जब वैभव सूर्यवंशी ने कुछ समय पहले राजस्थान रॉयल्स (RR) के ट्रायल्स में हिस्सा लिया था, तब न तो उनके पास वह जबरदस्त 'बैक-लिफ्ट' थी और न ही बल्ले की तेज 'स्पीड' थी, जिसने अब गेंदबाजों की पूरी जमात को बुरे सपनों से परेशान कर दिया है। मगर क्रिकेट की जबरदस्त समझ और बेमिसाल क्लियरिटी की वजह से वैभव अक्सर जुबिन भरूचा को युवा सचिन तेंदुलकर की याद दिलाते हैं, जिनमें 15 साल की उम्र में ऐसे ही गुण थे।

 

देश के सबसे बेहतरीन आधुनिक बल्लेबाजी मेंटोर में से एक भरूचा ने वैभव पर भी काम किया है। उन्होंने वैभव की बल्लेबाजी के पीछे की साइंस और उन खासियतों के बारे में बताया है जो, उन्हें सबसे अलग बनाती हैं।

 

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3 महीने में बदल गया वैभव का गेम

भरूचा ने न्यूज एजेंसी PTI से बताया, 'वैभव की एक अनोखी खासियत यह है कि वह खेल के साथ-साथ खुद को भी बेहतर बनाता जाता है। लोग आज जो देखते हैं, वह तब आठ साल का था, तो ऐसा नहीं था। यह जबरदस्त बैक-लिफ्ट धीरे-धीरे तब विकसित हुई, जब उसके आस-पास गेंदबाजी का स्तर और गति बेहतर होती गई।' 

 

भरूचा लंबे समय से RR से जुड़े हुए हैं। उन्होंने बताया कि IPL 2025 की शुरुआत से पहले कोचों ने उनकी बल्ले की 'स्पीड' पर कैसे काम किया। मुंबई के इस पूर्व बल्लेबाज ने बताया, 'दिलचस्प बात यह है कि जिस ट्रायल्स में उसने हिस्सा लिया था, उस ग्रुप में उनकी बल्ले की स्पीड सबसे तेज नहीं थी। इस बात को पहचाना गया और तीन महीने तक इस पर पूरी लगन से काम किया गया, जिसके बाद हम उनकी बल्ले की स्पीड में 30 प्रतिशत तक और सुधार कर पाए।' 

 

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आखिर क्यों इतने खतरनाक हैं वैभव?

भरूचा से जब पूछा गया कि आखिर ऐसी कौन सी बात है जो वैभव को उन दूसरे प्रतिभाशाली युवा बल्लेबाजों से अलग बनाती है? इस पर उन्होंने कहा, 'गेंद को खेलने का फैसला थोड़ा देर से लेने की काबिलियत, यानी समय को एक पल के लिए थाम लेने की क्षमता ही बेहतरीन बल्लेबाजों की सबसे बड़ी पहचान होती है। अगर आपने वैभव को खेलते हुए देखा है, तो आपने पाया होगा कि उनका फुटवर्क बहुत कम होता है। वह ज्यादातर एक ही जगह खड़े होकर, बल्ले की जबरदस्त स्पीड और ऊंची बैक-लिफ्ट की मदद से गेंद को हिट करता है लेकिन उसके पिछले पैर में हल्की ट्रिगर मूवमेंट होती है, जिसकी मदद से वह क्रीज की गहराई का पूरा फायदा उठा पाता है।'  


भरूचा ने आगे कहा, 'इसका बहुत सारा श्रेय उसके बैकफुट पर लोड होने और उसके बैक-लिफ्ट को जाता है। बैक-लिफ्ट सिर्फ एक स्टाइल की बात नहीं है। जैसे ही गेंद आती है, शरीर, हाथ और आंखें मिलकर एक साथ काम करते हैं ताकि जगह का सही अंदाजा लग सके।' उन्होंने कहा, 'महान बल्लेबाज सिर्फ गेंद पर प्रतिक्रिया नहीं करते, उन्हें गेंद से कुछ अतिरिक्त जानकारी भी मिलती है। यह सिखाना बहुत मुश्किल है, क्योंकि यह नजर, टाइमिंग, संतुलन के मेल से बनता है।'

ट्रेनिंग में किसी से कम नहीं

वैभव टीम के सीनियर खिलाड़ियों जैसे रियान पराग और ध्रुव जुरेल के मुकाबले काफी छोटे हैं, फिर भी उनका ट्रेनिंग रूटीन उनसे अलग नहीं रहा है। वैभव की बल्लेबाजी में जो बात सबसे ज्यादा नजर आई है, वह है स्कोरिंग के मौकों में बढ़ोतरी। 2025 में उनके स्कोरिंग चार्ट में ऑन-साइड के शॉट का दबदबा था लेकिन इस एक साल उन्होंने ऑफ-साइड पर भी शॉट्स खेलना सीख लिया है। भरूचा ने कहा, 'टॉप लेवल पर बल्लेबाजी का विकास सिर्फ कमजोरियों को दूर करने और दबाव में साफ सोच रखने के बारे में ही नहीं है, बल्कि अपनी रेंज बढ़ाने के बारे में भी है।

 

उन्होंने आगे बताया, 'दिलचस्प बात यह है कि IPL सीजन के बीच उसके अभ्यास करने के रूटीन में कोई बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया है। पिछले कुछ साल से वह लगभग उतनी ही गेंदों पर अभ्यास कर रहा है।' तो वैभव में 2025 की तुलना में 2026 में क्या फर्क आया है? इस पर भरूचा ने कहा, 'अब फर्क यह है कि उसका आत्मविश्वास कई गुना बढ़ गया है। पहले, उसे पता था कि वह अंडर-19 के गेंदबाजों पर हावी हो सकता है। अब उसे विश्वास है कि वही तरीके, वही रफ्तार इंटरनेशनल गेंदबाजों के खिलाफ भी काम कर सकते हैं। यह अंदरूनी बदलाव बहुत बड़ा है। प्रतिभा खिलाड़ियों को एक सीमा तक पहुंचा सकती है लेकिन अक्सर उनका विश्वास ही उन्हें असल में उस सीमा तक पहुंचने में मदद करता है।'

 

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वैभव में दिखी सचिन की झलक

वैभव अभी कामयाबी की बुलंदियों पर हैं लेकिन जाहिर है उनके जीवन में भी उतार-चढ़ाव के दौर आएंगे, जैसा कि हर खिलाड़ी के साथ होता है। उनके बारे में चर्चाएं तेजी से बढ़ेंगी लेकिन भरूचा का मानना ​​है कि सचिन के बाद, उन्होंने किसी भी टीनएजर में इतनी क्लिएरिटी नहीं देखी है।

 

उन्होंने कहा, 'इस लिहाज से, वह मुझे काफी हद तक युवा सचिन तेंदुलकर की याद दिलाते हैं। जरूरी नहीं कि खेलने के अंदाज में, बल्कि परिपक्वता और माइंडसेट की क्लियरिटी के मामले में। कुछ खिलाड़ी उम्र में तो कम होते हैं लेकिन उनकी समझ काफी गहरी होती है। वह भी ऐसे ही एक खिलाड़ी हैं।' 

 

भरूचा ने कहा, 'यह सोचना अवास्तविक होगा कि वह उन मुश्किलों से पूरी तरह बचे रहेंगे, जिनका सामना हर क्रिकेटर को करना पड़ता है। असफलता, कड़ी जांच-परख और उम्मीदों का बोझ, ये ऐसी चीजें हैं जिनसे कोई बच नहीं सकता।'