आज के दौर में शादी टूटना आम बात हो गई है, जहां कई लोग आपसी गुस्से, रंजिश और अहम की वजह से अपना रिश्ता तोड़ लेते हैं और तलाक ले लेते हैं। शादी एक ऐसा बंधन है, जो न सिर्फ दो व्यक्तियों का रिश्ता है, बल्कि दो परिवारों का भी बंधन है। तलाक की वजह से परिवारों के बीच प्रेम और रिश्ते भी प्रभावित होते हैं। हिंदू धर्म में मान्यता है कि शादी केवल एक सामाजिक परंपरा नहीं, बल्कि एक धार्मिक कर्तव्य भी है। इसलिए शादीशुदा लोगों को कोशिश करनी चाहिए कि वे इस बंधन को निभाएं। हिंदू धर्मग्रंथों में ऐसे कई उपदेश बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर वैवाहिक जीवन को सुखद और मजबूत बनाया जा सकता है।

 

हिंदू धर्म में शादी को सिर्फ एक जन्म का रिश्ता नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतर का बंधन माना जाता है। वेद, भगवद्गीता और रामायण जैसे ग्रंथों में कई ऐसी शिक्षाएं मिलती हैं, जिन्हें एक दंपती को अपने जीवन में जरूर अपनाना चाहिए ताकि उनका रिश्ता मजबूत बना रहे। अब सवाल उठता है कि ऐसी कौन-सी शिक्षाएं धर्मग्रंथों में दी गई हैं, जिनसे टूटते रिश्तों को बचाया जा सकता है।

 

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धर्मग्रंथों में शादी को लेकर खास उपदेश

1. कर्तव्य निभाएं


अथर्ववेद में बताया गया है कि शादी सिर्फ प्रेम का बंधन नहीं, बल्कि एक धर्म भी है। जो पति-पत्नी एक-दूसरे के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं, वे धर्म का पालन भी करते हैं। इसलिए व्यक्ति को अपने जीवनसाथी के प्रति कर्तव्य निभाने चाहिए। जैसे कठिन परिस्थितियों में पत्नी को पति का साथ देना चाहिए और पति को भी पत्नी का सहयोग करना चाहिए। इससे रिश्ता और मजबूत होता है।

2. जीवनसाथी का सम्मान करें

मनुस्मृति में बताया गया है कि पति-पत्नी को एक-दूसरे का सम्मान करना चाहिए। इससे दोनों एक-दूसरे के विचारों को बेहतर तरीके से समझ पाते हैं। मनुस्मृति के प्रसिद्ध श्लोक में कहा गया है'यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता।'

 

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इस श्लोक का अर्थ है कि जिस घर में स्त्री का सम्मान होता है, वहां देवताओं का वास होता है। इसी प्रकार जिस घर में पति-पत्नी एक-दूसरे का सम्मान करते हैं, वहां कलह कम होते हैं और सुख-शांति बनी रहती है।

3. हर परिस्थिति में जीवनसाथी का साथ दें

हर परिस्थिति में पति को पत्नी का साथ देना चाहिए और पत्नी को भी अपने पति का साथ देना चाहिए। जिस प्रकार रामायण में माता सीता ने भगवान राम का साथ दिया था। जब भगवान राम महल छोड़कर वनवास गए थे, तब माता सीता भी उनके साथ गई थीं और हर कठिनाई में उनका साथ निभाया था। इस शिक्षा को हर व्यक्ति को अपने जीवन में अपनाना चाहिए।

 

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4. अहंकार पर काबू करें

उपनिषदों के मुताबिक, लोगों को अपने अहंकार पर नियंत्रण रखना चाहिए ताकि वे खुद के साथ-साथ दूसरों को भी समझ सकें। अहंकार में डूबा व्यक्ति केवल स्वयं से प्रेम करता है, दूसरों की भावनाओं को नहीं समझ पाता। ऐसे में रिश्तों में दूरियां बढ़ जाती हैं और संबंध टूटने की नौबत आ सकती है। इसलिए वैवाहिक जीवन को सफल बनाने के लिए अहंकार त्यागना जरूरी माना गया है।