FIFA वर्ल्ड कप 2026 से इंग्लैंड की विदाई हो गई है। इंग्लैंड की टीम को सेमीफाइनल में अर्जेंटीना के हाथों 1-2 से हार के साथ 1966 के बाद पहली बार फाइनल में पहुंचने से चूक गई। इंग्लैंड ने 55वें मिनट में एंथोनी गोर्डन के गोल से अर्जेंटीना पर 1-0 की बढ़त हासिल कर ली थी। हैरी केन की टीम ने लंबे समय तक इस बढ़त को बनाए रखा लेकिन आखिरी लम्हों में अर्जेंटीना ने 2 गोल दाग उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया।
डिफेंसिव होने के कारण हारी इंग्लैंड की टीम
इंग्लैंड की टीम ने बढ़त हासिल करन के बाद डिफेंसिव होकर खेलना शुरू किया। कोच थॉमस ट्यूशेल ने बढ़त कायम रखने के लिए एकादश और रणनीति में बदलाव किए। उन्होंने गोल माउथ के सामने मजबूत दीवार बनाई लेकिन लेकिन अर्जेंटीना और लियोनल मेसी ने उस दीवार को आसानी से तोड़ दिया। 85वें मिटन में मेसी के पास पर एंजो फर्नांडीज ने गोल दाग अर्जेंटीना को बराबरी दिला दी।
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इसके बाद इंजरी टाइम के दूसरे मिनट में मेसी के क्रॉस पर लौटेरो मार्टिनेज ने हेडर से गोल दाग अर्जेंटीना की जीत तय कर दी। इंग्लैंड ने बढ़त बनाने के बाद गोल का प्रयास ही नहीं किया, जिसकी कीमत उसे चुकानी पड़ी। टीम की हार के बाद ट्यूशेल की रणनीतिक चालों की आलोचना हो रही है। फुटबॉल की सबसे बड़ी प्रतिद्वंद्विताओं में से एक इस बड़े मुकाबले में ट्यूशेल की 'बैक फाइव' (डिफेंस में 5 खिलाड़ी) रणनीति की समीक्षा शायद वर्षों तक की जाएगी।
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फैसला गलत कहना आसान - ट्यूशेल
मैच के बाद ट्यूशेल ने अपने फैसलों के बचाव में कहा, 'वे हर हेडर पर प्रहार कर रहे थे। वे लगातार क्रॉस पर क्रॉस दे रहे थे इसलिए हमने बैक फाइव वाली रणनीति अपनाई। हमारे गोल के ठीक बाद हमने बहुत सारे क्रॉस और बहुत सारे मौके विरोधी टीम को दे दिए। लिहाजा हमने मदद करने की कोशिश की लेकिन जाहिर है कि जिम्मेदारी कोच की होती है और अगर चीजें ठीक नहीं होतीं तो यह कहना आसान होता है कि फैसला गलत था।'
