामभद्राचार्य की बातों से साफ नजर आ रहा है कि उनके विचार बदल गए हैं, जबकि एक साल पहले वह कुछ और कहते थे।

 

साल 2025 में रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद की तारीफ करने के बजाय उन पर निशाना साधा था। उस दौरान उनका कहना था कि प्रेमानंद को संस्कृत पढ़ना नहीं आता है। इसी वजह से रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद को संस्कृत बोलने की चुनौती भी दी थी। रामभद्राचार्य उत्तर प्रदेश के लखनऊ में रामकथा सुनाने आए थे, उन्होंने कुछ मीडियाकर्मियों से बातचीत के दौरान प्रेमानंद समेत उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भी तारीफ की थी। इसके अलावा रामभद्राचार्य मंदिरों में वीआईपी एंट्री का विरोध भी करते हैं। अब सवाल उठता है कि रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद के बारे में क्या कहा है?

 

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रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद के बारे में क्या कहा?

रामभद्राचार्य ने प्रेमानंद के बारे में कहा कि प्रेमानंद युवाओं को हिंदू धर्म से जोड़ने का काम कर रहे हैं। इसलिए विराट कोहली समेत तमाम युवा उनसे मिलने आते हैं। इसके अलावा उन्होंने कहा कि संन्यासी का मूल धर्म साधना करना और समाज को सही दिशा देना होता है।

 

इसके अलावा रामभद्राचार्य ने योगी आदित्यनाथ के लिए भी अहम बातें कही हैं। उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ एक संन्यासी हैं, जिन्होंने मुख्यमंत्री के रूप में अच्छा काम किया है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कामकाज की भी तारीफ की और कहा कि वह 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य को पूरा करेंगे।

 

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युवाओं को दी सलाह

रामभद्राचार्य ने भारत के युवाओं को खास सलाह दी। उन्होंने कहा कि युवाओं को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए, हर रोज योग करना चाहिए और पढ़ाई पर ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा प्रतिदिन भगवान की पूजा करनी चाहिए। युवाओं को अपने आसपास के लोगों की मदद करनी चाहिए। अगर कोई व्यक्ति भूखा है, तो उसे अपना भोजन दे देना चाहिए।